#sage disguised

Litreture

बहुत गहरी और सच्ची कविता

धीरे धीरे मैने जीवन जान लिया। रंग बदलती दुनियां को पहचान लिया।। सत्ता बदली शासन बदली… बदल गए इंसान। जिसको देव समझ बैठा था वे निकले हैवान।। घोर निराशा हुई मगर पहचान लिया। सब कुछ मेरा भ्रम था मैने जान लिया।। साधु वेष धारण कर रावण आया था। जनक नंदिनी ने भी धोखा खाया था।। […]

Read More