रुक्मिणी अष्टमी आज है जानिए पूजा विधि और महत्व

Untitled 1 copy 11

राजेन्द्र गुप्ता

प्रत्येक वर्ष पौष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को रुक्मिणी अष्टमी मनाई जाती है। इस बार शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025 को रुक्मिणी अष्टमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन देवी रुक्मिणी का व्रत रखा जाता है । इस दिन भगवान कृष्ण व रुक्मिणी की पूजा का विधान है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन द्वापर युग में देवी रुक्मिणी का जन्म हुआ था, वे विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थी। उन्हें पौराणिक शास्त्रों में लक्ष्मीदेवी का अवतार कहा गया है। मान्यतानुसार रुक्मिणी अष्टमी के दिन विधिपूर्वक देवी रुक्मिणी की पूजा अर्चना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन के समस्त कष्टों का अंत होता है।

रुक्मिणी अष्टमी कब है?

हिन्दी पंचाग के अनुसार प्रत्येक वर्ष रुक्मिणी अष्टमी का व्रत पौष मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी को किया जाता है। और इस वर्ष रुक्मिणी अष्टमी का व्रत 12 दिसबंर 2025 को रखा जाएगा।

रुक्मिणी अष्टमी व्रत पूजा विधि

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत रखने वाली स्त्रियां स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. इसके भगवान सत्यनारायण ,पीपल व तुलसी को अर्घ्य दें। मान्यताओं के अनुसार पीपल में भगवान विष्णु और तुलसी में माता लक्ष्मी जी का वास होता है।
  3. घर के मंदिर में गंगाजल से छिड़काव कर एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं।
  4. इसके बाद चौकी पर सर्वप्रथम भगवान गणेश की स्थापना करें और फिर भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी की मूर्ति स्थापित करें।
  5. चौकी के एक ओर शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी का कलश रखकर ऊपर आम, अशोक के पत्तें रखें और फिर एक नारियाल रखें।
  6. अब पूजा आरंभ करें। पूजन करते समय सर्वप्रथम भगवान गणेश जी की पूजा करें, फिर भगवान कृष्ण व देवी रुक्मिणी को जल से स्नान कराएं और फिर उनका अभिषेक करें।
  7. इसके बाद देवी रुक्मिणी को फल, फूल, रौली-मौली, चावल, सुपारी, लॉग, नैवेद्य, अक्षत, चंदन, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
  8. पूजा के दौरान भगवान कृष्ण को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और माता रुक्मिणी को लाल रंग के वस्त्र और शृंगार का सामान अर्पित करें।
  9. इसके उपरांत रुक्मिणी अष्टमी व्रत की कथा सुनें और आरती करें।
  10. भोगस्वरूप माता रुक्मिणी को खीर चढ़ाएं और सभी उपस्थति लोगों में इसी प्रसाद का वितरण करें।
  11. इसके बाद गाय माता को भोजन देकर स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

रुक्मिणी अष्टमी का महत्व

मान्यता के अनुसार पौष मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी को ही माता लक्ष्मी ने देवी रुक्मिणी के रूप में जन्म लिया था। रुक्मिणी दिखने में अतिसुंदर एवं सर्वगुणों से संपन्न थी। उनके शरीर पर माता लक्ष्मी के समान ही लक्षण दिखाई देते थे, इसीलिए उन्हें लोग लक्ष्मस्वरूपा भी कहते थे। मान्यता है कि जो कोई स्त्री रुक्मिणी अष्टमी का व्रत करती है तो उस पर देवी हमेशा अपनी कृपा बनाए रखती है और उसकी सभी मनोकामनाए पूर्ण करती है।

 

Untitled 5 copy
homeslider Purvanchal

आज तक किसी ने न देखी थी और न सुनी थी ऐसी शादी

शादी वाले दिन हादसे का शिकार हुई दुल्हन गोरखपुर में प्यार  और भरोसे साथ निभाने की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। शादी के दिन सड़क हादसे में घायल होकर ICU पहुंची दुल्हन को दूल्हे ने छोड़ने के बजाय अस्पताल में ही अपना जीवनसाथी बना लिया। मामला गोरखपुर के बांसगांव क्षेत्र के हटवार गांव का […]

Read More
Untitled 4 copy
Crime News homeslider

गजब प्यार! इधर बेटी की उठी डोली उधर मां की उठ गई अर्थी

बेटी की विदाई बनी मां की अंतिम विदाई, डोली उठते ही आया हार्ट अटैक लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के कासिमाबाद थाना क्षेत्र के महुली बांध गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया। घर में जहां देर रात तक शादी की खुशियां और मंगलगीत गूंज रहे थे, वहीं […]

Read More
पश्चिम बंगाल
homeslider National West Bengal

वकील की ड्रेस में कोर्ट पहुंचीं ममता, अब बार काउंसिल ने शुरू की जांच

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला राजनीति नहीं बल्कि उनकी कानूनी प्रैक्टिस को लेकर उठे विवाद का है। हाल ही में ममता बनर्जी कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील की पोशाक पहनकर पहुंचीं, जिसके बाद उनके ‘प्रैक्टिसिंग एडवोकेट’ होने के दर्जे पर […]

Read More