राजनैतिक उथलपुथल..आकस्मिक घटनाओ का रहा वर्ष 2025

बलराम कुमार मणि त्रिपाठी
बलराम कुमार मणि त्रिपाठी

जमीनी विवादों और बढ़ते आर्थिक खर्चों के बीच बीता यह वर्ष 2025 अब नए साल में प्रवेश करने जा रहा है। 2+0+2+5=9, यानी मंगल का वर्ष—जो संघर्ष, टकराव और दुर्घटनाओं से भरा रहा। यह राहत की बात रही कि मानसिक तनाव लंबे समय तक हावी नहीं रहा। दो बार गृहमंत्री की संसद में प्रयुक्त भाषा ने विवाद खड़ा किया और प्रधानमंत्री भी कई मौकों पर दबाव में नजर आए। दिल्ली और बिहार में अपेक्षा से अधिक सीटें भाजपा को मिलीं और एनडीए की सरकार बनी, लेकिन ईवीएम और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे। दिसंबर में एफिंस्टन के सेक्स स्कैंडल ने देशभर में तनाव और सनसनी फैलाई। हवाई दुर्घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जान गई। विद्यार्थियों के हॉस्टल पर विमान गिरने की घटना, कश्मीर में निर्दोष पर्यटकों से धर्म पूछकर की गई हत्या, दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण और यमुना की सफाई पर उदासीनता—ये सभी घटनाएं मन को व्यथित करने वाली रहीं। उत्तराखंड में मजदूरों को बचाने के प्रयास, पंजाब में बाढ़, पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की अल्पकालिक कार्रवाई, मीडिया की गलत बयानी, संसद में जल्दबाजी में पास किए गए बिल और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच तीखा टकराव चर्चा में रहा। दिल्ली के ब्लास्ट और मणिपुर की घटनाएं भी बेहद दुखद रहीं। इसी बीच एआई का वर्चस्व लगातार बढ़ता गया।

केंद्र में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देना पड़ा और नए उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन ने पदभार संभाला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात चिंताजनक रहे। विभिन्न देशों में संघर्ष जारी रहा। अमेरिका का भारत के प्रति असंवेदनशील रवैया, युवाओं को हथकड़ी-बेड़ी में भारत भेजा जाना शर्मनाक रहा। भारी टैरिफ लगाकर अमेरिका ने भारत-अमेरिका मैत्री संबंधों में खटास पैदा की, वहीं चीन ने सीमा पर अनावश्यक हरकतें जारी रखीं। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में कुछ कमी दिखी तो राहुल गांधी की राजनीतिक ताकत बढ़ती नजर आई। 75 वर्ष की आयु पार करने के बाद भी आरएसएस प्रमुख और प्रधानमंत्री ने मार्गदर्शक मंडल में जाने के बजाय अपने पदों पर बने रहना चुना। अयोध्या में राम मंदिर के गुंबद पर पताका लगाकर उसे पूर्णता प्रदान की गई। मुझे भी रामलला के दर्शन का सौभाग्य मिला। उत्तराखंड के चारों धामों की यात्रा सुगम रही। मार्च में प्रयाग में अमावस्या के आसपास भगदड़ की घटना हुई, जिसमें कुछ लोगों की मौत और कई घायल हुए, हालांकि जल्द ही स्थिति सामान्य कर ली गई। लाखों से लेकर करोड़ों तक श्रद्धालु पहुंचे और मुख्यमंत्री स्वयं व्यवस्थाओं में जुटे रहे। पंजाब समेत कई प्रदेश बाढ़ की चपेट में रहे। बीमारियां बढ़ीं और आकस्मिक मौतों की संख्या में भी इजाफा हुआ। सिने जगत से धर्मेंद्र, असरानी, वैजयंती माला सहित दक्षिण भारत के कुछ कलाकारों का जाना दुखद रहा। काशी के पं. छन्नूलाल मिश्र का निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति साबित हुआ।

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नितिन नबीन चुने गये BJP अध्यक्ष

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन सोमवार को पार्टी के अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित हो गये। चुनाव अधिकारी डॉ के लक्ष्मण ने इस चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के बाद एक विज्ञप्ति में घोषणा की कि इस पद के लिए केवल एक प्रत्याशी नबीन के […]

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महाभारत काल से जुड़ा है मां बनैलिया मंदिर का संबंध

भारत ही नहीं नेपाल से भी बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं भक्तजन मां के दर्शन से ही होती है भक्तजनों की मनोकामना पूरी उमेश चन्द्र त्रिपाठी महाराजगंज। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में नौतनवां स्थित माता बनैलिया देवी मंदिर अपने इतिहास और मान्यताओं के लिए जाना जाता है। आसपास के जिलों में ही नहीं […]

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गोरखपुर में छात्रा से छेड़खानी का वीडियो वायरल

24 घंटे में आरोपी गिरफ्तार एंटी रोमियो स्क्वाड की सख्त कार्रवाई उमेश चन्द्र त्रिपाठी गोरखपुर। गोरखपुर जिले के गोला क्षेत्र से छात्रा से छेड़खानी का एक मामला सामने आया है, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी। कोचिंग पढ़ने जा रही एक छात्रा का युवक ने हाथ पकड़कर उसे गली के अंदर खींचने का प्रयास किया। […]

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