आज रविवार के दिन उत्तराखंड राज्य अपनी जवानी के 25 वें बरस पर पहुंच गया है। इस मौके पर ये बातें बेमानी लगती हैं इतने लंबे सफर के दौरान हमने क्या खोया… और क्या पाया….? अब ये तो कहना ही पड़ेगा कि 25 बरस के इस लंबे सफर के दौरान पूरी एक पीढ़ी जवान हो चुकी है पर बिडम्बना ही है कि उत्तराखंड के दोनों हाथ अब तक खाली ही हैं…..क्या खोया..क्या पाया…?ये अलग बात है कि इसके गुनहगार सब हैं चाहे वो सरकार कांग्रेस की रही हो या भारतीय जनता पार्टी की…राज्य बना तो लगा कि पलायन थम जाएगा..पर पलायन की दुखद तस्वीरें बताती हैं कि सैकड़ों गांव ‘भूत गांव’ में तब्दील हो चुके हैं यानि पूरे के पूरे गांव खाली हैं। रोजगार तो जैसे यहां दूर की कौड़ी है…. पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी दोनों ही बह रही हैं…. ‘ पालकी’ आज भी एम्बुलेंस से बेहतर मानी जाती है….इलाज के लिए दिल्ली शहर के अलावा कोई मुक्कमल इंतजाम नहीं हैं.. सरकार इसे नहीं मानती .. वो कहती है AIIMS बना दिया है पर राज्य के आम आदमी से पूछे कि क्या AIIMS उनकी कसौटी पर खरा उतर रहा है… अतर(गांजा) यहां का घरेलु खेती बन चुकी है पर दुर्भाग्य है कि ये खेती पूरी नस्ल को ही तबाह कर रही है… ज्यादा नहीं लिखूंगा पर कुछ तस्वीर हैं जो बताती है कि हालात ‘बेहतर’ नहीं ‘बदतर’ हैं… Associate Editor अनिल उपाध्याय की छोटी सी Report और कैमरे की नजर… कुछ विकास की कुछ अलग कहानी तो बता ही रही है….

राज्य निर्माण का जज्बा…..





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