- करीब 20-25 लोगों के मरने की उम्मीद, कई घायल
- मंदिर प्रबंध की नाइंतजामी से हुआ हादसा
नया लुक ब्यूरो
अमरावती। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के कासिबुग्गा स्थित वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में शनिवार सुबह देवउत्थान-एकादशी पर उस समय चीख-पुकार और भगदड़ मच जब श्रद्धालु बदहवास होकर भाग रहे थे और भीड़ एक-दूसरे को कुचल रही थी। इस भगदड़ में मरने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का आधिकारिक आंकड़ा तो सामने नहीं आया है पर हादसे के बाद की तस्वीरें बता रही हैं कि मृतकों की यह संख्या 20-25 से भी ज्यादा है। वीडियो फुटेज देखकर लगता है कि यह घटना मंदिर के संकरे सीढ़ीनुमा रास्ते पर भीड़ के दबाव में हुई थी। उस वक्त वहां हजारों भक्त पूजा-अर्चना के लिए एकत्र हुए थे कि अचानक भगदड़ मच गयी। श्रद्धालुओं की भीड़ एक-दूसरे को कुचले जा रही थी। वीडियो फुटेज में कई महिलाओं और बुजुर्गों को फूलों की टोकरी हाथ में थामे चीखते-चिल्लाते देखा जा सकता है। यह सब भीड़ में कुचल दिए गए।
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डिले पलासा मंडल के कासिबुग्गा में देवउत्थान एकादशी व्रत के उपलक्ष्य में भक्तों की भारी भीड़ मंदिर पहुंची। मंदिर प्रबंधन ने हर साल की तरह इस वर्ष भी विशेष पूजा का आयोजिन किया था। इसी दौरान संकरी सीढ़ियों पर अफरा-तफरी मच गई। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह मंदिर निजी प्रबंधन के अधीन है और एंडोमेंट्स विभाग के तहत नहीं आता है। प्रशासन के मुताबिक आयोजकों ने सभा के लिए कोई अनुमति नहीं ली थी और जहां अनुमान से ज्यादा भक्त इकट्ठा हो गए थे। इतना ही नहीं जहां हादसा हुआ वह क्षेत्र अभी निर्माणाधीन था और मंदिर प्रशासन ने भीड़ के मद्देनजरबचाव के इंतजाम भी नहीं किए थे। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने कहा कि कासिबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़ से श्रद्धालुओं की मौत बेहद दर्दनाक है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मैंने अधिकारियों को घायलों को उचित इलाज सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
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नायडू ने जिला प्रशासन और स्थानीय नेताओं को राहत कार्यों की निगरानी करने के लिए रवाना कर दिया है। उन्होंने लिखा कि कासिबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़ से कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जो बेहद चौंकाने वाली है। एकादशी के दिन यह बड़ी त्रासदी है। मृतकों के परिवारों को मेरी गहरी शोक संवेदना। मंदिर 12 एकड़ में फैला है और दूर-दराज से भक्त आते हैं, लेकिन भीड़ प्रबंधन की कमी ने हादसे को आमंत्रित किया। यह घटना आंध्र प्रदेश में इस साल तीसरी ऐसी दुर्घटना है। इससे पहले जनवरी में तिरुपति में छह लोगों की मौत हुई थी, जबकि अप्रैल में विशाखापत्तनम के सिम्हाचलम मंदिर में दीवार ढहने से सात लोगों की जान गई।
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