दो टूक : सात दिन में दो सुसाईड, एक IPS एक ASI जाति, सियासत या भ्रष्टाचार

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राजेश श्रीवास्तव

हरियाणा में ADGP लेवल के अधिकारी की खुदकुशी के ठीक 7 दिन बाद एक एएसआई की खुदकुशी का मामला सामने आया है। पिछले सात दिनों में हरियाणा पुलिस विभाग न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना गया है। अब इस चर्चा में एक और नया मोड़ आ गया है। IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की खुदकुशी के बाद अब तक पुलिस विभाग के अधिकारियों पर उठ रहे थे लेकिन एएसआई संदीप की खुदकुशी ने मृतक वाई पूरन कुमार को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर IPS वाई पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में जातिगत प्रताड़ना का हवाला दिया है, वहीं एएसआई संदीप कुमार ने खुदकुशी से पहले उन पर जातिवाद फैलाने का आरोप लगाया है। आखिर समझना पड़ेगा कि इस पूरे मामले के पीछे की कहानी क्या है क्योंकि ये दोनों सुसाइड किसी आम इंसान की नहीं है बल्कि सिस्टम की कलई खोल रही हैं कि कैसे एक आईपीएस अधिकारी उत्पीड़न की कहानी बताकर सुसाइड कर लेता है और उसके प्रति सहानुभूति की लहर पैदा हो उसके पहले ही एक ASI उन्हीं पर आरोप लगाकर सुसाइड कर लिया।

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7 अक्टूबर 2025 को चंडीगढ़ पुलिस को कॉल आई जिसमें उन्हें पता चला कि IPS  वाई पूरन कुमार ने अपने बंगले पर खुद को गोली मार ली है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और उनके शव को बरामद किया। आईपीएस वाई पूरन कुमार की पत्नी आईएएस अधिकारी हैं और जब उन्होंने खुदकुशी की वह हरियाणा सीएम के साथ डेलिगेशन में जापान गईं थीं। जब वह वापस लौंटी तो उन्होंने अपने पति की मौत पर शोक जताया। वाई पूरन कुमार के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला था जिसमें उन्होंने हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर समेत अन्य 12 पुलिस अधिकारियों के नाम लिखे हैं। वाई पूरन कुमार ने सुसाइड नोट में लिखा था कि उन्हें जातिगत प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उन्होंने लिखा कि अब उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है इसलिए वह ये कदम उठा रहे हैं। एडीजीपी वाई पूरन कुमार की खुदकुशी के बाद उनके परिवार ने सुसाइड नोट में जिन अधिकारियों के नाम शामिल हैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की और सख्त एक्शन की डिमांड की। परिवार ने आरोप लगाया कि वाई पूरन ने पुलिस महकमे में दूसरे अधिकारियों से लगातार प्रताड़ना की वजह से खुदकुशी की है। परिवार ने जांच की मांग की। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। वाई पूरन कुमार की खुदकुशी का मामला फिलहाल पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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जहां दलितों पर अत्याचार से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी तरफ हरियाणा के रोहतक के साइबर सेल में तैनात एएसआई संदीप कुमार की खुदकुशी और सुसाइड नोट के सामने आने के बाद यह कहानी पूरी तरह पलटती हुई दिख रही है। एएसआई ने खुदकुशी से पहले एक चार पन्नों का सुसाइड नोट लिखा है साथ ही उन्होंने करीब 6 मिनट की एक वीडियो भी बनाई है। इस वीडियो में उन्होंने आईपीएस वाई पूरन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपनी वीडियो में इस बात का जिक्र किया है कि पूरन कुमार खुद विभाग में जातिवाद फैलाते थे और भ्रष्टाचार करते थे। उन्होंने सभी पदों पर अपने लोगों को सेट किया था जिनसे वह वसूली करवाते थे। इतना ही नहीं एएसआई संदीप ने पूरन कुमार के पूरे परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने यहां तक कहा है कि गिरफ्तारी के डर से पूरन कुमार ने खुदकुशी कर ली है, अब दोनों ही मामले में पुलिस फिलहाल कार्रवाई में जुट गई है।

दरअसल हमें समझना पड़ेगा कि हमारे देश में जो प्रशासन है, पुलिस है, उसमें राजनीति और सामाजिक बुराइयां इस हद तक घुसपैठ कर गई हैं कि इस तरह के दुखद प्रकरण से सामने आ रहे हैं। पहले आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार सुसाइड करते हैं। आठ पेज का एक सुसाइड नोट छोड़ते हैं। इसमें 13 पुलिस अधिकारियों पर इल्जाम लगाते हैं कि उनका उत्पीड़न किया गया। इसके बाद एएसआई संदीप सिह सुसाइड कर लेते हैं। वो भी पांच पेज का नोट देते हैं। संदीप सिह जो नोट लिखते हैं उसमें पूरन कुमार पर भयानक भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं और वो कहते हैं कि भ्रष्ट है। हरियाणा की जो ब्यूरोक्रेसी है और जो पुलिस है उसमें जातीय संघर्ष और व्यक्तिगत भ्रष्टाचार और स्वार्थों का मामला इतना ज्यादा गहरे धस गया है कि इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।

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सवाल ये है कि इतने बड़े पद पर बैठा हुआ UPSC  से सिलेक्टेड अधिकारी सुसाइड करने पर मजबूर क्यों हुआ? इसके दो कारण है। जो हमारा सोशल स्ट्रक्चर है वो एक बड़ा कारण है। यह सोशल स्ट्रक्चर की प्रॉब्लम है और इस प्रॉब्लम में इसका बीजारोपण होता है। दूसरी बात जो मैं इसमें जोड़ देना चाहता हूं वो है ग्लोबलाइजेशन का सोशल इंपैक्ट। जब कोई घटना हो जाती है तब हमको जातिवाद याद आता है। रोज हम पढ़ते हैं और रोज जानते हैं सच्चाई को कि जातिवाद है और पूरी तरह से सच्चाई है। हमारे यहां क्या है कि डाइंग डिक्लेरेशन यानी मरने के पहले जो कुछ भी लिखा जाए वो एडमिसिबल एविडेंस माना जाता है। इन दो डाइंग डिक्लेरेशन ने यह साबित कर दिया है कि इसको एडमिसिबल एविडेंस नहीं मानना चाहिए। फिलहाल मामला जांच के घ्ोरे में है और पुलिस कार्रवाई कर रही है। लेकिन ये जातिवाद से ज्यादा सिस्टम की खामी नजर आती है।

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