सावधान : गलत दिशा में जलाया यमदीप…हो सकता है भारी नुकसान

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  • जानें 20 अक्टूबर को दीप जलाने के सभी नियम!

लखनऊ। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व दीपावली से ठीक एक दिन पहले आता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र एवं महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन विशेष रूप से मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है और उनके लिए ‘यम दीप’ जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक यमराज के लिए दीप जलाने से घर में अकाल मृत्यु का संकट समाप्त होता है और समस्त परिवार पर यम की कृपा बनी रहती है। साथ ही, घर से नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त हो जाती है और सुख-समृद्धि का प्रवेश होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार नरक चतुर्दशी की तिथि इस वर्ष 19 अक्टूबर 2025 को दोपहर एक बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार नरक चतुर्दशी का पर्व 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। इसी दिन दीपावली का मुख्य पर्व भी मनाया जाएगा, जिससे यह तिथि और भी पावन हो जाती है।

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यम दीप जलाने का महत्व

नरक चतुर्दशी की संध्या को यमराज के लिए विशेष दीपक जलाने की परंपरा है। इस दीप को ‘यम दीप’ कहा जाता है और इसे विशेष विधि-विधान से जलाया जाता है। मान्यता है कि यमराज के लिए दीप जलाने से व्यक्ति की असमय मृत्यु का योग समाप्त हो जाता है और उसे यमलोक में दुख नहीं भोगना पड़ता। यह दीप न केवल मृत्यु के भय को दूर करता है, बल्कि समस्त घर में सकारात्मक ऊर्जा और देवत्व का संचार करता है।

यम दीप जलाने के विशेष नियम

हिंदू धर्मशास्त्रों में यम दीप जलाने की एक विशेष विधि निर्धारित की गई है। इस विधि का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है क्योंकि यदि यह दीप गलत दिशा या विधि से जलाया जाए तो शुभ फल के स्थान पर अशुभ परिणाम भी सामने आ सकते हैं। यम दीप को हमेशा ‘चौमुखा’ यानी चार बातियों वाला दीपक होना चाहिए। इसे मिट्टी या आटे से बनाया जाना चाहिए और इसमें केवल सरसों का तेल ही प्रयोग करना चाहिए। चार बातियों का दीपक चार दिशाओं में रोशनी फैलाने का प्रतीक है, जिससे समस्त दिशाओं से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि यम दीप को हमेशा दक्षिण दिशा में ही जलाना चाहिए। दक्षिण दिशा को यमराज का स्थान माना गया है और इस दिशा में दीपक जलाकर यम को समर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं और परिवार की रक्षा करते हैं।

घर के हर कोने में जलाएं 14 दीप

केवल यम दीप ही नहीं, इस दिन 14 अन्य दीपक भी जलाए जाने चाहिए। ये दीपक घर के विभिन्न स्थलों जैसे पूजा घर, रसोई, जल स्थान, तुलसी चौरा, मुख्य द्वार, छत, स्नानगृह आदि में रखने चाहिए। ऐसा करने से पूरे घर में देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है और लक्ष्मी का वास होता है। यम दीप जलाने के बाद सबसे पहले उसे पूरे घर में घुमाना चाहिए। ऐसा करने से घर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है। इसके बाद दीपक को दक्षिण दिशा में बाहर साफ स्थान पर रखना चाहिए। ध्यान रखें कि जिस स्थान पर दीप रखा जा रहा है, वह स्थान शुद्ध और स्वच्छ होना चाहिए।

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क्या धनतेरस को भी जला सकते हैं यम दीप?

हालांकि परंपरा अनुसार यम दीप नरक चतुर्दशी की शाम को जलाया जाता है, लेकिन कुछ मान्यताओं के अनुसार इसे धनतेरस की शाम को भी जलाया जा सकता है। यदि आप धनतेरस पर यम दीप जलाना चाहते हैं, तो यह 18 अक्टूबर की शाम को किया जाना चाहिए। लेकिन यदि आप दिवाली से एक दिन पहले परंपरागत रूप से यम दीप जलाना चाहते हैं, तो इसे 19 अक्टूबर की शाम को जलाना श्रेष्ठ माना गया है। हिंदू धर्म में यमराज को मृत्यु का अधिपति माना गया है। उन्हें प्रसन्न करने का अर्थ है अकाल मृत्यु के भय को समाप्त करना। इसीलिए यम दीप जलाने को इतना महत्वपूर्ण माना गया है। यह दीपक केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि एक ऊर्जा साधन भी है, जिससे घर का हर कोना पवित्र हो जाता है और मृत्यु जैसी घटनाएं टल जाती हैं।

क्या है यम दीप जलाने के पीछे की पौराणिक कथा?

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार यमराज ने एक बालक को बताया कि यदि वह नरक चतुर्दशी की रात यमराज के लिए दीप जलाएगा, तो उसे कभी यमलोक का कष्ट नहीं भोगना पड़ेगा। इसीलिए उस दिन से यम दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई। इस कथा का मूल संदेश यही है कि यमराज को स्मरण कर दीप जलाने से जीवन में शुभता आती है और मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।

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कैसे करें यम दीप की पूजा?

नरक चतुर्दशी की शाम को स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और यम दीप तैयार करें। दीपक में सरसों का तेल डालें और चार बातियां लगाएं। दीपक को दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रखें। यमराज का नाम लेकर “मृत्यु देवाय नमः” मंत्र का जप करें और दीपक को समर्पित करें। इसके बाद दीपक को पूरे घर में घुमाकर दक्षिण दिशा में बाहर रखें। यम दीप जलाने के बाद घर के अन्य दीपों को भी जलाएं और घर को दीपावली की रोशनी से सजाएं। रात को पूजा के बाद दीपों को धीरे-धीरे बुझाएं। अगले दिन इस दीपक को जल शुद्ध स्थान पर विसर्जित करें।

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