प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय जॉर्डन की ऐतिहासिक यात्रा पर हैं। दौरे के दूसरे दिन भारत-जॉर्डन संबंधों की गर्मजोशी तब और गहराई जब क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला II ने पीएम मोदी के लिए एक विशेष और प्रतीकात्मक कदम उठाया। क्राउन प्रिंस स्वयं वाहन चलाकर प्रधानमंत्री मोदी को जॉर्डन म्यूजियम तक ले गए, जिसे कूटनीतिक जगत में आपसी सम्मान और विश्वास का मजबूत संकेत माना जा रहा है।
क्राउन प्रिंस अल हुसैन पैगंबर मोहम्मद की 42वीं पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज हैं और जॉर्डन में उन्हें आधुनिक सोच और युवा नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। उनका यह व्यक्तिगत जेस्चर भारत-जॉर्डन संबंधों की मजबूती को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय की सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा ने इस यात्रा को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि यह पिछले 37 वर्षों में भारत और जॉर्डन के बीच पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा है और यह दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है। जॉर्डन ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का खुलकर समर्थन किया और आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन नेतृत्व के डी-रेडिकलाइजेशन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस्लामी दुनिया में जॉर्डन संयम और शांति की सशक्त आवाज बनकर उभरा है। इसके अलावा उर्वरक क्षेत्र, विशेष रूप से फॉस्फेट के उत्पादन और आपूर्ति में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देते हुए 2025-29 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही जॉर्डन की ऐतिहासिक पेट्रा साइट और भारत की एलोरा गुफाओं के बीच ट्विनशिप समझौता भी फाइनल किया गया, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा मिलेगा। यह यात्रा भारत-जॉर्डन साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाती है।
