इंदिरा के आदिवासी प्रेम ने ही बदली अबूझमाड़ की तस्वीर

Untitled 3 copy 27
  • अबूझमाड़ के लिए तैयार करवाया था 5 करोड़ का प्रोजेक्ट
  • बस्तर के हजारों एकड़ में खड़े साल वनों को कटने से बचाया

हेमंत कश्यप

जगदलपुर । 53 साल पहले  इंदिरा गांधी बस्तर आई थी और उन्होंने अबूझमाड़ क्षेत्र के आदिवासियों से मुलाकात कर उनकी बदहाली से रूबरू हुई थीं। वे अबूझमाड़ के आदिवासियों के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे इसलिए उन्होंने रामकृष्ण आश्रम के संचालक स्वामी आत्मानंद को बुलाया और अबूझमाड़ क्षेत्र के लोगों के लिए विकास का नया रास्ता तैयार किया। बस्तरवासी इंदिरा गांधी के ऋणी इसलिए भी हैं चूंकि  गांधी ने ही बस्तर में खड़े साल के हजारों वृक्षों को काट कर पाइन रोपने की योजना को रुकवाई थीं। बस्तर के बड़े बुजुर्ग आज भी इंदिरा गांधी को दिल से चाहते हैं। किसी नेता की फोटो उनके घर हो या न हो लेकिन इंदिरा गांधी की फोटो जरूर नजर आती है।

ये भी पढ़े

हिंदू प्रेमिका से मिलने गए मुस्लिम युवक की बेरहमी से हत्या… लड़की का पिता- भाई गिरफ्तार

अबूझमाड़ बस्तर का वह इलाका है। जिसका आजादी के 78 साल बाद भी सर्वे नहीं हो पाया है। पेदा पद्धति से किसानी करने के कारण कभी माड़ के लोग एक जगह नहीं रहे। 53 साल पहले भी अबूझमाड़ क्षेत्र गरीबी और शोषण का शिकार था। शिक्षा का दूर – दूर तक कोई निशान नहीं था। वर्ष 1972 में जब श्रीमती इंदिरा गांधी बस्तर आई थी तो अबूझमाड़ के लोगों से मिल उनके दुख-दर्द को समझने का प्रयास किया था। इस इस बीच विश्व की एक मीडिया कंपनी ने अबूझमाड़ के घोटुल की कुछ ऐसी आपत्तिजनक तस्वीरें प्रसारित कर दी जिसके कारण अबूझमाड़ क्षेत्र में बाहरी लोगों का प्रवृत्त पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया। इस तरह अबूझमाड़ के लोग एक तरह से नजरबंद हो गए थे।

ये भी पढ़े

ये इश्क नहीं आसांः बहू के प्यार में पागल बाप बना जल्लाद, फावड़े से बेटे को काट डाला

अबूझमाड़ की परिस्थितियों से वाकिफ गांधी ने रायपुर में विवेकानंद आश्रम की स्थापना करने वाले स्वामी आत्मानंद को बुलवाया। माना हवाई अड्डा में इस मुलाकात के लिए 15 मिनट का समय निर्धारित किया गया था, किंतु जब स्वामीजी ने अबूझमाड़ की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और आदिवासियों के मतांतरण से  गांधी को वाकिफ करते हुए 50 लाख रुपए का प्रोजेक्ट रखा। गांधी ने 50 लाख के प्रोजेक्ट को निरस्त करते हुए स्वामी आत्मानंद को 5 करोड़ का प्रोजेक्ट दोबारा बनाकर देने का आग्रह किया। बताते चलें कि  गांधी और स्वामी आत्मानंद की 15 मिनट की यह मुलाकात पूरे 45 मिनट तक चली। इस तरह गांधी के प्रयासों से अबूझमाड़ के लोगों के लिए नया रास्ता खुला। अबूझमाड़ क्षेत्र में बच्चों को पढ़ाने, राशन दुकान संचालित करने, आंगनवाड़ी में बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ अबूझमाड़ के लोगों के लिए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का जिम्मा रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर ने उठाया। आज अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चे कई ऊंचे पदों पर आसीन हैं। इधर भारत सरकार ने भी रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायण की गतिविधियों से प्रभावित होकर तीन बार प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। अबूझमाड़ क्षेत्र के आदिवासी अब पेदा पद्धति से खेती छोड़कर स्थाई रूप से बसने लगे हैं इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार माड़ क्षेत्र में सर्वे शुरू कर चुकी है। बाकायदा किसानों से धान खरीदी की जा रही है।

इंदिरा ने बचाया बस्तर का साल वन

वर्ष 1977 के दौर में वन विकास निगम द्वारा बस्तर के 20 हजार एकड़ में खड़े साल वृक्षों को जड़ सहित उखाड़ कर कैरेबियन पॉइंट लगाने की योजना शुरू की थी। जिसका बस्तरवासियों ने विरोध किया और  इंदिरा गांधी को इस कृत्य से अवगत कराया था। यहां के लोगों की मांग को जायज ठहराते हुए  गांधी ने कहा था कि परंपरागत प्राकृतिक वनों को काटकर कृत्रिम रोपण कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस तरह बस्तर लाखों साल के वृक्ष कटने से बच गए। उस दौर में साल पेड़ों को काटकर रोपे गए पाइन के वृक्ष अभी भी यहां के लामनी और कुरंदी क्षेत्र में नजर आते हैं।

Spread the love

Parliament
Analysis homeslider Politics

संसद में हंगामा ही सिर्फ मकसद नहीं होना चाहिए

Parliament लोकसभा और राज्यसभा का मानसून सत्र लगभग हंगामे की भेंट चढ़ गया है। जहां देश को आगे बढ़ाने के लिये चर्चा होना चाहिए, वहां दो सियासी घरानों के पुत्रों का अहंकार उसे ले डूबा, जबकि लोकतंत्र की बुनियाद इस बात पर टिकी है कि सदन में चर्चा, बहस और असहमति के माध्यम से देश […]

Spread the love
Read More
Cow urine
Analysis homeslider

गोमूत्र से कमाई मॉडल या चुनावी चमक

Cow urine उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर से गोमूत्र खरीद का जो पायलट मॉडल सामने आया है, उसे केवल गाय, गांव और संस्कृति की कहानी मानना आसान है, लेकिन असली सवाल इससे कहीं बड़ा है। सवाल यह है कि क्या सरकार गोमूत्र को सचमुच ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया उत्पाद बनाना चाहती है, या फिर ऐसी घोषणा […]

Spread the love
Read More
Politics
Analysis homeslider Politics

जातीय नारों की मंडी में 2027 का उत्तर प्रदेश किसका हिसाब करेगा

Politics उत्तर प्रदेश में चुनाव अभी आया नहीं है, लेकिन राजनीति ने मतदाताओं की जातियां गिननी शुरू कर दी हैं। नेताओं के पास बेरोजगारी का आंकड़ा हो या न हो, महंगाई का हिसाब हो या न हो, स्कूलों और अस्पतालों की हालत पर जवाब हो या न हो, लेकिन किस जाति की कितनी आबादी है, […]

Spread the love
Read More