Lucknow: देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और कारोबारियों के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। GST से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव, छोटे कारोबारियों को राहत, रिफंड में तेजी और कर संबंधी नोटिसों की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। इसी क्रम में लखनऊ में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग की ओर से ‘सहज कर संवाद’ संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें व्यापारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों ने GST के नए सुधारों और उनकी व्यावहारिक उपयोगिता पर चर्चा की।
गोमती नगर के विभूति खंड स्थित अप्रत्यक्ष कर भवन में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता CGST लखनऊ के प्रधान आयुक्त ने की। इसमें ASSOCHAM, FICCI और IIA जैसे औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। यह संगोष्ठी GST काउंसिल की 57वीं बैठक के बाद आयोजित की गई। आठ अक्टूबर 2026 को हुई इस बैठक में GST प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की गई। केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन सुधारों का मकसद कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम करना, रिफंड में तेजी लाना और कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाना है।
GST के 10 बड़े बदलाव, जिनसे कारोबारियों को मिल सकती है राहत
GST में गिरफ्तारी के प्रावधान हटाने की सिफारिश
GST काउंसिल ने GST कानून के तहत गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों को हटाने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य कारोबारियों को कर संबंधी मामलों में अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई की आशंका से राहत देना है। हालांकि, इसे सभी मामलों में गिरफ्तारी पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं समझना चाहिए। इसके लिए कानून में जरूरी संशोधन और लागू निर्देश महत्वपूर्ण हैं।
ई-वे बिल की जांच में मनमानी पर लगेगी रोक
माल परिवहन के दौरान ई-वे बिल की जांच को लेकर भी अहम सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। अब केवल अधिकृत अधिकारी और दर्ज किए गए उचित कारणों के आधार पर ही वाहनों को जांच के लिए रोका जा सकेगा। इसके अलावा, जिस राज्य में न तो माल भेजने वाला और न ही माल प्राप्त करने वाला कारोबारी स्थित है, वहां के अधिकारियों को सामान्य परिस्थितियों में माल रोकने या जब्त करने का अधिकार नहीं होगा। हालांकि, ई-वे बिल या जरूरी दस्तावेज नहीं होने जैसी स्थितियों में कार्रवाई का प्रावधान बना रहेगा।
10 हजार रुपये से कम कर राशि पर नहीं जारी होगा नोटिस
छोटे कर विवादों को कम करने के लिए 10,000 रुपये से कम कर राशि वाले मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी नहीं करने का प्रावधान सामने आया है।
इसका उद्देश्य छोटी रकम से जुड़े मामलों में अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई का बोझ कम करना है। PIB की जानकारी में इस राहत के साथ लंबित नोटिस और अपीलों के निपटारे का भी उल्लेख किया गया है।
स्वैच्छिक टैक्स भुगतान पर पेनल्टी में राहत
GST काउंसिल ने स्वैच्छिक कर भुगतान करने वाले कारोबारियों के लिए भी राहत की सिफारिश की है। निर्धारित समय में टैक्स और ब्याज का भुगतान करने पर पेनल्टी के स्थान पर चार्ज की व्यवस्था तथा कुछ मामलों में कम पेनल्टी का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
इसका मकसद कारोबारियों को अपनी कर संबंधी गलतियां सुधारने और समय पर बकाया जमा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया होगी आसान
GST रजिस्ट्रेशन में कागजी कार्रवाई और अधिकारियों के हस्तक्षेप को कम करने पर जोर दिया गया है। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों की स्पष्ट सूची, बेहतर ऑनलाइन फॉर्म और पोर्टल पर आसान दिशा-निर्देश उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है।
कुछ श्रेणियों में रजिस्ट्रेशन संबंधी बदलावों को स्वतः स्वीकार करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे व्यापारियों को बार-बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दायरा बढ़ाने पर जोर
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC कारोबारियों के लिए GST व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत पात्र कारोबारी खरीद पर चुकाए गए GST का क्रेडिट प्राप्त कर सकते हैं। काउंसिल ने ITC और उससे जुड़े रिफंड की पात्रता को व्यापक बनाने तथा रिटर्न में होने वाली गलतियों को सुधारने के लिए नए सिस्टम की सिफारिश की है। इससे कारोबारियों के नकदी प्रवाह और कार्यशील पूंजी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
विदेशी शाखाओं से जुड़ी सेवाओं के निर्यात के नियम आसान
विदेशों में शाखा, कार्यालय या प्रतिनिधि संस्थान के माध्यम से सेवाएं देने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी राहत की बात सामने आई है। GST काउंसिल ने निर्धारित शर्तों के अधीन ऐसी सेवाओं को निर्यात का दर्जा देने से जुड़े नियमों को आसान बनाने की सिफारिश की है। इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को लाभ मिल सकता है।
GST रिटर्न फाइलिंग में बढ़ेगा ऑटोमेशन
GST रिटर्न दाखिल करते समय टैक्स देनदारी और ITC के आंकड़ों में अंतर आने से कारोबारियों को कई बार नोटिस और स्पष्टीकरण का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को कम करने के लिए GSTR-1, GSTR-1A और GSTR-3B के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा ऑनलाइन सुधार की व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की गई है। प्रस्तावित बदलाव अप्रैल 2027 के रिटर्न से लागू करने की योजना है।
GST रिफंड की प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी
कारोबारियों की कार्यशील पूंजी का बड़ा हिस्सा कई बार GST रिफंड में फंस जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए रिफंड प्रक्रिया को अधिक स्वचालित और तेज बनाने की सिफारिश की गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ पात्र मामलों में रिफंड सिस्टम के माध्यम से स्वीकृत होगा। जीरो रेटेड सप्लाई और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़े पात्र रिफंड मामलों में जोखिम आकलन के आधार पर 90 फीसदी तक राशि जारी करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
छोटे कारोबारियों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं को राहत
GST सुधारों में छोटे कारोबारियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सामान बेचने वालों को भी शामिल किया गया है। काउंसिल ने कुछ निर्धारित शर्तों के तहत छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए सरल रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की सिफारिश की है। इससे दूसरे राज्यों में कारोबार करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर व्यवसाय स्थापित करने की बाध्यता कम हो सकती है।
लखनऊ की संगोष्ठी में कारोबारियों ने रखीं समस्याएं
‘सहज कर संवाद’ कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विभाग और व्यापारिक समुदाय के बीच सीधा संवाद स्थापित करना रहा। संगोष्ठी में कारोबारियों ने GST रिफंड, ई-वे बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट, पेनल्टी और रिटर्न फाइलिंग जैसी प्रक्रियाओं से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की। औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी कारोबार को आसान बनाने और कर प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़े सुझाव रखे। अधिकारियों ने GST व्यवस्था में हो रहे सुधारों और उनके उद्देश्यों की जानकारी साझा की।
क्या GST के सभी नए नियम लागू हो चुके हैं?
कारोबारियों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि GST काउंसिल की सिफारिश, सरकार की घोषणा और कानून में लागू बदलाव तीन अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। 57वीं GST काउंसिल की बैठक में कई महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की गई है। कुछ प्रक्रियाओं के लिए CBIC ने निर्देश और स्पष्टीकरण भी जारी किए हैं, जबकि कुछ बदलावों के लिए नियमों और कानून में संशोधन की आवश्यकता है। इसलिए कारोबारियों को किसी भी नई छूट, पेनल्टी या टैक्स संबंधी प्रावधान का लाभ लेने से पहले CBIC और GST पोर्टल पर जारी आधिकारिक अधिसूचनाओं की जांच करनी चाहिए।
कारोबारियों के लिए क्यों अहम है यह पहल?
GST व्यवस्था में पारदर्शिता और सरलता से छोटे व्यापारियों, MSME सेक्टर, उद्योगों और सेवा प्रदाताओं को फायदा मिल सकता है। रजिस्ट्रेशन आसान होने, रिफंड जल्दी मिलने और अनावश्यक नोटिस कम होने से कारोबारियों का समय और संसाधन बच सकते हैं। लखनऊ में आयोजित ‘सहज कर संवाद’ संगोष्ठी इसी दिशा में विभाग और व्यापार जगत के बीच संवाद मजबूत करने की पहल है। यदि प्रस्तावित सुधार प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो देश में कारोबार करना पहले से अधिक आसान हो सकता है।
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
फैटी लिवर का बढ़ रहा है खतरा! ज्यादा चीनी, जंक फूड और फैट से रहें सावधान
भारत-नेपाल सीमा पर पिकअप गाड़ी से 75 बोरी कद्दू का बीज बरामद, चालक गिरफ्तार
