जानिए ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह की  भूमिका एवं सभी 12 भावों में बुध ग्रह का क्या होता है प्रभाव

डॉ. उमाशंकर शास्त्री

ज्योतिष में बुध ग्रह को ग्रहों का राजकुमार माना जाता  है। बुध ग्रह सूर्य के सर्वाधिक निकट है। बुध ग्रह को बुद्धि का देवता गया है। सौरमंडल में सबसे छोटा ग्रह बुध है। बुध ग्रह को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है। बुध ग्रह सूर्य के सर्वाधिक निकट है। बुध ग्रह को बुद्धि का देवता गया है। यह दिस्वाभावक ग्रह है। काल पुरुष कुंडली में मिथुन व कन्या राशि पर बुध ग्रह का अधिकार है। यह कन्या राशि में उच्च के व मीन राशि में नीच के होते है। यह 15 अंशो पर परम उच्च और नीच का होता है। यह उत्तर दिशा का स्वामी है। सूर्य व शुक्र इसके मित्र हैं लेकिन मंगल और चंद्रमा से शत्रुता रखता है। बृहस्पति और शनि इसके सम ग्रह है। बुध महादशा 17 वर्ष की होती है। यह हरित वर्ण के हैं। बुध प्रभावित व्यक्ति हंसना,बोलना व मजाक करना पसंद करते हैं। नसों का कारक बुध है। बुध सफल व्यापार करने की क्षमता प्रदान करते हैं। बुध त्वचा का प्रतिनिधित्व करते हैं। बुद्ध ग्रहण करने की क्षमता है। बुध ग्रह व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में ढलने की कला देता है।

व्यापार,बहन,बुआ,अकाउंट,गणित,ज्योतिष विद्या बुध में ही निहित है। बुध ग्रह अपने गुणों के साथ-साथ जिस ग्रह के साथ बैठता है उसके भी फल प्रदान करता है। यह छोटा सा ग्रह है लेकिन तेज तर्रार ग्रह। राहु व मंगल इनकी राशियों के कारक व उच्च के होते हैं। सूर्य ग्रह का सबसे प्यारा बच्चा बुध है। ज्योतिष में 27 नक्षत्रों में से बुध को आश्लेषा,ज्येष्ठा,रेवती नक्षत्र का स्वामित्व प्राप्त है। ऐसे लोग जिनका बुध बली होता है,वे संवाद और संचार के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं। बुध से प्रभावित जातक हास्य विनोद प्रिय होते हैं। ऐसे लोग बुद्धिमान,कूटनीतिज्ञ और राजनीति कुशल होते है। इनकी शरीर में नसें साफ झलकती हैं। बुध ग्रह शिल्प कला व हुनर का पारखी बनाता है।

स्वग्रही होने पर कवि, मूल त्रिकोण में ऐश्वर्यशाली, मित्र ग्रह होने पर उन्नतशील तथा नीच राशि में बंधुओं का विरोधी व शत्रु राशि पर होने पर व्यभिचारी और दुखी बनाता है। बुध काव्य,पठन पाठन, लेखन कार्य, साहित्य सलाहकार ,पत्रकारिता, अकाउंटेंट, वकील आदि का द्योतक है। ये बहुत बोलने वाले होते हैं। खेलों में इनकी विशेष रूचि होती है। बुध एक तीव्र  चलने वाला ग्रह है। बुध प्रधान जातक त्वरित,जल्दी ग्रहण करने वाले व बौद्धिक रूप से प्रगतिशील होते हैं। बुध ग्रह को पुरुष व नपुसंक ग्रह मानते हैं। बुध के प्रभाव से व्यक्ति में हर कार्य को जल्दी करने की आदत देखी जाती है। बुद्ध मामा और मातृ कुल के संबंधों का भी कारक हैं। गोद ली हुई संतान बुध के अंतर्गत ही आती हैं। बुध ग्रह सूर्य के साथ ज्यादातर देखा गया है। यह सूर्य से या तो एक घर आगे या एक घर पीछे ही रहता है। बुध सूर्य के साथ अस्त अवस्था में ही रहते हैं लेकिन अस्त होने पर इनके प्रभाव में कोई ज्यादा विशेष अंतर नहीं होता है।

बुध ग्रह से बनने वाले योग बुध

बुध ग्रह से बनने वाले योग केंद्र त्रिकोण में विशेष फलदायक होते हैं। सूर्य बुध की युति बुधादित्य राज योग का निर्माण करती है। यदि दोनों ग्रह 10 डिग्री के अंदर है तो विशेष प्रभाव देखने को मिलते हैं। शुक्र-बुध की युति से लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होता है। यदि बुध ग्रह अच्छा होगा तो व्यक्ति कई भाषाओं का ज्ञाता हो सकता है । देखने में व्यक्ति अपनी वास्तविक उम्र से कम लगता है। यह आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं। ऐसे जातक अच्छे वक्ता तथा वाणिज्य और कारोबार में सफल होते हैं। बुध अच्छा होने पर कथावाचक और प्रवक्ता भी होते हैं। प्रथम भाव में बुध की स्थिति शुभ मानी गई है।

बुध ग्रह का 12 भाव में फल

प्रथम भाव में बुध की स्थिति शुभ मानी गई है। बुध को यहां पर दिग्बल बल प्राप्त हो जाता है। ऐसा जातक बुद्धिमान,विद्वान गणितज्ञ,कवि लेखक,ज्योतिषी हो सकता है। वह धर्म के अनुसार आचरण करता है तथा दयालु और परोपकारी भी होता है।

द्वितीय भाव में जातक पिता का आज्ञाकारी,बुद्धि से धनार्जन करता है। खाने पीने का बहुत शौकीन तथा विनोद प्रिय होता है।

तृतीय भाव में बुध मिलाजुला फल देता है। ऐसा जातक साहसी तथा कठोर परिश्रमी होता है। धार्मिक गुरुओं का आदर करने वाला होता है।

चतुर्थ भाव का बुध शुभ फलदायक होता है। जातक को अपार भौतिक सुख साधन दिलाता है। वह जातक को चतुर व बलवान भी बनाता है। यदि चतुर्थ भाव पापा क्रांत नहीं है तो जातक अपार धन संपदा अनेक मित्रों वाला होता है।

पंचम भाव में बुध शुभ फलदायक है। वह जातक को विवेकशील,काव्य प्रिय,विद्वान और कर्मकांडी बनाता है।

छठे भाव में बुध शुभ-अशुभ स्थिति के अनुसार अपना मिलाजुला फल देता है। जातक विद्वान,विनोदी परंतु विवाद प्रिय और चरित्रहीन होता है।

सप्तम भाव में बुध शुभ फलदायक होता है। जातक कलाप्रेमी होता है। जातक की पत्नी उच्चस्तरीय परिवार से संबंधित होती है। वह वस्त्रों एवं भोजन आदि का शौकीन होता है।

अष्टम भाव में बुध शुभ फलदायक है। जातक दीर्घायु प्रसिद्ध,धनवान,सत्यप्रेमी,राजा की तरह प्रभुता संपन्न और सेनापति जैसा होता है। जातक बड़े भूखंडों का स्वामी होता है।

नवम भाव में बहुत अच्छे फल देता है। वह जातक को कूटनीतिज्ञ,सदाचारी वक्ता,धर्म निष्ठ,धनवान,विद्वान बनाता है। संगीत, साहित्य धर्म आदि के प्रति रुचि रखने वाला तथा किसी भी क्षेत्र में सफलता अर्जित करने में सक्षम होता है।

दशम भाव में बुध शुभ फलदायक है। ऐसा जातक धनवान,बुद्धिमान,माता-पिता की सेवा करने वाला होता है। तथा जीवन में अनेक सफलताएं प्राप्त करता है। जातक की स्मरण शक्ति तीव्र होती है।

 एकादश भाव में बुध जातक की शास्त्रों के प्रति रुचि बढ़ाता है व जातक पवित्र कार्य करने वाला तथा अनेक स्रोतों से धन अर्जन करने वाला होता है।

 द्वादश भाव में बुध दूसरों की मदद में प्रसन्नता का अनुभव करने वाला तथा अपने वचन का पालन करने वाला होता है। अवसर का लाभ न उठा पाने वाला और उदासीन भी होता है।

बुध शिक्षा का कारक है अतः यह स्थिति शिक्षा के लिए अच्छी नहीं है इससे शिक्षाएं में बाधाएं आती हैं। बुध का रत्न पन्ना है,बुध ग्रह के अच्छे फल के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करें । गणेश जी की आराधना करें। तुलसी में दीपक जलाएं। और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी करना चाहिए

Religion

जिस माह की पूर्णिमा का जो होता है नाम, उसी से जाने गए हिंदू महीने

  डॉ. सौरभ मालवीय जानकर रह जाएंगे दंग कि वैज्ञानिक तरीके से कैसे हुआ महीनों की गणना भारतीय नववर्ष के साथ अनेक त्यौहार आते हैं। इनमें चैत्र शुक्लादि, नवरेह, गुड़ी पड़वा, उगादि, साजिबु नोंगमा पांबा अथवा साजिबु चेराओबा एवं चेटीचंड आदि सम्मिलित हैं। चैत्र शुक्लादि विक्रम संवत के नववर्ष के प्रारम्भ का प्रतीक है। इसे […]

Read More
Religion

मृत्यु के देवता यमराज की छोटी और न्याय देवता शनि की बड़ी बहन की जयंती आज

गंगा से कम पापों का नाश नहीं करती यमुना मैया, जानें पौराणिक महत्व भगवान सूर्य की पुत्री हैं यमुना, जिन्हें कहा जाता है भगवान कृष्ण की पटरानी राजेन्द्र गुप्ता, ज्योतिषी और हस्तरेखाविद यमुना जयंती का व्रत एवं पूजन करने से पापों का नाश का नाश होता है। चैत्र मास की शुक्लपक्ष की षष्ठी को यमुना […]

Read More
Religion

नवरात्रि मां भगवती के नौ रुप

((ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र-9415087711)) दिन 1 – शैलपुत्री शैलपुत्री (पर्वत की पुत्री), हिमालय पर्वत क्षेत्र के राजा हिमावत की पुत्री हेमवती (पार्वती) जो पिछले अवतरण में दक्षपुत्री सती थी। इस रूप में देवी को शिवजी की पत्नी के रूप में पूजा जाता है। इनका वाहन या सवारी वृषभ (बैल) है इसलिए वृषारूढा हैं। शैलपुत्री को […]

Read More