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नवरात्रि पर विशेष कविता : शिव की शक्ति बनी नव दुर्गा
त्रिभुवन की रक्षा करती। दंडित कर आसुरी शक्तियों को जग मे मंगल करती।।१।। आओ कालरात्रि जगतारिणि गौरी उमा महामाया। महालक्ष्मी महासरस्वति तू ही दुर्गा जग माया।।२।। चंड मुंड ही विविध रूप धरि। शुभ निशुंभ सभी घेरे। रक्त बीज संग महिषासुर ये मुझको महाजाल घेरे।।३।। कभी रोग बन कभी शोक बन कभी क्लेश बन युद्ध करे। […]
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