कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की सुरक्षा-व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश

  • अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी शर्मा ने KGBV की सुरक्षा एवं संरक्षा को लेकर दिए कड़े निर्देश
  • विद्यालयों में सुरक्षा-व्यवस्था की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए
  • महिला अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण अनिवार्य किया जाए

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (KGBV) की सुरक्षा एवं संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश के 746 शैक्षिक रूप से पिछड़े विकासखण्डों में संचालित इन पूर्णत: आवासीय विद्यालयों में 11 से 18 वर्ष तक की किशोरियों को कक्षा छह से 12 तक शिक्षा प्रदान की जाती है। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने के लिए शासन ने विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करने के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों एवं जिला शिक्षा परियोजना समिति के अध्यक्षों को निर्देशित किया है कि विद्यालयों में सुरक्षा-व्यवस्था की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए। वहीं बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा है कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि हर बालिका सुरक्षित वातावरण में पढ़े और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े।

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निरीक्षण और सुरक्षा को लेकर दिए गए निर्देश

हर KGBV का त्रैमासिक सघन औचक निरीक्षण: निर्देशों में कहा गया है कि जिलाधिकारी तीन सदस्यीय दल गठित करेंगे, जिसमें एक मजिस्ट्रेट और एक महिला अधिकारी अनिवार्य होगा। वहीं, निरीक्षण रिपोर्ट और एक्शन टेकन रिपोर्ट जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद राज्य कार्यालय भेजी जाएगी।

लॉक्ड ड्रॉपबॉक्स अनिवार्य: निर्देश दिया गया है कि छात्राओं की गोपनीय शिकायतें दर्ज की जाएं एवं गंभीर मामलों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

स्टाफ के आचरण पर छात्राओं से फीडबैक: आपत्तिजनक तथ्य मिलने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सीसीटीवी कैमरों की सतत निगरानी: कक्षाओं, मुख्य गेट, कार्यालय, डाइनिंग हॉल एवं किचन में लगे कैमरों की फुटेज निरीक्षण के दौरान देखी जाए। कैमरों का एक्सेस जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पास रहे।

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मानसिक स्वास्थ्य सहायता: असामान्य व्यवहार या तनाव की स्थिति में किशोरियों को स्वास्थ्य केन्द्रों में परामर्श उपलब्ध कराया जाए।

स्वास्थ्य परीक्षण और प्राथमिक उपचार किट: हर माह स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य, स्वास्थ्य कार्ड में बीमारी/एलर्जी/दिव्यांगता का उल्लेख। प्राथमिक चिकित्सा किट में एक्सपायरी दवाइयां बिल्कुल न हों।

छात्राओं की समस्याओं पर करें चर्चा

इसके अलावा, शासन ने निर्देश दिया है कि गणमान्य महिलाओं और आकांक्षा समिति की सदस्याओं को विजिटर के रूप में नामित किया जाए, जो हर 15 दिन में विद्यालयों का निरीक्षण कर छात्राओं की समस्याओं पर चर्चा करें और समाधान सुनिश्चित कराएं। सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का संचालन और अधिक प्रभावी एवं सुरक्षित होगा, ताकि प्रदेश की हर बेटी निडर होकर अपनी शिक्षा और सपनों को आगे बढ़ा सके।

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