रामभक्ति, राष्ट्रधर्म और सामाजिक स्वाभिमान की हुंकार के साथ मना अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का स्थापना दिवस

  • श्रीराम ने अपने काज के लिए स्वयं ही कल्याण सिंह को चुना: संदीप सिंह
  • भाजपा के सत्ता के शिखर पर होना कल्याण सिंह की मेहनत का फल: केशव मौर्य
  •  सत्ता त्यागकर सिद्धांतों पर खड़ा रहना कल्याण सिंह का असाधारण साहस था: ब्रजेश पाठक
  • लोधी समाज अब नेतृत्व करेगा, दिशा देगा और निर्णायक भूमिका निभाएगा: राजवीर

लखनऊ। रामभक्ति, राष्ट्रधर्म और सामाजिक स्वाभिमान की हुंकार के साथ अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा ने सोमवार को अपना प्रथम स्थापना दिवस मनाया। गोमतीनगर विस्तार स्थित सीएमएस सभागार से उठा यह स्वर केवल एक संगठन के एक वर्ष पूरे होने का उत्सव नहीं था, बल्कि यह उस वैचारिक धारा का उद्घोष था जिसने सत्ता को नहीं, सिद्धांत को चुना, कुर्सी को नहीं, श्रीराम को प्राथमिकता दी। श्रद्धेय स्व. कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ के त्याग, साहस और राष्ट्रनिष्ठा को केंद्र में रखकर आयोजित यह समारोह स्पष्ट संदेश दे गया कि लोधी समाज अब स्मरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नेतृत्व करेगा, दिशा देगा और निर्णायक भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बेहद स्पष्ट और आक्रामक शब्दों में कहा कि अगर आज हम देश और प्रदेश में सत्ता के शिखर पर हैं, तो उसमें पूज्य कल्याण सिंह बाबूजी का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि बाबूजी केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किए जाते हैं। उनके नाम के साथ त्याग, साहस और राष्ट्रधर्म स्वतः जुड़ जाता है।  मौर्य ने कहा कि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल में भी कमल का फूल खिलेगा और वही बाबूजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

उन्होंने छह दिसंबर 1992 की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए दो टूक कहा कि लोग कुर्सी के लिए क्या-क्या नहीं करते, लेकिन अगर बाबूजी भी रामभक्तों को रोक देते, अगर उन्होंने कारसेवकों को मुलायम सिंह की तरह रोका होता, तो न ढांचा ढहता और न ही आज रामलला का भव्य मंदिर बनता। उनका यह कथन सभागार में मौजूद जनसमूह के लिए केवल वक्तव्य नहीं, बल्कि वैचारिक उद्घोष था। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि अडिग रहकर संगठन को मजबूत करें और एक धारा में चलें, यही बाबूजी के प्रति सच्ची निष्ठा होगी।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह संगठन पसीने और परिश्रम की ताकत से आगे बढ़ रहा है और गरीबों, वंचितों तथा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाबूजी गरीबी और भूख को भाषणों से नहीं, जीवन से जानते थे। यही कारण था कि जब प्रभु श्रीराम का प्रश्न आया तो उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी को भी ठोकर मार दी।  पाठक ने कहा कि सत्ता से चिपके रहना सामान्य है, लेकिन सत्ता त्यागकर सिद्धांतों पर खड़ा होना असाधारण साहस है, और बाबूजी उसी साहस के प्रतीक थे। उन्होंने बांदा विश्वविद्यालय का नाम स्वामी ब्रह्मानंद  महाराज के नाम पर रखने का सुझाव देकर सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श को नई धार दी।

बेसिक शिक्षा मंत्री  संदीप सिंह ने कहा कि अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का प्रथम स्थापना दिवस समाज की एकता, संगठनात्मक सशक्तता और सर्वसमावेशी सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि युवाओं का मार्गदर्शन करना, उन्हें संगठित करना और सांस्कृतिक चेतना के साथ सकारात्मक राष्ट्रनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ाना लोधी समाज का दायित्व है।  सिंह ने कहा कि बाबूजी कल्याण सिंह के आदर्शों और विचारों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। प्रभु श्रीराम की सेवा में मुख्यमंत्री पद त्यागने वाले बाबूजी का सपना आज राम मंदिर के पूर्ण निर्माण के रूप में साकार हो चुका है।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम उसी को चुनते हैं, जो उनके लिए समर्पित होता है और लोधी समाज के गरीब परिवार में जन्मे कल्याण सिंह इसी समर्पण का उदाहरण थे। मंत्री ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी, अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी और स्वामी ब्रह्मानंद जी महाराज को स्मरण करते हुए कहा कि उनके विचार और सत्कर्म सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा को पहला मुख्यमंत्री लोधी समाज ने दिया और बाबूजी सर्वसमाज के लिए स्वीकार्य नेता रहे, क्योंकि उन्होंने किसी वर्ग या जाति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का हित साधा।

पूर्व सांसद राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ ने कहा कि स्थापना दिवस पर उमड़ी भीड़ यह प्रमाण है कि एक वर्ष में ही संगठन शैशवावस्था से निकलकर परिपक्वता की ओर बढ़ चुका है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जो संगठन अपने वर्चस्व के लिए चलते हैं, वे समाज को तोड़ते हैं, जबकि यह संगठन समाज को जोड़ने के लिए बना है। उन्होंने स्वामी ब्रह्मानंद  महाराज के नाम पर विश्वविद्यालय की मांग को मजबूती से दोहराया। सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि यदि कल्याण सिंह न होते तो राम मंदिर आंदोलन निर्णायक मुकाम तक नहीं पहुंचता। राम मंदिर का नाम आते ही हर हिंदू के मन में बाबूजी का चित्र उभर आता है, क्योंकि उन्होंने जो कहा, वही करके दिखाया। समारोह का समापन एक स्पष्ट संकल्प के साथ हुआ कि अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा अब केवल सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी चेतना, सांस्कृतिक स्वाभिमान और निर्णायक संघर्ष का सशक्त मंच बनकर उभरेगी।

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