ए अहमद सौदागर
लखनऊ। उन्नाव जिले की एक युवती के साथ हुई दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उच्च न्यायालय से राहत मिली है। सजा को निलंबित कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंगर दिल्ली में उस जगह के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएंगे, जहां पीड़िता रहती है। अदालत ने उसे 15 लाख रुपये का बॉन्ड भरने का निर्देश दिया है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की अध्यक्षता वाली बेंच ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका के लंबित रहने के दौरान सजा को निलंबित रखने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने सेंगर को जमानत के दौरान दिल्ली में ही रहने और पीड़िता के निवास से पांच किलोमीटर दूर रहने का आदेश दिया है। सेंगर ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जो अभी लंबित है। सनद रहे कि 16 दिसंबर 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को दस साल की कैद की सजा सुनाई थी। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर पर दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर समेत सभी सातों आरोपियों को भी दस-दस साल की कैद और दस-दस लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
रेप पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में 9 अप्रैल 2018 को मौत हो गई थी। चार जून 2017 को रेप पीड़िता ने जब कुलदीप सेंगर पर रेप का आरोप लगाया था, उसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह और उसके साथियों ने पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटने के बाद पुलिस को सौंप दिया था। रेप पीड़िता के पिता को जेल में शिफ्ट करने के कुछ ही घंटों बाद जिला अस्पताल में लड़की के पिता की मौत हो गई थी। 20 दिसंबर 2019 को पीड़िता से रेप के मामले में तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उम्रकैद के अलावा 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। जुर्माने की इस रकम में से दस लाख रुपए पीड़िता को देने का आदेश दिया था। तीस हजारी कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भी कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर किया है।
