योगी के पास संभल हिंसा-डेमोग्राफी चेंज की रिपोर्ट आते ही सियासत शुरू

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अजय कुमार                               

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संभल के संभल दंगों और डेमोग्राफी में बदलाव की रिपोर्ट, जो आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई, ने क्षेत्र में विगत वर्षों की हिंसा और जनसंख्या बदलाव पर कई सनसनीखेज तथ्य उजागर किए हैं। 450 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति डीके अरोड़ा के नेतृत्व में बनी तीन सदस्यीय आयोग ने यह जांच की सदस्य पूर्व डीजीपी एके जैन और पूर्व अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद थे, रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई, जिसमें उनके प्रमुख सचिव संजय प्रसाद भी मौजूद रहे। 24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के कोर्ट-ऑर्डर सर्वे के दौरान भारी हिंसा भड़क उठी. भीड़ द्वारा पथराव, आगजनी और पुलिस पर हमला हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत और कई लोग, अधिकारी व स्थानीय निवासी घायल हुए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रण करने के लिए फायरिंग की, कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई और 80 आरोपी गिरफ्तार किए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक आज़ादी के बाद संभल में कुल 15 बड़े दंगे हो चुके हैं। रिपोर्ट में प्रत्येक हिंसा तिथि, जनहानि, प्रशासनिक कार्रवाई और बाद की स्थिति का विवरण दर्ज है। खास बात यह है कि हर बार प्रशासन ने दंगों के पीछे प्लांड साजिश, राजनीति और जनसांख्यिकीय बदल के तत्व पाए। पैनल की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आजादी के टाइम (1947) संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 फीसदी थी, जबकि मुसलमान 55 फीसदी थे अब हिंदू आबादी घटकर मात्र 15 फीसदी (कुछ रिपोर्टों में 15-20) रह गई है, जबकि मुस्लिम आबादी बढ़कर 85 फीसदी पर पहुंच गई है। पिछले 78 वर्षों में हिंदुओं की जनसंख्या 30 फीसदी कम हुई है। इस जनसांख्यिकीय बदलाव के पीछे आयोग ने तुष्टिकरण, बार-बार दंगों की साजिश, भय का वातावरण और योजनाबद्ध पलायन को जिम्मेदार ठहराया. नेताओं की ‘एपीजमेंट पॉलिसी’ और प्रशासनिक उदासीनता ने भी इस प्रक्रिया को गति दी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भयवश, हजारों हिंदू परिवारों को संभल से पलायन करना पड़ा।

पैनल ने मस्जिद में हुए सर्वे के दौरान हरिहर मंदिर के ऐतिहासिक साक्ष्य मिलने की बात कही है, जिससे धार्मिक तनाव और भड़का साइट से अवैध हथियार और विदेशी निर्माण की वस्तुएं मिलने के दावे भी रिपोर्ट में दर्ज हैं। रिपोर्ट में प्रशासनिक कार्रवाई की समीक्षा की गई एफआईआर, चार्जशीट और अभियुक्तों की सूची जिसके अनुसार कुल 159 आरोपी चिह्नित हुए हैं। एसआईटी ने कुल 4,000 पन्नों की चार्जशीट फाइल की है। आयोग ने सिफारिश की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को सतर्कता और सामाजिक संवाद बढ़ाने की जरूरत है।

संभल हिंसा और डेमोग्राफिक बदलाव की रिपोर्ट में स्पष्ट दिखता है कि दंगों और भय के कारण क्षेत्र की सामाजिक संरचना तेजी से बदल गई है. हिंदू आबादी उल्लेखनीय रूप से घट गई है जबकि मुस्लिम समुदाय का अनुपात बढ़ा है. प्रशासनिक उदासीनता, तुष्टिकरण और बार-बार दंगों के पीछे योजनाबद्ध साजिश रिपोर्ट की प्रमुख चिंताएँ हैं. रिपोर्ट अब कैबिनेट को पेश होगी और उसके बाद विधानसभा में इस पर चर्चा संभव है. इस रिपोर्ट में जिन बिंदुओं को उठाया गया है उसको लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। विपक्ष का कहना है कि जनता की मूल समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस रिपोर्ट को लाया गया है।

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