- मुनाफे में नंबर-1, खाने के भी कई फायदे
नया लुक संवाददाता
मेरठ। क्या रंगीन आलू हो सकता है? इस सवाल पर आपको हैरानी हो सकती है और हंसी भी आ सकती है। अब हैरान होने की बारी आपकी है क्योंकि अब ऐसा होने वाला है। जी हाँ, अब बैंगनी आलू की खेती होगी और यह कई राज्यों में उपलब्ध होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR ) और राष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) मेरठ ने मिलकर इस पर शोध किया है। इसके बाद बैंगनी आलू कुफरी जामुनिया और कुफरी नीलकंठ किस्में किसानों के लिए तैयार की हैं। ये किस्में 75 से 100 दिनों में पक जाती हैं और इनकी मांग चिप्स बनाने वाली कंपनियों में बढ़ रही है।

मेरठ के इस संस्थान में आलू की 76 वैराइटी तैयार की गयी हैं। संस्थान के प्रमुख का कहना है कि आने वाले दिनों में आलू की तीन-चार वैराइटीज और तैयार की जा रही है। हर आलू की अपनी खासियत है आमतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को गन्ना बेल्ट के तौर पर जाना जाता है, लेकिन अब आलू की खेती की बहार वेस्ट यूपी में भी देखने को मिल रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसान गन्ने के साथ-साथ आलू की भी खेती करें तो उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है।
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम,मेरठ के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार इन प्रजातियों में अब नई प्रजाति कुफरी चिपसोना-5 भी शामिल हो गई है। इस प्रजाति का उत्पादन भी अच्छा है और इस प्रजाति के आलू का स्वाद भी लजीज है। साथ ही चिप्स बनाने में भी यह प्रजाति सबसे अच्छी मानी जा रही है। आलू की इस प्रजाति से किसानों की आय बढ़ेगी और लोगों को बेहतर स्वाद वाला आलू मिल सकेगा।
आलू की ये प्रजाति 90 से 100 दिन में तैयार होने वाली है. उच्च उपज वाली आलू की किस्म है, जो चिप्स बनाने के लिए उपयुक्त है। इस आलू का उत्पादन 300 से 3350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर में होता है। उत्तर प्रदेश के साथ ही हरियाणा, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड़ के किसानों के लिए यह प्रजाति तैयार की गई है।
