122 साल बाद दुर्लभ संयोग, लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण

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पंडित सुधांशु तिवारी
   पंडित सुधांशु तिवारी

21 सितंबर को साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, जो कि भारत में दृश्यमान नहीं होगा। इससे पहले सात सितंबर को साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगा था। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण था, जिसका असर तीन महीने पहले और तीन  महीने बाद तक रहता है। भारत के कई बड़े ज्योतिर्विदों के मुताबिक, 15 दिन में दो ग्रहण लगना एक दुर्लभ घटना और अशुभ संकेत है। उन्होंने देश-विदेश में बड़े संकट, प्राकृतिक आपदाओं के आने की आंशका जताई है। इस घटना को पूरी दुनिया के लिए खतरनाक बताया जा रहा है। आइए जानते हैं कि 15 दिनों में दो ग्रहण क्या अशुभ संकेत दे रहे हैं।

सूर्य ग्रहण का समय

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर की रात्रि में शुरू होगा। 21 सितंबर की रात में 10 बजकर 59 मिनट से 22 सितंबर की सुबह तीन  बजकर 23 मिनट तक यह सूर्य ग्रहण रहेगा।

सूर्य ग्रहण किस राशि और नक्षत्र में लगेगा

साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण सर्वपितृ अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। इस दिन सूर्य कन्या राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में होंगे।

सूर्य ग्रहण का सूतक भारत में मान्य होगा या नहीं?

सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार रात्रि के समय लग रहा है इसलिए भारत में इसका सूतक मान्य नहीं होगा। हालांकि धार्मिक जानकारों की मानें तो भले ही सूर्य ग्रहण का सूतक मान्य न हो लेकिन ग्रहण से संबंधित सावधानियां इस दौरान बरतनी चाहिए। आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से ठीक 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ग्रहण समाप्त होने पर खत्म होता है। ऐसे 21 सितंबर को लगने वाले सूर्य ग्रहण का सूतक भारतीय समय अनुसार सुबह 11 बजे से शुरू हो जाएगा। यानि सूर्य ग्रहण का सूतक काल 21 सितंबर सुबह 11 बजे से 22 सितंबर की सुबह 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।

सूर्य ग्रहण किन राशियों के लिए रहेगा अशुभ

साल 2025 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण वैसे तो भारत में नहीं दिखेगा। फिर भी इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, जिसमें इसका नकारात्मक प्रभाव वृषभ, कर्क, कन्या, धनु, मकर और कुंभ पर पड़ेगा।

पितृपक्ष में दो ग्रहण होने का इतिहास से संबंध

ज्योतिष सुधांशु तिवारी जी के मुताबिक, साल 1903 में किंग एडवर्ड सप्तम और रानी एलेक्जेंड्रा का राज्याभिषेक हुआ था। इसके अलावा, इस साल में बंगाल विभाजन की योजना तैयार की गई थी और मद्रास में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था। साथ ही, इसी साल में भारत में अंग्रेजों की नींव मजबूत हुई थी।

122 साल बाद पर बनेगा ये संयोग

ज्योतिष प्रतीक भट्ट के मुताबिक, 122 साल बाद ऐसे संयोग निर्माण बन रहा है कि ग्रहण से ही पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है और ग्रहण से ही पितृपक्ष का समापन भी हो रहा है। साल 2025 से पहले ऐसा संयोग साल 1903 में बना था।

कहां कहां दिखेगा ये सूर्य ग्रहण

यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से दक्षिणी प्रशांत महासागर, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा। चूंकि, यह भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण के दिन इन मंत्रों का जप करना शुभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। इसलिए ग्रहण के दौरान कुछ मंत्रों का जप करना आपके लिए शुभ साबित हो सकता है। इस दिन आपको महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र और सूर्य मंत्र का जप करने से सकारात्मकता मिलेगी।

देश-दुनिया में युद्ध और तनाव

15 दिन में 2 ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव सिर्फ प्रकृति तक सीमित नहीं रहता है। इसका असर सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बुरा ही माना जाता है। देश-दुनिया में युद्ध और तनाव जैसी स्थिति बनती हैं। कुछ समय पहले ही हमने कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी घटना देखी, जिसमें कई पर्यटकों को आतंकवादियों ने बेरहमी से मार दिया। इसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ और जवाबी कार्रवाई में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया।

आर्थिक संकट : 15 दिन में 2 ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हाल ही में शेयर मार्केट में हुए बड़े उतार-चढ़ाव के रूप में इसे समझा जा सकता है। इसके अलावा, आर्थिक नीतियों को लेकर कुछ देश एक-दूसरे पर हावी होते दिखाई दे सकते हैं।

 

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