- विदेशी डिश है समोसा कभी Non Veg हुआ करता था,
- चाय पीने में तो बहुत फिसड्डी हैं भारत के लोग
- चाय पीने में भारत टॉप-10 देशों में भी नहीं
- मांस और मेवों से भरपूर होता था समोसा
भारत को खाने-पीने का शौकीन लोगों का देश यूं नहीं कहा जाता है । यहां हर प्रान्त की अपनी एक अलग स्पेशल डिश होती है। मसलन बिहार का लिट्टी चोखा का स्वाद अब देश की सीमा पार तक जा चुका है। इसी तरह गुजरात का ढोकला और बंगाल की मिठाइयों का स्वाद लेने विदेशी तक आते हैं। ऐसे में अमृतसरी कुलचा और मुंबई के बड़े पाव की बात न हो ऐसा हो नहीं सकता। अब बात करें दक्षिण भारत की तो यहां तो एक लजीज व्यंजनों की बहुत बड़ी FOOD Chain है जो न सिर्फ हिन्दुस्तान में बल्कि यूके और खाड़ी के देशों मे भी बहुत पसंद की जाती है।
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इन सबके बीच समोसे और चाय का जिक्र न हो तो बात पूरी नहीं होती। शायद ही हिन्दुस्तान का कोई भी शख्स ऐसा नहीं हो जिसने समोसे नहीं खाया और और चाय की चुस्की का लुत्फ न उठाया हो। जब भी चाय के साथ कुछ चटपटा खाने का मन करता है, तो समोसा ही मंगाया जाता है। इसके बावजूद आपको ये जानकार हैरानी होगी कि जिस समोसे को हम लोग चटकारे लेकर खाते हैं वह एक विदेशी डिश है जो सालों पहले भारत आयी और यहीं की होकर रह गयी। यहां एक बात का जिक्र करना बेहद जरुरी है कि असल में यह एक ‘ नानवेज ‘ डिश है। हमारे देश में समोसा आलू भरा होता है लेकिन पहले का समोसा मीट और सूखे मेवे से भरा होता था। समोसे के साथ चाय का जिक्र करें तो शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हम हिन्दुस्तान चाय को लेकर नाहक ही बदनाम होते हैं जबकि चाय पीने के मामले में हम बहुत फिसड्डी हैं।
ये है समोसा
समोसे का जिक्र मध्य पूर्व यानी पश्चिमी एशिया से शुरु करते हैं। यहां 10 वीं शताब्दी से पहले समोसे जैसे व्यंजन वहां बनाए जाते थे और फारसी भाषा में इसे ‘सम्मोसा’ या ‘संबोसा’ कहा जाता था। धीरे-धीरे और यही नाम बदलकर ‘समोसा’ बन गया। इस समय ईरानी खाने में एक खास तरह की भरवां पेस्ट्री हुआ करती थी, जिसमें सूखे मेवे या मीट भरा जाता था और फिर इसे तला या बेक किया जाता था। इस तरह से समोसा भारत पहुंच गया तक। मध्य एशिया से भारत आने वाले व्यापारी और शाही खानसामे अपने साथ यह व्यंजन भी लाए थे और धीरे-धीरे यहां लोगों के स्वाद में शामिल हो गया। विदेशी समोसा जहां मांस और मेवों से भरपूर होता था, वहीं भारत में इसे वेजिटेरियन बनाया गया। खासकर आलू की स्टफिंग ने इसे आम भारतीय का पसंदीदा बना दिया। हमारे देश में आलू की कोई कमी नहीं है और मसालों भी भरपूर पैदा होते हैं। इसलिए हमारे देश के समोसे में गरम मसाले, हरी मिर्च, धनिया, अदरक और प्याज जैसी चीजों का तड़का लग गया। देखते ही देखते यह नाश्ता हर गली-नुक्कड़, चाय की दुकानों तक पहुंच गया।
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अब जिक्र चाय का
हमारे देश में अगर समय काटे नहीं कटता है तो आदमी चाय बनाकर पीना शुरु कर देता है। इसी तरह बाहर किसी का इंतजार करना हो तो चाय के सहारे से बढ़िया साधन कोई नहीं है। सवेरे उठो तो चाय और दफ्तर पहुंचों तो फिर एक के बाद एक कई चाय। दरअसल भारत में चाय सिर्फ एक मात्र ड्रिंक नहीं है, बल्कि लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुकी है। हिन्दुस्तान में चाय की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि आम धारणा बन गई है कि यहां दुनिया में सबसे ज्यादा चाय यही पी जाती है। लेकिन हकीकत चौंकाने वाली और थोड़ा हटकर है। दरअसल भारत चाय पीने के मामले में दुनिया के दूसरे देशों से बहुत पीछे है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चाय की खपत के मामले में भारत टॉप-10 देशों में भी नहीं आता है। इस लिस्ट में भारत से पहले 20 देश शामिल नहीं है। पाकिस्तान जैसे देश भी चाय पीने में हमसे आगे है।
