- जो शिक्षक रोज पढ़ाने निकलता था, वो चुनावी दबाव में टूटा
- परिजनों का छलका दर्द, … अब हमारा क्या होगा
लखनऊ: मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के बहेड़ी गांव में बीएलओ सर्वेश सिंह की आत्महत्या ने पूरे जिले को हिला दिया है। जो व्यक्ति रोज सुबह बच्चों को पढ़ाने निकलता था, वही शिक्षक चुनावी दबावों के बोझ तले टूट गया। 40 वर्षीय सर्वेश के घर में अब न सुकून है, न सहारा—सिर्फ एक सवाल है, “अब हमारा क्या होगा?”
सर्वेश सिंह कंपोजिट विद्यालय जाहिदपुर भगतपुर टांडा में सहायक अध्यापक थे और चुनाव कार्य के दौरान BLO के रूप में तैनात थे। पत्नी बबली की आँखों में अब भी विश्वास नहीं होता कि उनके शांत स्वभाव वाले पति ऐसा कदम उठा सकते हैं। वह बताती हैं कि सर्वेश पिछले कई दिनों से अत्यधिक मानसिक दबाव में थे। SIR फॉर्म, लगातार आने वाले मैसेज, ऊपर से अधिकारियों का दबाव—“काम कितना हुआ? जल्दी करो, नहीं करोगे तो कार्रवाई होगी”—इन सबने उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ दिया। बबली का आरोप है कि पति को धमकी दी जा रही थी कि अगर काम पूरा नहीं हुआ तो नौकरी जा सकती है, या जेल भी भेजा जा सकता है। इन परिस्थितियों ने सर्वेश के मन में ऐसा डर पैदा कर दिया कि उन्होंने घर में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है, जिसकी जांच जारी है। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ कागज़ नहीं, एक ऐसी चीख है जिसे प्रशासन को सुनना होगा।
तमिलनाडु में सड़क बनी काल, एक साथ 11 को डसा, 40 गंभीर, बढ़ सकती है संख्या…
चार छोटी बेटियों की माँ बबली अब पूरी तरह अकेली खड़ी है। घर में एक बुजुर्ग सास हैं, और कमाने वाला कोई नहीं बचा। उनके पास सवालों का पहाड़ है—बेटियों की पढ़ाई, उनके भविष्य का इंतजाम, घर का खर्च… वह रोते हुए कहती हैं, “मेरी बेटियां अभी नाबालिग हैं। मैं अकेली सब कैसे संभालूं? मेरे पति ही घर का सहारा थे।” इसी दर्द के बीच परिवार ने मृतक के अंतिम संस्कार को रोक दिया है। बबली ने दो बड़ी मांगें रखी हैं—5 करोड़ रुपये का मुआवजा और पति की जगह सरकारी नौकरी। उनका कहना है कि ये दोनों मांगे पूरी हुए बिना उनका परिवार आगे नहीं बढ़ पाएगा।
डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अनुज सिंह ने बताया कि सर्वेश का रिकॉर्ड अच्छा था और उन्होंने 75% से अधिक काम पूरा कर लिया था। उनके अनुसार, कारणों की वास्तविक जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
