सपा में काफी पुराना है महिला अपमान का सिलसिला

Samajwadi Party NayaLook

अजय कुमार

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा), जिसकी स्थापना मुलायम सिंह यादव ने की थी, उत्तर प्रदेश की राजनीति में नेताजी मुलायम सिंह यादव की तूती बोलती थी। लेकिन समय-समय पर इस पार्टी पर महिलाओं का सम्मान न करने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। यह सिलसिला मुलायम सिंह से लेकर अखिलेश यादव तक जारी है। महिलाओं का अपमान करने के तमाम आरोप न केवल पार्टी नेताओं के बयानों से उपजे हैं, बल्कि उनके कार्यों और नीतियों से भी जुड़े हैं। विपक्षी दल, खासकर भाजपा इन मुद्दों को उठाकर एसपी को महिला विरोधी करार देती रही है। समाजवादी पार्टी पर महिलाओं के अपमान के तमाम ऐसे आरोप लगे, जो समय-समय पर पार्टी की छवि को धूमिल करते रहे।

सबसे चर्चित उदाहरण 2014 का है, जब मुलायम सिंह यादव ने मोरादाबाद में एक रैली के दौरान बलात्कार के दोषियों को फांसी की सजा पर सवाल उठाते हुए कहा था, लड़के हैं, गलती हो जाती है। इस बयान ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया। मीडिया और महिला अधिकार संगठनों ने इसे महिलाओं के प्रति असंवेदनशील बताया, क्योंकि यह बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को गलती मानकर हल्का कर रहा था। मुलायम के इस बयान की वजह से सपा पर आरोप लगा कि पार्टी महिलाओं की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लेती। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे प्रो-रेपिस्ट रुख बताया, जिससे पार्टी की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा।

महिलाओं के अपमान को लेकर सपा के एक और प्रमुख नेता आजम खान भी विवादों में घिरे रहे हैं। 2019 में रामपुर लोकसभा चुनाव के दौरान, आजम ने भाजपा उम्मीदवार जया प्रदा पर अभद्र टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने खाकी अंडरवियर का जिक्र किया। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे अत्यंत अपमानजनक बताते हुए नोटिस जारी किया। इससे पहले, संसद में भाजपा सांसद रमा देवी पर भी आजम ने सेक्सिस्ट कमेंट किया, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी पड़ी। इन बयानों ने एसपी पर आरोप लगाया कि पार्टी के नेता महिलाओं को सम्मान नहीं देते और चुनावी फायदे के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

2017 के विधानसभा चुनावों में सपा पर और बड़ा आरोप लगा जब कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति पर बलात्कार का केस दर्ज हुआ। एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी ने प्रजापति पर गैंगरेप का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन एसपी पर आरोप था कि पार्टी ने आरोपी को संरक्षण दिया। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एसपी को बलात्कारियों का संरक्षक कहा, और महिलाओं की असुरक्षा का मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बना। हाल के वर्षों में भी ऐसे आरोप जारी हैं। 2024 में अयोध्या बलात्कार कांड में एसपी नेता मोइन खान पर 12 साल की बच्ची से बलात्कार का आरोप लगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसपी को महिलाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया, और पुराने बयानों का जिक्र किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि एसपी अपराधियों को बचाती है, जबकि एसपी ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। ये घटनाएं सपा की छवि को काफी प्रभावित करती रही हैं। परिणाम यह हुआ कि पार्टी ने जब महिलाओं के लिए योजनाएं चलाईं, जैसे स्त्री सम्मान समृद्धि योजना, लेकिन आरोपों ने उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। जब महिलाओं का सम्मान राजनीति का मूल होना चाहिए, तब ऐसे विवादों से समाज में असमानता बढ़ती है। सपा को इन आरोपों से सीख लेकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी, वरना राजनीतिक नुकसान जारी रहेगा।

बात आज के माहौल की कि जाये तो 2027 में जबकि सपा उत्तर प्रदेश की गद्दी पर काबिज होने का सपना देख रहे हैं तब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की लगातार बनती महिला विरोधी छवि ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को सोचने को मजबूर कर दिया है कि वह महिला स्वाभिमान के प्रति ज्यादा लचीला रूख अख्तियार करें। वर्ना 2027 के विधान सभा चुनाव में उनको महिला वोटरों से बड़ा झटका मिल सकता है। मुस्लिम वोट बैंक के चक्कर में जिस तरह से अखिलेश अपनी ही पार्टी की महिला नेताओं का न केवल अपमान बर्दास्त करते जा रहे हैं बल्कि विधायक पूजा पाल को पार्टी से निकाल कर आखिलेश ने यह भी साबित कर दिया है कि उनको यह भी अच्छा नहीं लगता है कि उनकी विधायक पूजा पाल जिसके विधायक पति राजू पाल की माफिया अतीक अहमद ने हत्या करा दी थी,वह अतीक के खिलाफ मुंह खोलें। उनको जिस महिला का सुहाग उजाड़ दिया गया उसका दर्द समझने की बजाये इस बात की चिंता हो रही है कि अतीक के खिलाफ पूजा पाल के विधान सभा के अंदर दिये गये बयान से मुस्लिम वोटर नाराज नहीं हो जायें,इस लिये बिना किसी कारण बताओ नोटिस दिये पूजा को पार्टीं से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इससे पूर्व अखिलेश ने अपनी सांसद पत्नी डिंपल यादव के अपमान पर भी अपना मुंह उस समय बंद रखा था जब डिंपल को एक मौलाना रशीदी ने नंगी कहकर संबोधित किया था।

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की चायल सीट से विधायक पूजा पाल का मुद्दा तब गरमाया जब सपा ने विधायक पूजा पाल को सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ करने के चलते उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया है. इस एक्शन को सपा नेता सही बता रहे हैं, तो बीजेपी ने अखिलेश को घेरना शुरू कर दिया है. बीजेपी इस प्रकरण को महिला-सुरक्षा और न्याय हुआ के रूप में पेश कर रही है.कुल मिलाकर पूजा पाल के रूप में बीजेपी को एक नया ब्रांड एंबेसडर और सपा के पीडीए का काउंटर प्लान मिल गया है.राजू पाल की हत्या के बाद सहानुभूति की जो लहर पूजा पाल के साथ बसपा से सपा की ओर शिफ्ट हुई थी, अब उसका सियासी लाभ बीजेपी भी उठाने की तैयारी में है. बीजेपी, सपा को ओबीसी विरोधी बताने में जुटी है. बीजेपी की रणनीति पूजा पाल के बहाने अखिलेश के सबसे बड़े विनिंग फॉर्मूले पीडीए की हवा निकालने की है. यूपी में पाल-बघेल जाति की पिछड़ों में अच्छी-खासी संख्या है, जो सपा के पीडीए की सियासी रीढ़ मानी जाती है. इस तरह बीजेपी अखिलेश यादव को पाल समाज का विरोधी बताने की कवायद करने में जुटी है।

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