सन्यासी का श्राद्ध आज है, जानिए तिथि व पूजा विधि और लाभ

Untitled 9 copy 13

राजेन्द्र गुप्ता

हिंदू धर्म में सन्यासी पितरों का श्राद्ध बेहद महत्व रखता है। जिन परिवारों के सदस्य माता-पिता, दादा-दादी, चाचा-चाची या अन्य पितृ पूर्वज जीवित रहते हुए सन्यासी बन गए थे, उनके श्राद्ध की तिथि शास्त्रों में विशेष रूप से निर्धारित की गई है। भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक कुल 16 श्राद्ध होते हैं। इन श्राद्धों में अपने पितरों और पूर्वजों का पिंडदान, तर्पण और अन्य विधियां करना आवश्यक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष की कुछ तिथियां निश्चित की गई हैं।

जैसे सौभाग्यवती माता स्त्रियों का श्राद्ध एक निर्धारित तिथि को किया जाता है, वैसे ही सन्यासी पितरों का श्राद्ध भी निश्चित तिथि को करने का विधान है। श्राद्ध पक्ष की सभी तिथियां विशेष महत्व रखती हैं। गरुड़ पुराण और शकुन शास्त्र में भी इसे स्पष्ट किया गया है। जो व्यक्ति अपने पितृ पूर्वज का विधिपूर्वक श्राद्ध नहीं करता, उसके जीवन में दुख, आर्थिक हानि, पारिवारिक कलह और अन्य संकट बने रहते हैं।

सन्यासी पितरों का श्राद्ध

सन्यासी पितरों का श्राद्ध केवल अश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को करना चाहिए। साल 2025 में यह तिथि 18 सितंबर, बृहस्पतिवार है। इस दिन 11:00 बजे से पहले विधिपूर्वक पिंडदान और तर्पण करने से सन्यासी पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है और वे वंशजों पर सदैव आशीर्वाद बनाए रखते हैं। विशेष जानकारी के अनुसार, जिन पितृ पूर्वजों ने जीवन रहते सन्यास लिया और पिंडदान कर दिया, उनका श्राद्ध नहीं करने पर दोष नहीं माना गया है। लेकिन यदि विधिपूर्वक द्वादशी तिथि को श्राद्ध किया जाता है, तो यह उनके मोक्ष और वंशजों के कल्याण के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।

श्राद्ध की विधि और महत्वपूर्ण जानकारी

श्राद्ध की तिथि : अश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी।

साल 2025 में तिथि : 18 सितंबर, बृहस्पतिवार।

समय : 11:00 बजे से पहले।

विधि : पिंडदान, तर्पण और अन्य शास्त्रानुसार अनुष्ठान।

लाभ : सन्यासी पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है और वंशजों पर आशीर्वाद बना रहता है।

Religion Uttar Pradesh

मनुस्मृति में संशोधन नहीं, शास्त्रों में मिलावट का पर्दाफाश करना उद्देश्य: स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती

Varanasi: संस्कृति संसद में भारतीय धर्मशास्त्रों, मनुस्मृति और सनातन परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श करते हुए स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मनुस्मृति में संशोधन करना नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रों में कथित रूप से किए गए प्रक्षेप, मूल ग्रंथों में मिलावट और विदेशों में पहुंचाई गई दुर्लभ पांडुलिपियों की वास्तविकता […]

Read More
Lifestyle Religion

रमा एकादशी का व्रत आज, भगवान विष्णु के साथ करें मां लक्ष्मी की पूजा

Rama Ekadashi: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह एकादशी दीपावली से चार दिन पहले आती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पापों […]

Read More
homeslider Religion

जन्म कुंडली में लग्न नक्षत्र का महत्व: जानिए कैसे तय करता है आपका व्यक्तित्व और भाग्य

Religion News: हिंदू ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली के प्रत्येक भाव, ग्रह और नक्षत्र का अपना विशेष महत्व है। इनमें लग्न नक्षत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यह न केवल व्यक्ति के बाहरी व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि उसके सोचने-समझने के तरीके, व्यवहार, स्वभाव और जीवन के प्रति दृष्टिकोण की भी जानकारी देता है। […]

Read More