उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद SC व ST अत्याचार का खुलासा

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ए अहमद सौदागर

लखनऊ। यूपी के प्रयागराज जिले में उच्च न्यायालय में 2022 में एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ, जो SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और बलात्कार जैसे गंभीर धाराओं का दुरुपयोग करके निर्दोष लोगों को फंसाने और धन उगाही का कुकृत्य कर रहा था। यह मामला उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से सामने आया है, जहां अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को 51 संदिग्ध मामलों की प्रारंभिक जांच का आदेश दिया। यह गिरोह मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा संचालित था, जो वकीलों के इशारे पर काम करता था। इन महिलाओं को ‘हनीट्रैप’ का उपयोग कर पुरुषों को फंसाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, उसके बाद फर्जी FIR कराई जातीं। गिरोह का मुख्य लक्ष्य वकील और अन्य प्रभावशाली व्यक्ति थे, जो आरोपी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे होते थे। यदि आरोपी पैसे नहीं देते, तो उनके वकीलों को भी धमकी दी जाती कि वे एससी/एसटी एक्ट के तहत फंसाए जाएंगे।

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सनद रहे कि जुलाई 2022 में हुई, जब प्रयागराज के एक वकील ने एक बलात्कार के आरोप में फंसे आरोपी (जो खुद एक वकील था) की ओर से धारा 482 सीआरपीसी के तहत याचिका दायर की। याचिका में त्वरित सुनवाई की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत को बताया कि यह एक सुनियोजित साजिश है। उन्होंने दावा किया कि प्रयागराज में एक गिरोह सक्रिय है, जिसमें कई महिलाएं और वकील शामिल हैं। यह गिरोह निर्दोष लोगों को जाल में फंसाता है, फर्जी शिकायत दर्ज कराता है, और चार्जशीट दाखिल होने के बाद सरकारी मुआवजा या निजी उगाही के जरिए लाभ कमाता है। वकील ने 51 मामलों की सूची प्रस्तुत की, जिनमें से 36 मामला मऊऐमा थाने में, जबकि शेष दारागंज, किदगंज, शिवकुटी, बहरिया, कर्नलगंज, फाफामऊ और दारागंज थानों में दर्ज थे। इनमें ज्यादातर SC/ST  एक्ट की धारा 3(2)(v) के साथ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 506 (आपराधिक धमकी) आदि शामिल थीं।

न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की पीठ ने 18 अगस्त 2022 को यह मामला सुना। अदालत ने इसे ‘गंभीर मामला’ करार दिया, क्योंकि यह न केवल निर्दोषों को प्रताड़ित कर रहा था, बल्कि न्याय व्यवस्था को भी कमजोर कर रहा था। अदालत ने कहा कि वकीलों को आरोपी का बचाव करने के कारण फर्जी आरोपों का शिकार बनाया जा रहा है, जो न्याय के हित में अस्वीकार्य है। इसलिए, सीबीआई को दो माह के भीतर प्रारंभिक जांच करने और सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, इन मामलों में आरोपी या शिकायतकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई, जब तक CBI की रिपोर्ट न आ जाए। अगली सुनवाई 20 अक्टूबर 2022 तय की गई। अदालत ने CBI  के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश को भी निर्देश दिए हैं।

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