कब मिलेगी कैदियों को जेल की सलाखों से आजादी!

  • फार्म-ए/नॉमिनल रोल व दयायाचिकाओं के सैकड़ों मामले लंबित
  • अमरमणि दंपति की रिहाई के बाद मामला सुर्खियो में
  • ओवरक्राउडिंग से मिलेगी प्रदेश की सेंट्रल जेलों को राहत

आरके यादव

लखनऊ। प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के फार्म-ए/नॉमिनल रोल और दया याचिकाओं को त्वरित निस्तारण कर दिया जाए तो करीब ढाई हजार कैदियों को जेल की सलाखों से मुक्ति मिल जाएगी। इस प्रक्रिया से प्रदेश की केंद्रीय कारागारों में ओवरक्राउडिंग की समस्या तो दूर होगी ही इसके साथ ही जेल अफसरों को जेलों में संचालन में भी मदद मिलेगी। समयपूर्व रिहाई को लेकर उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद प्रदेश की जेलों में से बड़ी संख्या में कैदियों को पहले भी रिहा किया जा चुका है। अमरमणि दंपति की दयायाचिका पर रिहाई का यह मामला सुर्खियों में है।

प्रदेश में सजायाफ्ता कैदियों को रखने के लिए वर्तमान समय में छह केंद्रीय कारागार हैं। इसमें केंद्रीय वाराणसी, केंद्रीय कारागार फतेहगढ़, केंद्रीय कारागार आगरा, केंद्रीय कारागार बरेली और केंद्रीय कारागार केंद्रीय कारागार नैनी (प्रयागराज) शामिल है। पिछले दिनों प्रदेश में इटावा जनपद में नई केंद्रीय कारागार का संचालन शुरू किया गया है। केंद्रीय कारागार में सजायाफ्ता कैदियों को रखे जाने का प्रावधान है। वर्तमान समय में केंद्रीय कारागार नैनी में सजायाफ्ता कैदियों के साथ विचाराधीन बंदियों को भी रखा जा रहा है। इसी प्रकार इटावा केंद्रीय कारागार में भी कुछ ऐसा ही आलम है। वर्तमान समय में प्रदेश की जेलों में करीब एक लाख बंदी निरुद्ध हैं। इसमें करीब 70 हजार विचाराधीन बंदी और करीब 30 हजार सजायाफ्ता कैदी बंद है।

सूत्रों का कहना है कि सजायाफ्ता कैदियों की समयपूर्व रिहाई के लिए शासन ने 14 से 16 साल की सजा  काट चुके कैदियों के लिए फार्म-ए/ नॉमिनल रोल और दयायाचिका के लिए आवेदन करने की व्यवस्था की है। इतनी सजा पूरी करने वाला कैदी समयपूर्व रिहाई के लिए फार्म-ए/नॉमिनल रोल और दया याचिका के माध्यम से रिहाई की गुहार लगा सकता है। आवेदन करने वाले कैदियों का यह आवेदन जेल से कैदी के गृहजनपद जाता है। वहां से डीएम और एसपी की रिपोर्ट के बाद यह आवेदन आईजी जेल के पास आता है। आवेदन की पड़ताल के बाद इसको कैदी की रिहाई के लिए शासन के पास भेजा जाता है। औपचारिक कार्यवाही के बाद कैदी को रिहा किए जाने का प्रावधान है।

सूत्र बताते है कि वर्तमान समय में प्रदेश की जेलों में करीब ढाई हजार कैदी ऐसे है। जिनका फार्म-ए, नॉमिनल रोल और दयायाचिकाएं लंबित पड़ी हुई है। समयपूर्व रिहाई के लिए लंबित पड़े इन आवेदनों पर यदि मुख्यालय और शासन स्तर पर त्वरित कार्यवाही की जाए तो प्रदेश की जेलों में करीब दो से ढाई हजार कैदियों को जेल की सलाखों से मुक्ति मिल जाएगी।  इस कार्रवाई से जेलों को ओवरक्राउडिंग की समस्या से राहत मिलेगी। इसके अलावा प्रदेश की जेलों में करीब सौ से सवा सौ कैदी ऐसे भी है जिन्होंने 20 साल की सजा काट ली है। एक दिन पहले अमरमणि दंपति की दयायाचिका पर हुई रिहाई का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। इस संबंध में जेल मुख्यालय के डीआईजी जेल एके सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि प्रक्रिया थोड़ी लंबी जरूर है लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर कैदियों की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया लगातार चल रही है।

प्रभारी अधिकारी को नहीं मालुम जेलों में कितने कैदी

प्रदेश के जेल मुख्यालय में ऐसे अधिकारियों को विभाग का प्रभारी अधिकारी बना दिया गया जिन्हे विभाग के संबंधित विषयों की जानकारी नहीं है। जेल मुख्यालय के प्रोबेशन विभाग के प्रशासनिक अधिकारी राजीव गंगवार से जब यह जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की गई कि प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के फार्म-ए/नॉमिनल रोड और दयायाचिका के कितने मामले लंबित है। इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वर्तमान समय में प्रदेश की जेलों में कितने सजायाफ्ता कैदी निरुद्ध है। इसका जवाब देने से भी उन्होंने इनकार कर दिया। डीजी पुलिस/आईजी जेल एसएन साबत ने इस ऊहापोह की स्थिति को संख्या बताकर खत्म कर दिया।

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