नेपाल और चीन में BRI पर तकरार के बाद, अचानक काठमांडू आ रहे अमेरिकी ‘चाणक्‍य’

उमेश तिवारी


काठमांडू । नेपाल और चीन में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर तकरार जारी है। चीन का दावा है कि उसने पोखरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा समेत कई परियोजनाओं को बीआरआई के अंतर्गत बनाया है। वहीं, नेपाल इस दावे से साफ इनकार कर रहा है। इस बीच अमेरिकी चाणक्य कहे जाने वाले सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू 14 जुलाई को एक दिवसीय दौरे पर काठमांडू पहुंच रहे हैं। हालांकि, अमेरिका और नेपाल ने उनकी यात्रा की अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं की है। डोनाल्ड लू वही अमेरिकी नेता हैं, जिन पर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने उनकी सरकार को गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। डोनाल्ड लू दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री हैं।

14 जुलाई को नेपाल पहुंचेंगे डोनाल्ड लू

काठमांडू पोस्ट ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया है कि अपने दक्षिण एशियाई दौरे के हिस्से के रूप में डोनाल्ड लू काठमांडू की बहुत छोटी यात्रा पर आ रहे हैं। वह भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका समेत अन्य देशों का भी दौरा करेंगे। लू 14 जुलाई को काठमांडू में उतरेंगे और यहां कुछ घंटे बिताएंगे। दूतावास के अंदर और बाहर उनकी नियमित राजनीतिक बैठकें होंगी, लेकिन उनका कोई खास एजेंडा नहीं है। वह इस क्षेत्र की यात्रा कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि वह प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल, विदेश मंत्री एनपी सऊद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ राजनीतिक नेताओं से मुलाकात करेंगे जिनकी पुष्टि अभी बाकी है।

चीनी नेताओं के दौरे के बीच पहुंच रहे अमेरिकी ‘चाणक्य’

डोनाल्ड लू का नेपाल दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब चीनी नेताओं के उच्च स्तरीय यात्राएं बढ़ रही हैं। लू पहले भी दो बार काठमांडू का दौरा कर चुके हैं। वह आखिरी बार नवंबर 2021 में मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन को नेपाली संसद की बिना किसी देरी के मंजूरी दिलाने का अनुरोध करने काठमांडू आए थे। उन्होंने यह दौरा ऐसे समय किया जब एमसीसी नेपाल कॉम्पैक्ट का एक राजनीतिक मुद्दा बन गया था। तब उन्होंने तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी ओली और सीपीएन (माओवादी केंद्र) अध्यक्ष पुष्प कमल दहाल से मुलाकात की और उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि यह समझौता 28 फरवरी की समय सीमा के भीतर संसद से पारित हो जाना चाहिए।

नेपाल को कई बार धमका चुके हैं डोनाल्ड लू

हालांकि, इसके बाद भी नेपाली संसद से मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन प्रोग्राम को मंजूरी नहीं मिली थी। ऐसे में लू ने 10 फरवरी 2022 को ऑस्ट्रेलिया से देउबा, ओली और दहाल को फोन किया और धमकी दी कि अगर 28 फरवरी तक समझौता पारित नहीं हुआ तो वाशिंगटन नेपाल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करेगा। 1947 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से यह अमेरिका द्वारा नेपाल को दिया गया सबसे कड़ा और स्पष्ट संदेश था। ऐसे में भारी दवाब के बीच डेडलाइन के ठीक एक दिन पहले 27 फरवरी 2022 को नेपाली संसद ने अमेरिकी सौदे को मंजूरी दे दी। इसके बाद जुलाई में नेपाल के अमेरिकी राज्य भागीदारी कार्यक्रम (SPP) का हिस्सा बनने से इनकार करने के बाद लू ने फिर से काठमांडू का दौरा किया।

SPP प्रोग्राम को लेकर भी नेपाल को दिया था न्योता

अमेरिका का राज्य भागीदारी कार्यक्रम (SPP) एक तरह का सुरक्षा गठबंधन है। ऐसे में नेपाल ने किसी भी सुरक्षा या सैन्य गठबंधन में शामिल न होने की अपनी नीति पर कायम रहते हुए इससे दूर करने का फैसला किया। अमेरिका ने इस कार्यक्रम को प्रशांत महासागर से लेकर भारतीय उपमहाद्वीप तक फैले देशों के लिए खास तौर पर लॉन्च किया है। लू ने पिछले साल जुलाई में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, तत्कालीन विदेश मंत्री नारायण खड़का से मुलाकात की थी लेकिन एसपीपी से दूर रहने के नेपाल के फैसले का उल्लेख या चर्चा नहीं की थी।

प्रचंड के PM बनने के बाद पहली बार आ रहे हैं लू

पिछले साल दिसंबर में पुष्प कमल दहाल के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद लू की आगामी यात्रा काठमांडू की पहली यात्रा होगी। लेकिन अमेरिका के राजनीतिक मामलों की उप विदेश मंत्री विक्टोरिया नूलैंड समेत कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने जनवरी में काठमांडू का दौरा किया था। उनके जाने के तुरंत बाद, यूएसएआईडी (USAID) की प्रमुख सामंथा पावर और दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो (SCA) में उप सहायक सचिव आफरीन अख्तर ने काठमांडू का दौरा किया और नेपाल के राजनीतिक नेतृत्व, वरिष्ठ अधिकारियों, नागरिक समाज और व्यापारिक समुदाय से मुलाकात की।

प्रचंड ने CIA  चीफ को नहीं दी थी आने की अनुमति

इस साल फरवरी में नेपाल सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के प्रमुख विलियम्स बर्न्स को काठमांडू जाने से रोक दिया था। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि बर्न्स 15 फरवरी को काठमांडू में उतरना चाहते थे और अगले दिन निकलना चाहते थे, लेकिन प्रधानमंत्री दहाल के सीधे हस्तक्षेप से यात्रा रोक दी गई। सूत्रों के अनुसार, चीन बर्न की नेपाल की योजनाबद्ध यात्रा से खुश नहीं था। ऐसे में प्रचंड ने चीन से बैर लेने की जगह बर्न्स की यात्रा को ही रद्द कर दिया। अब लू ऐसे समय में काठमांडू पहुंच रहे हैं जब एमसीसी कॉम्पैक्ट को लागू करने की तारीख नजदीक आ रही है।

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