भगोड़े मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण को बेल्जियम कोर्ट ने दी मंजूरी

  • 13 सौ करोड़ के पीएनबी घोटाले के हैं आरोपी
  • एक अन्य भगोड़े नीरव मोदी के मामा है चोकसी
  • घाटाला कर 2018 में देश छोड़कर भागे निकले चौकसी

बेल्जियम । तेरह सौ करोड़ के ऋण घोटाले के भगोड़े आरोपी और गुजरात के हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को बेल्जियम की एंटवर्प कोर्ट ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी। जांच ऐजेंसियां उसे भारत लाने की कोशिश कर रही हैं और अधिकारी यह आश्वासन दे चुके हैं कि चोकसी को मुंबई के आर्थर रोड जेल कॉम्प्लेक्स में रखा जाएगा, जहां मानवाधिकारों का पालन होगा। मेहुल चोकसी गीतांजलि ग्रुप के मालिक हैं और 28,000 करोड़ के बैंक घोटाले के भगोड़े नीरव मोदी के मामा हैं।

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चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक में 13 हजार करोड़ रुपये के कथित ऋण घोटाले का आरोप है और वह 2018 में पीएनबी घोटाले के खुलासे के बाद भारत छोड़कर भाग गए थे। वे पहले एंटीग्वा एंड बरबुडा चले गए, जहां उन्होंने नागरिकता प्राप्त की थी। 2021 में डोमिनिका में उनकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन अपहरण के आरोप लगाकर वे वहां से रिहा हो गए। उसके बाद 2023 में चोकसी बेल्जियम पहुंचे, जहां उनकी पत्नी बेल्जियन नागरिक हैं। 11 अप्रैल 2025 को एंटवर्प पुलिस ने चोकसी को गिरफ्तार किया। कोर्ट ने भारत के अनुरोध पर चोकसी की गिरफ्तारी को वैध ठहराते हुए कहा कि प्रत्यर्पण का पहला कानूनी चरण पूरा हो गया है। हालांकि, चोकसी को बेल्जियम की उच्चतर अदालत में अपील का अधिकार है, जिससे उनका तत्काल प्रत्यर्पण संभव नहीं लगता। यह फैसला बेल्जियम में अप्रैल में उनकी गिरफ्तारी के पांच महीने बाद आया है, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बेल्जियम से प्रत्यर्पण की मांग की थी।

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बेल्जियम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले बेल्जियम के अभियोजन पक्ष और चोकसी की कानूनी टीम ने अपनी दलीलें पेश कीं। अदालत ने पाया कि भारत में चोकसी पर जिन अपराधों का आरोप है, उनमें आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करना और भ्रष्टाचार शामिल हैं, जो बेल्जियम के कानून के तहत भी दंडनीय हैं। यह अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत प्रत्यर्पण के लिए ज़रूरी शर्त को पूरा करता है।

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शुक्रवार को एंटवर्प कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि चोकसी की गिरफ्तारी वैध थी और भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार्य है। अभियोजकों ने कोर्ट को बताया कि चोकसी फ्लाइट रिस्क बने हुए हैं और उन्हें जेल में ही रखा जाना चाहिए। भारत ने 2018 और 2021 में मुंबई की विशेष अदालत द्वारा जारी दो वॉरंट भी सौंपे। प्रत्यर्पण प्रक्रिया भारत-बेल्जियम के 2020 के एक्स्ट्राडिशन संधि के तहत हो रही है, जो यह पहला मामला है।

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