पाकिस्तान में इमरान खान को लेकर सियासी संकट गहराया

Imran Khan NayaLook

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई संस्थापक इमरान खान को लेकर राजनीतिक तूफान तेज हो गया है। जेल में बंद इमरान को उनकी बहनों और पार्टी नेताओं से मिलने नहीं दिया जा रहा, जबकि कोर्ट के आदेश भी अनदेखे किए जा रहे हैं। परिवार का आरोप है कि इमरान को जानबूझकर आइसोलेशन में रखा जा रहा है और उनकी हत्या तक का खतरा है। विपक्षी गठबंधन ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर रवैया नहीं बदला गया तो पूरे देश में बड़े प्रदर्शन होंगे।

विपक्ष ने सवाल उठाया कि इमरान को जेल में क्यों रखा गया है और उन्हें परिवार व नेताओं से मिलने क्यों रोका जा रहा है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर अदियाला जेल के बाहर धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी मुलाकात की अर्जी पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। पख्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी के प्रमुख महमूद खान अचकजई ने संसद भवन के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमने सिंधी, बलोच, पश्तून और पंजाबी समुदाय को सड़कों पर उतरने से रोका है, वरना शासक मुश्किल में पड़ जाते।” उन्होंने सरकार पर संसद को रबर स्टैंप बनाने और स्पीकर अयाज सादिक पर बाहरी दबाव में काम करने का आरोप लगाया। पीटीआई नेता असद कैसर ने हाल के उपचुनावों में धांधली का दावा किया। हरिपुर में उमर अयूब की पत्नी की हार को फॉर्म-47 में हेरफेर बताया। बैरिस्टर गौहर ने कहा कि उपचुनावों की धांधली ने संसद में रहना असंभव बना दिया है और इमरान अब संसदीय राजनीति से बाहर रहने का फैसला कर सकते हैं।

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इमरान की बहन नूरीन नियाजीnayalook ने एनडीटीवी से कहा, “ये पहली बार नहीं, पिछले साल भी तीन हफ्ते तक उन्हें अलग-थलग रखा गया। सरकार चाहती है कि इमरान माफी मांगें, लेकिन उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया।” उन्होंने जेल प्रशासन पर कोर्ट आदेश न मानने का आरोप लगाया और कहा कि अब जनता के साथ सड़क पर उतरने के सिवा कोई रास्ता नहीं। उनकी दूसरी बहन अलीमा खान ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में जेल अधीक्षक के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें सप्ताह में दो मुलाकातों का आदेश है। प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने शर्तों के साथ मुलाकात का समर्थन किया, लेकिन कहा कि मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस या राजनीतिक चर्चा नहीं हो सकती। जेल अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इमरान का स्वास्थ्य ठीक है और उन्हें कहीं ट्रांसफर नहीं किया गया।

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विपक्ष का कहना है कि सरकार लोकतंत्र को कुचल रही है और इमरान को राजनीतिक रूप से खत्म करना चाहती है। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो देशव्यापी आंदोलन तय है। सियासी गलियारे में तनाव चरम पर है और आने वाले दिन पाकिस्तान की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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