- घर में लाइये और ऐसे सेट कर लीजिए अपना बेड… केवल अपनाएं ये आसान स्टेप…
- दुनिया की यह सबसे नामी कम्पनी बना रही है कस्टमाइज्ड बेड
नया लुक संवाददाता
मुम्बई। बेडरूम में एक शानदार बेड की बात करते ही इस बात की चिंता सताने लगती है लकड़ी कहां से आएगी? लकड़ी की पहचान कैसे करें और बेड टिकाऊ होंगे या नहीं? कारपेंटर कैसा होगा? सही कारीगर नहीं मिला तो? पैसे ज्यादा खर्च हो जाएंगे? तमाम सवालों से परेशान हो कर लोग नए फर्नीचर का सपना छोड़ देते हैं। लेकिन आधुनिक तकनीक ने इस परेशानी का हल निकाला है। आपको न तो किसी कारपेंटर की मदद लेने की जरूरत है और न ही स्क्रू और कील की… सोच रहे हैं यह सपने जैसा है, लेकिन नहीं यह सोलह आने सच है। इसमें केवल बेड शामिल नहीं है। इसमें सोफा, टेबल, अलमारी, किताबों की अलमारी, किचन कैबिनेट, बाथरूम वैनिटी और छोटी-छोटी सजावट और जरूरत के सेल्फ, टेबिल और भी बहुत सारे प्रोडक्ट्स इस में शामिल हैं। इस की खास बात यह होती है कि यह कमरे की प्रत्येक इंच जगह का उपयोग करता है और घर को सुव्यवस्थित और आकर्षक बना देता है। यह आमतौर पर दीवारों या फर्श से जुड़ा होता है, जिस से यह मजबूत और स्थिर होता है। इस के जरिए कमरे के कोनों का बेहतरीन उपयोग हो सकता है।
जानिए घर में कैसे फिट होता है कस्टमाइज्ड फर्नीचर
‘बिल्ट-इन फर्नीचर’ को दो तरह से फिट किया जा सकता है। अगर खुद फिट करना चाहते हैं तो सबसे पहले एक टूल किट लीजिए। जिसमें स्क्रू ड्राइवर के साथ कई तरह स्क्रू ओपनर होते हैं। जिन को स्क्रू ड्राइवर में फिट करके जरूरत के हिसाब ने नट बोल्ट को लगाने का काम किया जा सकता है। इस किट में एक हथौड़ी और एक प्लास भी होता है। इस किट से पूरा फर्नीचर फिट कर दिया जाता है। अगर आप इसको फिट नहीं कर सकते तो कारपेंटर भेजा जाता है। वह अपनी मजदूरी अलग से लेता है। हालांकि खुद फर्नीचर को फिट करना बेहद सरल होता है। फर्नीचर के साथ ही साथ एक बुकलेट दी जाती है। जिस में ग्राफिक बना कर स्टेप बाई स्टेप यह समझाया जाता है कि कब क्या करना है। किस टूल का प्रयोग किस स्क्रू या नटबोल्ट को लगाने में करना है यह चित्रों से समझाया जाता है। फर्नीचर के साथ एक भी नट बोल्ट एक्सट्रा नहीं होता है। अगर एक भी स्टेप गलत हो जाता है तो आगे सही से फिटिंग नहीं होती है। गाइड लाइन के साथ फर्नीचर को फिट करना बेहद सरल होता है। स्क्रू और नटबोल्ट इतने अच्छी किस्म के बने होते हैं और इन को लॉक करने का सिस्टम बहुत अच्छा होता है जिससे फर्नीचर हिलता डुलता नहीं है। इसको एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का एक ही तरीका होता है कि इनको खोल कर ले जाया जाए। भारत में ‘बिल्ट-इन’ या ‘कस्टमाइज्ड फर्नीचर’ की मांग तेजी से बढ़ रही है। सरकार अगर इस कारोबार को सहायता दे तो आइकिया जैसी विदेशी कंपनियों के मुकाबले देशी कंपनिया भी आगे बढ़ सकती है। जिस से यहां रोजगार मिलेगा और फर्नीचर बाजार सस्ता हो जाएगा। अभी भारत में लकड़ी का काम कराना बेहद मुश्किल, खर्चीला और समय वाला है। एक कारपेंटर दिन का 800 से 1500 रुपये मजदूरी लेता है। उस के पास काम करने वाले पुराने किस्म के औजार ही हैं। बिजली से चलने वाले नए किस्म के औजार और नटबोल्ट न होने से उस के द्वारा तैयार किए गए सामान बहुत खूबसूरत नहीं होते हैं।

स्वीडन की कंपनी बना रही ऐसा फर्नीचर
दुनिया की सब से मशहूर कंपनी आइकिया इस फर्नीचर को तैयार करती है। साल 1943 में इसकी स्थापना इंगवार काम्पराड ने की थी। उन का सपना था कि कम कीमत में अच्छा फर्नीचर घर-घर पहुंच सके। आइकिया वर्ष 2008 से दुनिया की सबसे बड़ी फर्नीचर के रूप में स्थापित हो गई है। कंपनी का मुख्यालय नीदरलैंड के डेल्फ्ट में है। इस की फैक्ट्री चीन के अलग-अलग शहरों में है। आइकिया ने 2018 में भारत के हैदराबाद में अपना पहला स्टोर खोला था। इस के बाद कंपनी ने नवी मुंबई और बेंगलुरु में भी स्टोर खोले हैं। भारत में आइकिया का लक्ष्य 40 शहरों में स्टोर खोलना है। आइकिया मजबूत फ्रेम और स्लैट्स ठोस लकड़ी के फर्नीचर तैयार करती है। यह ओक, अखरोट, शीशम और सागौन जैसी लकड़ी का प्रयोग भी करते हैं। साथ ही इंजीनियरिंग वुड का प्रयोग प्लाई बनाने में होता है। आइकिया जैसी और कंपनिया भी है जो इस तरह के फर्नीचर बना रही है। इन में एमडी ट्रेड लाइन प्रमुख है। यह स्टोन और फर्नीचर के क्षेत्र में काम कर रही एक भरोसेमंद कंपनी है। भारत सहित पूरी दुनिया में यह अपने फर्नीचर पंहुचा रही है। कंपनी प्रेसीडैंट मुरलीधर आनंदीलाल का कहना है ‘कुशल शिल्पकला और गुणवत्ता ही हमारी ताकत है। हमारे प्रोडक्ट्स वैसे ही हो जैसे आप चाहते हैं।’

कैसा है फर्नीचर की दुनिया का बादशाह देश स्वीडन
गौरतलब है कि भारत के मुकाबले स्वीडन बहुत छोटा देश है। बावजूद इसके वहां की कम्पनी भारत के फर्नीचर बाजार में अपना एकाधिकार जमाने में सफल रही है। अब भारतीय कंपनियां भी उसी तर्ज पर बिजनेस आगे ला रही है। स्वीडन उत्तरी यूरोप के नोर्डिक क्षेत्र का हिस्सा है। स्वीडन आकार में बड़ा और जनसंख्या में छोटा है। यहां की जनसंख्या 1 करोड़ 5 लाख के करीब है। जो विश्व की जनसंख्या का 0.13 प्रतिशत हिस्सा है। यहां 20 से 64 आयुवर्ग में 84 फीसदी पुरुष 82 फीसदी महिलाएं रोजगार करती हैं।
इंजीनियर्ड वुड कितना मजबूत
आज का सस्ता और टिकाऊ फर्नीचर इंजीनियर्ड वुड से तैयार होता है। इसको कम्पोजिट वुड भी कहा जाता है। यह लकड़ी के रेशों, कणों को एक साथ चिपका कर बनाई जाती है। इसके ऊपर पौलीलेयर लगाई जाती है। इस को चिकना और चमकदार बनाने के लिए रेजिन का प्रयोग किया जाता है। जिस से यह लकड़ी जल्दी खराब नहीं होती है। यह कई प्रकार का होता है। प्लाईवुड में लकड़ी की पतली परतों को एक साथ चिपका कर बनाया जाता है। ओरिएंटेड स्ट्रैंड बोर्ड (OSB) लकड़ी के बड़े स्ट्रैंड्स को एक साथ चिपका कर बनाया जाता है। मीडियम डेंसिटी फाइबरबोर्ड (MDF) लकड़ी के रेशों को एक साथ चिपका कर बनाया जाता है। लेमिनेटेड वेनियर लंबर (LVL) लकड़ी के पतली छाल को एक साथ चिपका कर बनाया जाता है। क्रोस लैमिनेटेड टिम्बर (CLT) लकड़ी के स्लैब को एक-दूसरे के लंबाई में रख कर चिपका कर बनाया जाता है।
यह लकड़ी से अधिक मजबूत और टिकाऊ होती है। इस में एक तरह के कैमिकल का प्रयोग करते हैं जिससे इसको दीमक से नुकसान नहीं होता। पानी से सड़ने का खतरा नहीं होता है। नमी के कारण सिकुड़ती या फूलती नहीं है। यह प्राकृतिक लकड़ी की तुलना में कम खर्चीली होती है, इसलिए फर्नीचर सस्ते होते हैं। इसमें अलग-अलग तरह के डिजाइन बनाना आसान होता है। आग लगने पर यह जलती नहीं है। बहुत खराब हालत में भी केवल सुलगती है।
सावधानी से करें फर्नीचर की देखभाल
- इंजीनियर्ड वुड प्राकृतिक लकड़ी से अलग होती है। यह रखरखाव मांगती है। इसका पालन करेंगे तो यह काफी समय तक चलेगा।
- इस फर्नीचर में लिखा होता है कि कितना वजन सहन करने की क्षमता इस में होती है। वजन से अधिक क्षमता न डालें। फर्नीचर गंदा हो तो केमिकल से साफ करें।
- कमरे को फिर से व्यवस्थित करते समय सावधानी बरतें ताकि खरोंच या गड्ढों से बचा जा सके।
- समय-समय पर स्क्रू की जांच करते रहें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे कसे हुए हैं।
- फर्नीचर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय या मरम्मत के दौरान खरोंच, डेंट से बचाने के लिए कवर या कंबल का उपयोग करे।
- फर्नीचर को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए नियमित सफाई, पोलिशिंग और नमी से बचाव की आवश्यकता होती है।
