सिल्वर स्क्रीन की प्रसिद्ध नायिका और गायिका सुलक्षणा पंडित नहीं रहीं

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  • रायगढ़ की बेटी को छत्तीसगढ़ सरकार ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रंजन कुमार सिंह

भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री, मधुर स्वर साधिका छत्तीसगढ़ की बेटी सुलक्षणा पंडित छह नवंबर को दुनिया छोड़ गईं। संगीत और अभिनय की उनकी यात्रा की जड़ें छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की उस सांस्कृतिक मिट्टी से जुड़ी थीं, जहाँ संगीत एक परंपरा नहीं एक जीवनधारा है। रायगढ़ की पुरानी बस्ती के रामगुड़ी पारा स्थित अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय में जन्मी सुलक्षणा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायगढ़ के पैलेस रोड स्थित शासकीय बालिका विद्यालय में प्राप्त की थी। उनके पिता प्रताप नारायण पंडित राजा चक्रधर सिंह के दरबार के प्रसिद्ध तबला वादक थे। उनके परिवार के लिए संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार था और सुलक्षणा ने उसी संस्कार को सुरों में ढालकर पूरी दुनिया तक पहुँचाया और छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया।उनकी आवाज़ में सादगी थी, भाव था, और इस मिट्टी की सुगंध थी। सुलक्षणा पंडित (12 जुलाई 1954 – 6 नवंबर 2025) एक भारतीय पार्श्व गायिका और अभिनेत्री थीं, जो 1970 और 1980 के दशक में सक्रिय थीं। उनका जन्म एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार में हुआ था, जिसमें उनके चाचा महान शास्त्रीय गायक पंडित जसराज थे। उन्होंने 9 साल की उम्र में गायन शुरू किया और 1975 में फिल्म ‘उलझन’ से अभिनय की शुरुआत की, जबकि ‘संकल्प’ फिल्म के गाने ‘तू ही सागर है तू ही किनारा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। 71 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

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जन्म और प्रारंभिक जीवन

सुलक्षणा पंडित का जन्म 12 जुलाई 1954 को रायगढ़, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उनका परिवार हरियाणा के हिसार जिले के पीलीमंदोरी गांव से ताल्लुक रखता था।

संगीत और अभिनय करियर

उन्होंने 9 साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था और 1967 में प्लेबैक सिंगर के रूप में अपना करियर शुरू किया। अभिनय में उनकी शुरुआत 1975 में फिल्म ‘उलझन’ से हुई, जिसमें संजीव कुमार ने उनके साथ अभिनय किया था। उन्होंने ‘हेराफेरी’, ‘अपनापन’, ‘खानदान’ और ‘वक्त की दीवार’ जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों के लिए पार्श्व गायन किया।

व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य

सुलक्षणा पंडित ने कभी शादी नहीं की। उन्होंने अभिनेता संजीव कुमार से प्यार किया, लेकिन उन्होंने उन्हें ठुकरा दिया था, जिसके कारण वह बहुत टूट गई थीं और लंबे समय तक अवसाद में रहीं। संजीव कुमार के निधन के बाद, उन्होंने अपना मानसिक संतुलन भी खो दिया था। बाद में, उन्होंने बहुत एकांत जीवन जिया और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आईं। उनके भाई संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित हैं। उनकी बहन विजेता पंडित हैं। सुलक्षणा हरियाणा राज्य के हिसार (अब फतेहाबाद) जिले के पीलीमंदोरी गांव के एक संगीत घराने से आती हैं। प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और महान पंडित जसराज उनके चाचा थे। राजगढ़ के पूर्व सांसद और जनसंघ नेता वसंत कुमार पंडित उनके चाचा भी थे। उन्होंने नौ साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था। उनके बड़े भाई मंधीर पंडित (जो पहले 1980 के दशक में जतिन पंडित के साथ मंधीर-जतिन की जोड़ी के साथ संगीतकार थे) मुंबई में उनके लगातार साथी थे; उन्होंने मंच पर तब तक प्रदर्शन किया और गाया जब तक सुलक्षणा किशोर कुमार और मोहम्मद रफ़ी जैसे दिग्गजों के साथ अपने कई लाइव संगीत कार्यक्रमों के माध्यम से एक प्रमुख पार्श्व गायिका नहीं बन गईं। उनके तीन भाई (मनधीर, जतिन और ललित पंडित) और तीन बहनें (स्वर्गीय माया एंडरसन, स्वर्गीय संध्या सिंह और विजयता पंडित) हैं। उनके पिता प्रताप नारायण पंडित एक कुशल शास्त्रीय गायक थे। उनके भतीजे यश पंडित एक भारतीय टेलीविजन अभिनेता हैं। भतीजी श्रद्धा पंडित और श्वेता पंडित पार्श्व गायिका हैं। उनकी चचेरी बहन पार्श्व गायिका हेमलता हैं।

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अभिनेता संजीव कुमार द्वारा सुलक्षणा के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद उन्होंने कभी शादी नहीं की। काम मिलना बंद हो जाने के बाद उन्हें मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा। उनकी बहन विजयता पंडित और बहनोई संगीतकार आदेश श्रीवास्तव ने उनके लिए एक भक्ति एल्बम बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन ऐसा करने से पहले ही आदेश की मृत्यु हो गई। बाथरूम में गिरने से उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई। जिसके कारण वह विकलांग हो गई थीं सुलक्षणा अपनी चार सर्जरी के बाद बहुत कम सार्वजनिक रूप से दिखाई देती हैं, । उन्होंने जुलाई 2017 में आरजे विजय अकेला को एक पूर्ण रेडियो साक्षात्कार दिया था, जिसमें उन्होंने अपने अभिनय और गायन करियर के बारे में बात की थीं। सुलक्षणा पंडित ने 6 नवंबर 2025 को उसी तारीख को स्थायी तौर पर दुनिया को अलविदा कहा, जिस दिन संजीव कुमार गए थे।

वो जो कभी पर्दे पर मुस्कान बिखेरती थी, अब खामोशी ओढ़कर चली गई। गुरुवार, 6 नवंबर 2025 की रात संगीत वह 71 साल की थीं। कभी अपने सुरों से पर्दे पर जादू रचने वाली सुलक्षणा, अपने आखिरी वक्त में गुमनामी की दुनिया में थीं। वही इंडस्ट्री जिसने उन्हें सिर आंखों पर बिठाया था, आखिर में पूछने वाला भी कोई न रहा। सुलक्षणा पंडित का जन्म 12 जुलाई 1954 को रायगढ़ में हुआ था। घर संगीत से भरा था। पिता प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक प्रभाकर पंडित और चाचा पंडित जसराज। यानी संगीत उनके DNA में था। नौ साल की उम्र में मंच पर पहली बार गाया, और फिर ज़िंदगी उसी सुर में बहती चली गई। उनकी आवाज़ में मिठास थी, ग़म था और अजीब सी गहराई। फिल्म ‘संकल्प’ का गाना “तू ही सागर तू ही किनारा” आज भी रेडियो पर बजे तो आंखें नम हो जाती हैं। उसी दौर में उन्होंने ‘परदेसिया ये सच है पिया’ और ‘बेमिसाल’ जैसे गाने दिए, जो आज भी पुराने संगीत के चाहने वालों के दिल में जिंदा हैं। गायकी के बाद उन्होंने अभिनय में भी हाथ आजमाया। 1975 में फिल्म ‘उलझन’ आई, जिसमें उनके साथ थे संजीव कुमार। और बस, सुलक्षणा का चेहरा रातों-रात पहचान बन गया।

फिल्म उलझन में मिला ब्रेक

‘अपनापन’, ‘फरीबी’, ‘वक़्त की दीवार’, ‘कुली’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी पहचान मजबूत की। नाजुक चेहरा, नरम आवाज़ और मासूम आंखें -यही उनकी पहचान बन गई। सुलक्षणा की जिंदगी का सबसे बड़ा किस्सा, उनका प्यार था। कहा जाता है कि वो संजीव कुमार से बेपनाह मोहब्बत करती थीं। फिल्म ‘उलझन’ के सेट से शुरू हुआ वो रिश्ता, धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बन गया। उन्होंने शादी का प्रस्ताव भी दिया। मगर संजीव कुमार ने इंकार कर दिया। शायद इसलिए कि उनका दिल पहले ही हेमा मालिनी के नाम पर हार चुका था। सुलक्षणा ने फिर कभी शादी नहीं की। उन्होंने कहा था, जिसे चाहा वही नहीं मिला, अब किसी और को क्या चाहना।

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वो बस वही अधूरा प्यार लेकर ज़िंदगी गुजारती रहीं। संजीव कुमार की मौत 6 नवंबर 1985 को हुई थी। और अजीब इत्तेफाक ये कि सुलक्षणा का निधन भी ठीक उसी तारीख को, 6 नवंबर, 2025 को हुआ। जैसे किसी अधूरी मोहब्बत ने आखिर 40 साल बाद उन्हें अपने पास बुला कर आगोश में ले लिया हो। एक वक्त था जब सुलक्षणा के सुर हर संगीत कार्यक्रम में गूंजते थे। मगर वक्त के साथ बॉलीवुड बदल गया। नए चेहरे, नए गायक आए। धीरे-धीरे वो फिल्मों से दूर होती गईं। प्यार का खालीपन, करियर का टूटना और परिवार की ज़िम्मेदारियां, इन सबने उन्हें तोड़ दिया। कहा जाता है कि आखिरी कुछ सालों में वे बीमार रहीं, चलने-फिरने में तकलीफ थी, और ज़्यादातर वक्त घर में अकेले बिताती थीं। सुलक्षणना पंडित भले अब इस दुनिया में नहीं हैं, मगर उनका सुर, उनका दर्द और उनका प्यार- सब जिंदा है। जब भी कोई “तू ही सागर तू ही किनारा” गुनगुनाता है, तो सुलक्षणा की वही आंखें याद आती हैं। जिनमें अधूरी मोहब्बत की नमी थी, और सुरों की मिठास भी।

गायिका के रूप में उनकी फिल्में…

वो गई हैं, लेकिन गूंज अब भी बाकी है.. गौर से सुनिए।
1971 दूर का राही “बेकरार-ए-दिल तू गाए जा”
1975 चलते चलते “सपनों का रजा कोई”
उलझन “आज प्यारे प्यारे से लगते”
संकल्प “तू ही सागर है तू ही किनारा”
1976 संकोच “बांधी रे काहे प्रीत”
1977 अपनापन “सोमवार को हम मिले”
1979 खानदान “ये मुलाक़ात एक बहाना है”
गृह प्रवेश “बोलिए सुरीली बोलियाँ”
1980 थोडीसी बेवफाई “मौसम मौसम लवली मौसम”
स्पर्श “खाली प्याला छलका”
1981 आहिस्ता आहिस्ता “माना तेरी नज़र”
साजन की सहेली “जिसके लिए सबको छोड़ा”
अभिनेत्री के रूप में उनकी फिल्में:
1981 चेहरे पे चेहरा डयाना
1979 खानदान ऊषा
1975 सलाखें गुड्डी/सीमा

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