यूपी के बाद अब 1000 करोड़ के अवैध कफ सीरप स्कैम में झारखंड कनेक्शन

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  • अवैध कफ सिरप मामले में रांची के तुपुदाना में ED का छापा,
  • SAILI के संचालक ने औषधि विभाग पर लगाया ₹ 20 लाख घूस मांगने का आरोप,
  • SAILI TRADERS से दवाएं, डिजिटल उपकरण, दस्तावेज ज़ब्त,

नया लुक ब्यूरो

रांची। कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में ईडी ने रांची में भी छापेमारी शुरू की है। ईडी की टीम रांची के तुपुदाना स्थित एक फैक्ट्री को सर्च कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार ईडी की रेड लखनऊ, वाराणसी, अहमदाबाद, जौनपुर, सहारनपुर और रांची सहित कई शहरों में अभी जारी है।

रांची के तुपुदाना में रेड

कई वाहनों और सुरक्षा के साथ ईडी की टीम शुक्रवार को तुपुदाना स्थित शैली ट्रेडर्स पहुंची। हालांकि फैक्ट्री के अंदर जाने के लिए टीम को इंतजार करना पड़ा। शैली ट्रेडर्स में फिलहाल कड़ी सुरक्षा के बीच एजेंसी अपनी जांच कर रही है।

क्या है पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष में मध्यप्रदेश के के गुना और विदिशा में संदिग्ध तौर पर कोडीन और कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की मौत और गंभीर बीमारियां सामने आईं थी। जिसके बाद पूरे नेटवर्क की जांच शुरू हुई। रिपोर्टों के बाद यह साफ हुआ कि केवल यह एक जहरीला सिरप ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर कोडीन‑युक्त कफ सिरप की तस्करी का रैकेट चल रहा है। जिसकी सप्लाई मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में हो रही थी। जांच के बाद यह बात सामने आई कि इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड बनारस का शुभम जायसवाल है। जिसने फर्जी फर्मों और नकली बिलिंग के जरिए कोडीन कफ सिरप की बड़े पैमाने पर खेपें उठवाईं और अलग‑अलग राज्यों व पड़ोसी देशों में सप्लाई की। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह रांची से कोलकाता होकर दुबई भाग गया और अभी वहीं छिपा हुआ है। इस मामले की जांच ईडी भी कर रही है। इस काले धंधे में 1,000 करोड़ से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आने की बात कही जा रही है, जिसकी जांच ईडी कर रही है।

1000 करोड़ रुपये के अवैध कफ सीरप मामले में पीएमएल अधिनियम के तहत जांच कर रही ईडी की टीम ने रांची के तुपुदाना सहित देश के 25 ठिकानों पर शुक्रवार की सुबह से ही छापेमारी शुरू की है। यह छापेमारी ईडी के लखनऊ स्थित जोनल कार्यालय में दर्ज इंफोर्समेंट केस इफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) के आधार पर हुई है। रांची के तुपुदाना के औद्योगिक क्षेत्र स्थित शैली ट्रेडर्स में ईडी की टीम को बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण व दवाएं मिलीं हैं, जिसका ईडी सत्यापन कर रही है। इसके संचालक भोला प्रसाद हैं, जिनके तुपुदाना स्थित एक फ्लैट में भी ईडी की टीम पहुंची थी। भोला प्रसाद उत्तर प्रदेश की बनारस पुलिस में दर्ज प्राथमिकी में भी आरोपित हैं। वे अवैध कफ सीरप मामले के मुख्य आरोपित शुभम जायसवाल के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। उन्होंने भिलाई केमिकल के संचालक जगन्नाथ साहू से तुपुदाना औद्योगिक क्षेत्र स्थित उक्त प्रतिष्ठान को किराए पर लिया था। यहां पिछले दिनों बनारस पुलिस ने भी छापेमारी की थी, लेकिन कफ सीरप की बरामदगी दूसरे ठिकाने से हुई थी।

इस प्रकरण में एक दिन पहले तुपुदाना ओपी में औषधि नियंत्रक शैल अंबष्ट के बयान पर भी भोला प्रसाद के विरुद्ध लिखित शिकायत की गई है। दूसरी ओर से भोला प्रसाद ने भी आनलाइन शिकायत कर औषधि विभाग के विरुद्ध 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। क्या है कोडीन (Codeine) ओपियोइड (मादक) दवाओं के वर्ग का एक सदस्य है, जिसका मुख्य रूप से उपयोग हल्के से मध्यम दर्द को कम करने और खांसी के इलाज के लिए किया जाता है। यह मॉर्फिन (morphine) के समान है और शरीर में दर्द संकेतों को अवरुद्ध करके काम करता है।

मुख्य उपयोग

दर्द से राहत: इसका उपयोग ऑपरेशन या चोट के बाद होने वाले अल्पकालिक दर्द के इलाज के लिए किया जाता है, खासकर जब अन्य दर्द निवारक जैसे पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन प्रभावी नहीं होते हैं।

खांसी दबाने के लिए: यह मस्तिष्क के उस हिस्से में गतिविधि को कम करता है जो खांसी का कारण बनता है।

दस्त का इलाज: कभी-कभी इसका उपयोग दस्त के इलाज में भी किया जाता है, क्योंकि यह आंतों की मांसपेशियों की गति को धीमा कर देता है।

महत्वपूर्ण सावधानियाँ और दुष्प्रभाव

कोडीन एक प्रभावी दवा है, लेकिन इसके कुछ गंभीर जोखिम और दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

निर्भरता और दुरुपयोग: लंबे समय तक या अनुचित उपयोग से शारीरिक और मानसिक निर्भरता (लत) हो सकती है।

सांस लेने में समस्या: यह सांस लेने की प्रक्रिया को धीमा या कठिन बना सकता है, जो कि एक गंभीर या जानलेवा जोखिम हो सकता है, खासकर बच्चों में।

सामान्य दुष्प्रभाव: चक्कर आना, उनींदापन, कब्ज, मतली (जी मिचलाना), उल्टी और मुंह सूखना इसके सामान्य दुष्प्रभाव हैं।

गर्भावस्था और स्तनपान: गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान कोडीन की आमतौर पर सिफारिश नहीं की जाती है, जब तक कि डॉक्टर द्वारा विशेष रूप से निर्धारित न किया जाए।

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