प्रो. त्रिपाठी को अमेरिका का अंतरराष्ट्रीय सेतु सम्मान-2023 दिए जाने की हुई घोषणा

  •  प्रो. त्रिपाठी राष्ट्रप ति के ओएसडी रह चुके हैं
  • दुनिया के सात लोग पाएंगे सेतु साहित्य सेवी सम्मान
  • पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय में बतौर चेयर प्रोफेसर सेवारत हैं प्रो. त्रिपाठी

 

आज़मगढ़। इस वर्ष सेतु साहित्य सम्मान-2023 की घोषणा की जा चुकी है। इस वर्ष का सेतु साहित्य उत्कृष्टता अवॉर्ड भारत गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति  के पूर्व विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) प्रो. कन्हैया त्रिपाठी को भी प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार पीट्सबर्ग अमेरिका के सेतु ग्रुप द्वारा साहित्य में उत्कृष्ट सेवा के लिए हर वर्ष दिया जाता है। इस वर्ष दुनिया के 7 साहित्यकारों को यह पुरस्कार दिया गया है। चयन समिति ने जिन नामों को चयन किया है उसमें संतोष श्रीवास्तव (भारत), सुकृता पॉल कुमार (भारत), संजीव सेठी (भारत), प्रीत नम्बियार (भारत), कन्हैया त्रिपाठी (भारत), धर्मपाल महेंद्र जैन (कैनेडा), जैक कैरअडग (संयुक्त साम्राज्य) का नाम शामिल है। इस पुरस्कार के संस्थापक सेतु के प्रधान संपादक अनुराग शर्मा व सुनील शर्मा हैं, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिका में रहकर साहित्य और खासकर हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आप सेतु अंतरराष्ट्रीय दैभाषी जर्नल का निरंतर प्रकाशन व संपादन कर रहे हैं।

निरंतर साहित्य की सेवा कर रहे प्रो. त्रिपाठी ने सेतु सम्मान प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और चयनकर्ताओं का आभार माना। उन्होंने कहा ऐसा होना किसी के लिए भी प्रसन्नता की बात होती है। सेतु एक अंतराष्ट्रीय स्तर का सुस्थापित पुरस्कार है यह कोई मामूली पुरस्कार नहीं है।

प्रो. त्रिपाठी मूलतः आज़मगढ़ के महेशपुर गांव के निवासी हैं। उन्होंने डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर/निदेशक के रूप में सेवा दी है और डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या में एडजंक्ट प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। वर्तमान में प्रो. त्रिपाठी पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा में डॉ. आंबेडकर मानवाधिकार एवं पर्यावरणीय मूल्य पीठ में चेयर प्रोफेसर के रूप में सेवा दे रहे हैं।

ज्ञातव्य हो कि प्रो. त्रिपाठी ने अब तक 40 से अधिक पुस्तकों का संपादन और लेखन का कार्य किया है और वह इसके पहले राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सृजनात्मक लेखन पुरस्कार और गांधी शांति प्रतिष्ठान का गांधी शांति नोबेल पुरस्कार-2020 के विजेता भी रह चुके हैं। देश-विदेश में लगातार साहित्यिक लेखन से वे जाने जाते हैं जिन्हें इस वर्ष का सेतु सम्मान प्रदान किया है। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि इस पुरस्कार ने निश्चय ही मुझे और अधिक जिम्मेदारी का बोध कराया है और हमारी जिम्मेदारी को बढ़ा दिया है। इस पुरस्कार की घोषणा के बाद पुरस्कार के संस्थापक अनुराग शर्मा व अनेक शुभचिंतकों ने प्रो. त्रिपाठी को सम्मान सहित बधाइयां प्रेषित की है। प्रो. त्रिपाठी ने इस पुरस्कार के संबंध में बात करते हुए कहा कि वर्ष 2023 जाते जाते हमें यह सम्मान देकर गया। मैं अपने शुभचिंतकों को नए वर्ष की शुभकामनाएं देता हूँ और यह कामना करता हूँ कि सभी के लिए वर्ष 2024 उनके सौभाग्य खोलकर कुछ न कुछ सहज स्मृति बनाए।

 

 

 

 

Analysis

आस्था से खिल्ली न करें ! संवेदना से फूहड़पन होगा!!

के. विक्रम राव  मान्य अवधारणा है की दैवी नाम केवल मनुष्यों को ही दिए जाते हैं। मगर सिलिगुड़ी वन्यप्राणी उद्यान में शेर और शेरनी का नाम अकबर और मां सीता पर रख दिया गया। भला ऐसी बेजा हरकत किस इशोपासक को गवारा होगी ? अतः स्वाभाविक है कि सनातन के रक्षक विश्व हिंदू परिषद ने […]

Read More
Analysis

स्मृति शेष : हिंदी के वैश्विक उद्घोषक, बहुत याद आयेंगे अमीन सयानी

संजय तिवारी (21 दिसंबर 1932 – 20 फरवरी 2024) विश्व में हिंदी के लोकप्रिय रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी अब नहीं रहे। अपनी आवाज में यादों का सागर छोड़ कर उन्होंने विदा ले ली है। उन्होंने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में प्रसिद्धि और लोकप्रियता हासिल की जब उन्होंने रेडियो सीलोन के प्रसारण पर अपने बिनाका गीतमाला कार्यक्रम […]

Read More
Analysis

गुलजार को मंडित करके विद्यापीठ ऊंचा हो गया!

के. विक्रम राव मुकफ्फा (अनुप्रास) विधा के लिए मशहूर सिख शायर, पाकिस्तान से भारत आए, एक बंगभाषिनी अदाकारा राखी के पति सरदार संपूरण सिंह कालरा उर्फ गुलजार को प्रतिष्ठित पुरस्कार देकर श्रेष्ठ संस्था भारतीय ज्ञानपीठ ने हर कलाप्रेमी को गौरवान्वित किया है। भारतीयों को इस पर नाज है। वस्तुतः हर पुरस्कार गुलजार के पास आते […]

Read More