बांग्लादेशी हिंदुओं की हत्या के बाद मायावती की मुखरता ने हिंदुत्व को नयी धार दे दी!

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  • बांग्लादेशी संदेह के घेरे में कांग्रेस-सपा-तृणमूल व चुप्पी साधने वाले कथित सेक्युलर!

मनोज श्रीवास्तव

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमों बहन कुमारी मायावती ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में दलित हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे पर पहले भी आवाज बुलंद किया है। लेकिन 25 दिंसबर को बांग्लादेश में हिंदुओं खास कर दलितों की हो रही सार्वजनिक हत्याओं के मुद्दे को अपने एक्स हैंडल पर जितने तीखे तौर से उठाया उससे मायावती हिंदुत्व के और निकट आ गयीं। बहुत लोगों को लगता होगा कि उन्होंने बीजेपी की बात दोहरा दी है। लेकिन मायावती यूपी की राजनीति की चतुर खिलाड़ी रही हैं। लोकसभा में शून्य और यूपी विधानसभा में महज एक सीट पर सिमट चुकी मायावती एक बार फिर से पूरी तैयारी के साथ यूपी में छा जाने के लिए प्रयासरत हैं। राजनैतिक समीक्षक मानते हैं कि उन्होंने कुछ सोच-समझकर ही यह वक्तव्य दिया होगा। उन्होंने पिछले साल भी कहा था कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों, खासकर दलितों, पर अत्याचार हो रहे हैं, और कांग्रेस-सपा जैसे विपक्षी दल इस पर चुप हैं क्योंकि वे मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे हैं।बसपा सुप्रीमो ने यहां तक कह दिया था कि कांग्रेस और सपा के नेताओं को सिर्फ संभल की फिक्र रहती है। उन्होंने विभाजन के दौरान हुई गलतियों का जिम्मेदार कांग्रेस को ठहराया था, जिससे कारण दलित पाकिस्तान और बांग्लादेश में फंस गये, जो अब वहाँ के सर्वाधिक पीड़ित हैं। मायावती ने केंद्र से दलित हिंदुओं को भारत वापस लाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी। जानकार मानते हैं कि मायावती का यह स्टैंड उनके लिये नुकसान के बजाय फायदेमंद साबित हो सकता है। वहां पीड़ित हिंदुओं का बड़ा हिस्सा दलित है। इस लिये बांग्लादेश के पीड़ित हिंदुओं का मुद्दा उन्हें भावनात्मक रूप से पीड़ितों के साथ जोड़ता है। इससे बीएसपी का आधार मजबूत हो सकता है, खासकर पूर्वांचल में जहां बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा पुराना है। एसपी-कांग्रेस पर हमला करके मायावती बसपा को असली दलित पार्टी के रूप में एक बार फिर से स्थापति कर रही हैं। मुस्लिम वोट बसपा से पहले ही दूर हो चुके हैं (2024 में मुस्लिम सपोर्ट SP की तरफ शिफ्ट हुआ), इसलिए मायावती को नुकसान कम फायदा अधिक दिख रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं खास कर दलितों और उनकी नाबालिग लड़कियों पर हो रहे अत्याचार पर भीम आर्मी के अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर बोलने से भागते हैं।मायावती ने यह विरोध दर्ज करवा के सिद्ध किया है कि वह देश-दुनिया में जहां भी दलित उत्पीड़न होगा उनके समर्थन में आवाज उठायेंगी।

25 दिसंबर को मायावती ने सोशल मीडिया पर जो टियूट किया “जैसाकि सर्वविदित है कि अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब को जिस प्रकार से साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है उससे अपने देश में ही नहीं बल्कि अन्यत्र भी चिन्ता की लहर है तथा अभी हाल ही में वहाँ एक दलित युवक की जिस प्रकार से नृशंस हत्या की गयी है उसको लेकर भारत भर में लोगों का सड़कों पर फूटा आक्रोश स्वाभाविक है, जिसका भारत सरकार को तुरन्त समुचित संज्ञान लेकर आगे हर स्तर पर कुछ और भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की देश को आशा है और यही समय की माँग भी लगती है। वैसे तो अपने देश में भी ख़ासकर दलितों व आदिवासियों आदि पर सदियों से होने वाली जातिवादी द्वेष, जुल्म-ज़्यादती, शोषण व तिरस्कार आदि रुका नहीं है बल्कि हर स्तर पर लगातार जारी है तथा उनकी सुरक्षा को लेकर बने क़ानूनों को एक प्रकार से निष्क्रिय ही बना दिया गया है, किन्तु पड़ोसी देश बांग्लादेश में इसी प्रकार की होने वाली जुल्म-ज्यादती कोई कम गंभीर बात नहीं है बल्कि यह अति-दुखद व चिन्ता की बात है। साथ ही, पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति को लेकर ख़ासकर देश में लोगों की चिन्तायें लगातार बनी रहती हैं और इस मामले में सरकार अपनी भूमिका भी निभाने का प्रयास करती रहती है, किन्तु हाल के दिनों में बांग्लादेशी में जिस प्रकार से भारत व हिन्दू विरोधी घटनायें घटित हो रही हैं उसको लेकर केन्द्र सरकार को लोगों की अपेक्षा के अनुसार और भी अधिक सक्रियता एवं प्रभावी क़दम उठाने की ज़रूरत लग रही है जिसको लेकर जनता का समर्थन अवश्य ही सरकार के साथ होगा। सरकार उचित ध्यान दे।”

बांग्लादेशी में हिंदू अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का मुद्दा 2024-25 के बाद 2026 में भी भारत की राजनीति में बहुत संवेदनशील विषय रहेगा। शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। भारत में इसकी तपिश अब हिंदुत्व की राजनीति से जुड़कर व्यापक चर्चा ले रहा है। बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न का मुद्दा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जोर-शोर से उठा रहे हैं। जब से बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी इस मुद्दे पर हमलावर हुईं तब से कथित प्रगतिशील राजनीति करने वालों की चूलें हिल गयी हैं। उनको मायावती का जो बयान अप्रत्याशित लग रहा है, वह दलितों के बहुत बड़े वर्ग को एकदम मौलिक और उपयुक्त लग रहा है।

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेशी समाजवादी पार्टी को ललकारते हुए कहा कि बांग्लादेश में एक हिंदू की लिंचिंग हुई पर विपक्ष कुछ बोल नहीं रहा है। गाजा में मुसलमानों के साथ यही अत्याचार होता है तो विपक्ष उस पर मुखर हो जाता है। योगी ने कहा कि याद रखिए जो लोग अभी बांग्लादेश के अत्याचार पर नहीं बोल रहे हैं कल को जब यूपी सरकार रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर एक्शन लेगी तो इन लोगों को बोलने का अधिकार नहीं होगा। योगी के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर से तो हिंदुओं के उत्पीड़न पर कोई बयान नहीं आया पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने जरूर एक्स पर एक पोस्ट करके अपनी चिंता जताई है। मायावती ने पिछले साल भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचारों की कड़ी निंदा की थी। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस उत्पीड़न को केवल दलितों तक ही सीमित नहीं रखा है बल्कि समस्त हिंदू समाज की बात कर रही हैं।

बांग्लादेशी बता दें कि भारत का विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, बांग्लादेश में हिंदुओं पर उत्पीड़न के मुद्दे पर तटस्थ बना हुआ है। बीजेपी इसका मुख्य कारण तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक को बता रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर संसद में कोई बयान नहीं दिया, बल्कि संभल हिंसा जैसे घरेलू मुद्दों पर फोकस किया, जहां मुस्लिम समुदाय द्वारा पुलिस पर हमले के बाद हुई पुलिसिया कार्यवाही पर यूपी सरकार को घेरा। आत्मरक्षार्थ पुलिस कार्यवाही में मारे गये दंगाइयों के परिजनों को सपा ने जहां आर्थिक सहायता पहुंचाया।वहीं बांग्लादेश मुद्दे को भाजपा की डायवर्सन टैक्टिस बताया। भारत-बांग्लादेश संबंधों का डिप्लोमैटिक मुद्दा बता कर वहां हो रहे हिंदुओं की हत्या पर मुंह सिल लिया।राजनैतिक विद्वान मानते हैं कि विपक्ष यदि इसमें कूदा तो हिंदुत्व की राजनीति को बढ़ावा मिलेगा, जो भाजपा को फायदा पहुंचाएगा। हिंदुत्ववादी कहते हैं कि गाजा जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष ने मुस्लिम समुदाय के पक्ष में आवाज उठाई है, इसलिए बांग्लादेश में हिंदुओ की हो रही हत्याओं पर चुप्पी न साधकर कम से कम दिखावे के लिए ही हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध आवाज बुलंद करनी चाहिये थी।यूपी जैसे राज्य में और भी स्पष्ट है। जहां करीब 19% मुस्लिम वोटर हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने मुस्लिम-दलित-ओबीसी वोटों पर फोकस किया, वह सोचते हैं कि बांग्लादेश का मुद्दा उठाने से मुस्लिम वोटर्स में असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। विपक्ष इस मुद्दे को भाजपा का पोलराइजेशन टूल मानकर उससे दूरी बनाता रहा है।

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