प्रेमचंद की जयंती(31जुलाई) पर विशेष

  • आजादी के संघर्ष में लेखक का योगदान
  • आम लोगो की पीड़ा कहानी और उपन्यास मे
  • विद्रोह के स्वरो का चितेरा

 

डॉ ऋषि कुमार मणि त्रिपाठी- आजादी के पूर्व अंग्रेजो के शासन काल में या संस्कृत पाठशालाओं मे पढ़ाई थी,या परिषदीय विद्यालयो मे हिंदी मिडिल,उर्दू मिडिल चलता था। उच्च शिक्षा के लिए लंदन पढ़ने जाना पड़ता था। जहां कुछ ही धनवान संपन्न परिवारो के बच्चे जा पाते थे। धनपत राय भी इन्ही भारतीयो मे से। स्कूली शिक्षा पूरी कर राजकीय विद्यालय मे शिक्षक बने, बाद मे पदोन्नति कर एसडीआई बन गए थे। अंग्रेजो का खौफ था,सरकारी कर्मचारी हो या अधिकारी.. कुछ भी लिखते सरकारी अधिकारियो की नजरो से उसे गुजरना पड़ता था। दूसरी तरफ छोटे छोटे राजा थे उनकी रियासतें थी। बड़े राजा बहुधा अंग्रेजों के गुलाम थे। उनको राय बहादुर आदि की उपाधियो से नवाजा जाता था।
1918 मे अफ्रीका में प्रवासी भारतीयो को उनका हक दिलाने के लिए गांधी के सत्याग्रह की सफलता से प्रभावित होकर उनके भारत लौटने के बाद मोहनदास कर्म चंद गांधी को शीर्ष नेतृत्व ने आजादी की लड़ाई का नेतृत्व सौंप दिया। गांधी के आंदोलन अंग्रेजो को देखने मे महत्वहीन लगते। परंतु उसकी सफलता चौंकाने वाली होती। जिससे आम जनता पर तेजी से असर होरहा था। धनपत राय का युवा मन भी आंदोलन मे भाग लेने के लिए फड़फड़ाता, किंतु सरकारी नौकरी में यदि भनक भी मिल जाय कि किसी आंदोलन का समर्थन या भागीदारी की है तो नौकरी चली जाती। परिणाम स्वरूप धनपत राय ने छद्म नाम #प्रेमचंद रख कर कहानी और उपन्यास लिखना शुरू किया‌। गरीब मजदूर किसानों को व्यापारी या जमींदार व्याज पर पैसे देते,या काश्त कार की जमीन को गिरवी पर रख कर पैसे देते या बेंग पर बीज देते और फसल आने पर पैसे का व्याज या फसल की बेंग सहित वसूली करते थे। जमींदारो के आदमी व्याज वसूली या खेती का अनाज लेने मे या सरकार राजस्व वसूलने मे सख्ती बरतते। समय पर भुगतान न कर पाने पर प्रताड़ित करते थे। गिरवी पर रखी जमीन व्याज सहित मूलधन न चुका पाने पर हड़प लीजाती थी। यह दृश्य प्रेमचंद को व्यथित करता था। प्रेमचंद के छद्म नाम से धनपत राय कहानी और उपन्यास लिखने लगे।
कुछ वर्षों बाद ये कहानी ओर उपन्यास जमीदारों और अंग्रेज अफसरों को खटकने लगे। लेकिन लेखक कौन है,कहा से छपता है,पता नहीं लग पारहा था।
चौंकाने वाली बात तो यह थी कि इसके पूर्व राजा रानी पर किस्से कहानिया हुआ करते थे या पौराणिक कथाये होती थी। आम जनमानस की पीड़ा पर कहानियां लिखी जाने लगीं तो सचाई हो़ने के कारण लोगों मे दिनोदिन इसकी लोक प्रियता बढ़ने लगी।मुंशी प्रेम चंद की कहानियां और उपन्यास लोकप्रिय होने लगे तो लेखक का उत्साह भी बढ़ने लगा। इनकी लेखनी समाज की कुरीतियो को लेकर भी सक्रिय हुई। जिसम रचनात्मक सोच की झलक होती। कहानी संग्रह छपने‌ लगे और सेवा सदन ,गोदान ,गबन आदि उपन्यास भी काफी लोकप्रिय हुए। अंतत: एक दिन अंग्रेज अफसर को भनक लग ही गई। उसने इनको बुलाकर पूछताछ की । कुछ दिन तक ये चुप रहे पर महात्मागांंधी के प्रभाव मे आकर एक दिन इन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
मुंशी प्रेमचंद वाराणसी अंतर्गत लमही गांव के रहने वाले थे। किंतु बस्ती और गोरखपुर इनका कार्य क्षेत्र था। आज भी इसका उल्लेख राजकीय इंटर कालेज बस्ती और शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय गोरखपुर में है। इनके दो सुपुत्र श्रीपत राय ओर अमृत राय हुए।
इनकी जन्मतिथि 31जुलाई को वैचारिकक्रांति के संवाहक,उत्कृष्ट लेखक,मानवीय संवेदनाओं के चितेरे महान उपन्यासकार को सादर नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।

मुंशी प्रेमचंद-

“‘एक दिन मैं रात को घर में बैठा हुआ था,
मेरे नाम जिलाधीश का परवाना पंहुचा कि मुझसे अभी मिलो !
मैने बैलगाडी जुतवाई और चल दिया ।
साहब से मिला।
साहब के सामने > सोजेवतन < की एक प्रति रखी थी ,
मेरा माथा ठनका ।
उस वक्त मैं नवाबराय के नाम से लिखा करता था ।
यह तो मुझे मालूम था कि खुफियापुलिस इस किताब के लेखक की खोज में है।
साहब ने पूछा > यह किताब तुम्हारे द्वारा लिखी हुई है ?
मैने कहा > हां ,जी ।
साहब ने प्रत्येक कहानी का मतलब पूछा और फिर कहा कि >
>>यह तुम्हारा भाग्य है कि अंग्रेजी अमलदारी में हो , मुगलों का राज होता तो
तुम्हारे हाथ अभी काट दिये जाते ! तुमने अंग्रेजसरकार की तौहीन की है!<<<<
बात बढी ,
अन्त में लिख कर देना पडा कि जो भी लिखूंगा ,
आपसे अनुमति के बाद ही प्रकाशित कराऊंगा ।

उसके कुछ सालों बाद
गोरखपुर में महात्मागान्धी आये ,
महात्माजी के दर्शन का यह प्रताप था कि मुझ जैसा मरा आदमी भी चेत उठा!
दो-चार दिन बाद मैंने बीस साल की स्कूल-इंस्पैक्टरी से इस्तीफा दे दिया ।”

प्रेमचन्द’

(विस्तार के लिए देखें प्रेमचंद द्वारा लिखित ::जीवन सार कहानी)

Central UP Education

आर्थिक तंगी के बावजूद बेटी की उड़ान, चारू सक्सेना ने किया परिवार का नाम रोशन

92.2% अंक लाकर चारू सक्सेना ने रचा सफलता का नया अध्याय मेहनत, संस्कार और संकल्प: चारू सक्सेना की शानदार कामयाबी की कहानी विजय श्रीवास्तव राजधानी लखनऊ के साउथ सिटी स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल की कक्षा 10वीं की छात्रा चारू सक्सेना ने CBSE बोर्ड परीक्षा में 92.2% अंक प्राप्त कर अपने परिवार और स्कूल का नाम […]

Read More
Education homeslider National Purvanchal Uttar Pradesh

CBSE 10th Result 2026: डिजिलॉकर पर ऐसे चेक करें 10वीं का रिजल्ट, जानें आसान स्टेप्स

लखनऊ। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं का रिजल्ट आज यानी 15 अप्रैल 2026 को जारी कर दिया है। बोर्ड ने परिणाम को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया है। जिन छात्रों ने परीक्षा दी थी, वे अब अपना रिजल्ट cbse.gov.in और results.cbse.nic.in पर जाकर देख सकते हैं। इसके अलावा छात्र अपना परिणाम […]

Read More
Education

आर्थिक चुनौतियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच सरस्वती की मेहनत लाई रंग, बनीं जिले में सेकंड टॉपर

 संघर्ष से सफलता तक: सरस्वती बनीं जिले की सेकंड टॉपर, 78 प्रतिशत अंक हासिल कर रचा इतिहास पाली/राजस्थान। कठिन आर्थिक परिस्थितियों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और पढ़ाई में आए लंबे अंतराल के बावजूद 19 वर्षीय सरस्वती ने वह कर दिखाया, जो कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। एक साधारण ग्रामीण परिवार से आने वाली सरस्वती […]

Read More