शाश्वत तिवारी
न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि वह परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए प्रतिबद्ध है, जो सार्वभौमिक, भेदभाव रहित और सत्यापन योग्य होना चाहिए। यह लक्ष्य एक सार्वभौमिक प्रतिबद्धता और एक सर्वमान्य बहुपक्षीय समझौते द्वारा समर्थित, चरणबद्ध प्रक्रिया द्वारा समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सकता है, जो वैश्विक और भेदभाव रहित प्रकृति का हो।
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भारतीय राजदूत अनुपम रे ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में परमाणु हथियारों पर आयोजित विषयगत बहस में भारत का वक्तव्य देते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा एक जिम्मेदार परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में, भारत की नीति एक विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोध बनाए रखने की है, जिसमें गैर-परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्रों के विरुद्ध परमाणु हथियारों का पहले प्रयोग न करने की नीति शामिल है। भारत इन प्रतिबद्धताओं को बहुपक्षीय कानूनी व्यवस्थाओं में बदलने के लिए तैयार है। भारत परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक, एकतरफा रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने इस घोषणापत्र को विधिसम्मत औपचारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा भी व्यक्त की है।
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एक आधिकारिक बयान के अनुसार भारतीय राजनयिक ने कहा भारत स्वीकार करता है कि परमाणु कमान और नियंत्रण (एनसी3) में एआई का उपयोग प्रश्न उठाता है। भारत का मानना है कि परमाणु हथियारों के उपयोग का निर्णय मानव द्वारा लिया जाए। भारत वैश्विक परमाणु अप्रसार उद्देश्यों को बनाए रखने और उन्हें सुदृढ़ करने का पुरजोर समर्थन करता है। हम इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं।
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भारत ने समूह में दो प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि वह परमाणु खतरे को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है और 1998 से हमने इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पेश किया है, जो परमाणु हथियारों के अचानक होने वाले खतरे की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है तथा परमाणु हथियारों के अनजाने या आकस्मिक उपयोग के जोखिम को कम करने के लिए कदम उठाने का आह्वान करता है। भारत ने अनुरोध किया कि किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियारों के प्रयोग या प्रयोग की धमकी पर रोक लगाने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (कन्वेंशन) पर बातचीत शुरू हो। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवादियों और नॉन-स्टेट एक्टर्स को परमाणु हथियारों, सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्राप्त करने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
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