गोमाता की रक्षा के लिए बने कानून : जगद्गुरु शंकराचार्य

काशी में  संस्कृति संसद 2026 का भव्य शुभारंभ

सनातन धर्म को षड्यंत्रों से बचाएगा संत समाज : रविंद्रपुरी

विशेष संवाददाता

Varanasi:  सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति के उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष एवं ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती  महाराज ने कहा कि सनातन धर्म एवं संस्कृति को धर्म विरोधियों के हमलों से बचाने के लिए संस्कृति संसद का आयोजन आवश्यक है। गोमाता भारतीय संस्कृति की आधार हैं, इसलिए गोमाता की रक्षा के लिए कानून बनना जरूरी है। इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि भारत में संत समाज ने सदा ही धर्म की रक्षा की है और आगे भी सनातन धर्म की रक्षा करेगा।

जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर एवं संस्कृति संसद के प्रथम उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती महाराज ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संस्कृति संसद के संत वक्ताओं जो विचार रखें उन पर अमल करने की आवश्यकता है। इन विचारों से स्पष्ट है कि सनातन धर्म एवं संस्कृति पर चतुर्दिक हमले हो रहे हैं, इससे रक्षा के लिए संस्कृति संसद जैसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हिंदूविरोधी कानूनों में भी परिवर्तन आवश्यक है। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में गो, गंगा, गीता महत्वपूर्ण है। गो अर्थात गाय हमारी संस्कृति का आधार है, इसकी रक्षा के लिए 1962 में करपात्री महाराज के नेतृत्व में  आंदोलन हुआ। तत्कालीन सरकार की हिंसा के कारण करपात्री  की एक आंख की रोशनी चली गई, किसी तरह उनके प्राण बचे। वर्तमान में गोमाता की रक्षा के लिए कानून होने चाहिए। उन्होंने इस सन्दर्भ में बनाने के लिए समाज और सरकार से निवेदन किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म पर हो रहे चतुर्दिक हमलों से हिंदू समाज को बचाने की आवश्यकता है।

अध्यक्ष अखाड़ा परिषद् रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् और अखिल भारतीय सन्त समिति का प्रयास है कि देश में सन्त समाज एकजुट होकर भारतीय संस्कृति की रक्षा में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारा प्रयास था कि संपूर्ण भारत का सन्त समाज एक मंच पर उपस्थित हो। वह कार्य संस्कृति संसद के माध्यम से पूरा हुआ और इसमें पूरे देश के सभी पंथों के सन्तों की भागीदारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को सन्त ही बचा सकते हैं और अतीत में सन्तों ने ही भारतीय संस्कृति की रक्षा की। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि संत समाज सनातन धर्म पर हो रहे हर षड्यंत्र से बचाने के लिए हम तैयार हैं।

अखिल भारतीय सन्त समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामन्त्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती  महाराज ने कहा कि वर्तमान में अनेक षड्यंत्र हो रहे हैं। इस समय भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के खिलाफ संघर्ष का अखाड़ा दिल्ली बन गई है। कुछ व्यक्ति एवं संगठन लोकतंत्र में जनता नहीं जंतर-मंतर के रास्ते सत्ता बदलने का कुचक्र कर रहे हैं। यह सब इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें सनातन और संस्कृति की रक्षा के लिए काम करने वाली सरकार अच्छी नहीं लग रही है। उन्होंने कहा कि सन्तों को इस सच्चाई को समझना चाहिए तथा संस्कृति एवं धर्म विरोधी शक्तियों के विरुद्ध कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि Gen- Z के नाम पर युवकों को बांटने का कार्य हमारे समाज के अनुरुप नहीं है। सन्त समाज भारतीय युवकों से निवेदन करता है कि वे समाज और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दें।

विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक दिनेश ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने ऐसे-ऐसे कानून बनाए, जिससे कि भारतीय हिंदू समाज और परिवार की भावना तार-तार हो रही है। उन्होंने कहा कि UGC कानून, समाज को जातियों में बांटने वाले कानून, लिव-इन-रिलेशनशिप, आदि कानूनों के साथ-साथ पिता की संपत्ति में बालिकाओं की भागीदारी से उपजा भाई-बहन विवाद मुख्य है, जिस पर हम आगे निर्णय लेंगे तथा इन कानूनों को बदलने की जरूरत है। हम इसके लिए कार्य करेंगे तथा सरकार पर दबाव भी बनाएंगे।

विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक  ने कहा कि वर्तमान में हिंदुओं की संख्या घट रही है तथा मुस्लिमों की बढ़ती जनसंख्या एक नया असंतुलन पैदा कर रही है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि धर्मांतरण की चुनौती आज भी बढ़ी है। वर्तमान समय में मंचों से राम, शिव एवं कृष्ण पर भी आपत्तिजनक विचार व्यक्त किए जा रहे हैं। इसलिए आवश्यक है कि समाज में सन्त समुदाय लोक जागरण करें, जिससे कि भारत में सनातन धर्म एवं संस्कृति की रक्षा हो सकें।

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कथावाचक आचार्य सुधांशु महाराज ने कहा कि वर्तमान में बहुत सजग रहकर सनातन धर्म के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने सात लाख से अधिक गुरुकुलों को बंद कराया। हमें वर्तमान में उससे अधिक गुरुकुलों की स्थापना करनी है। उन्होंने कहा कि इस समय सनातन एवं संस्कृति की रक्षा के लिए गुरुकुलों के साथ-साथ संस्कार केंद्रों की आवश्यकता है। सन्त समाज से निवेदन है कि वह इस कार्य में अपनी सजग भूमिका निभाए। उन्होंने Gen Z के संदर्भ में कहा कि Gen Z से भारत के युवाओं की पहचान नहीं होती। युवा का संतोष समाज एवं व्यवस्था को सजग करने के लिए आवश्यक है, इसलिए युवकों के प्रतीक विरोध को नकारात्मक रुप में न लेकर, सहयोगी रुप में देखना चाहिए।

आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील देवधर ने कहा कि 1914 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध लोकसभा चुनाव में लड़ रहे अरविंद केजरीवाल के समर्थन में वामपंथी साहित्यकार एवं कलाकार तथा राष्ट्र विरोधी शक्तियों ने काशी में अपना षड्यंत्र प्रारंभ किया। उन्हीं राष्ट्र विरोधी शक्तियों के प्रयासों को विफल करने के लिए संस्कृति संसद की शुरुआत हुई और वह वर्तमान में भी जारी है। उन्होंने कहा कि आज संस्कृति संसद प्रासंगिता और भी बढ़ी है, क्योंकि देश में भारतीय संस्कृति एवं धर्म पर हमले किए जा रहे हैं और जंतर-मंतर उनका केंद्र बन गया था। उन्होंने कहा कि युवकों को भ्रमित नहीं होना है तथा उन्हें राष्ट्र के विकास के लिए कार्य करना है।

आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्जवल के साथ हुआ। मंचासीन संतों का माल्यार्पण कर स्वागत सर्वश्री सुनील देवधर, प्रो. अरविंद जोशी, प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन सन्त समिति के कोषाध्यक्ष जनार्दन हरि ने किया। इस दौरान मंच पर अध्यक्ष भारतीय सन्त समिति के अध्यक्ष कैवल्य पीठाधीश्वर जगद्गुरु अविचलदेवाचार्य महाराज, विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय, सन्त समिति के संयुक्त महामन्त्री महामंडलेश्वर मनमोहन दास ‘राधे-रोध बाबा’, काशी विद्वत् परिषद् के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, काशी विद्वत् परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. रामचंद्र पांडेय, काशी विद्वत परिषद् के महामन्त्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी आदि उपस्थित थे। संस्कृति संसद में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख पंथों के लगभग 1500 संत, महामंडलेश्वर, आचार्य सम्मिलित हुए। सत्र के अंत में संस्कृति पर्व पत्रिका का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा हुआ।

आकर्षक है देश-विदेश के कलाकारों की पेंटिंग एवं छाया चित्र प्रदर्शनी

कला और संस्कृति के विविध रंगों से सजी प्रदर्शनी में देश-विदेश के कलाकारों की कलाकृतियां एवं फोटो आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसमें पद्मश्री दुलारी देवी की बनाई मधुबनी पेंटिंग और पद्मश्री श्याम शर्मा की ओर से बनाई गई। हनुमान की पेंटिंग विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। प्रदर्शनी में काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी कैनवास पर उकेरा गया है। काशी के घाटों पर आधारित तीन पेंटिंग, महादेव के विभिन्न स्वरूपों पर पेंटिंग और काशी के अलग-अलग दृश्यों पर आधारित सात पेंटिंग लगाई गई हैं। इसके अलावा एक मिथिला पेंटिंग और महाकुंभ से जुड़ी तीन कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। अशोक सिंघल की पेंटिंग कलाकार अंचल चैधरी ने बनाई है। इस कला प्रदर्शनी में सम्मिलित फोटो हिंदू धर्म, संस्कृति और समाज जीवन पर आधारित हैं। प्रदर्शनी में थाईलैंड के रुबेन तस्मार, अमेरिका के डॉ. वेनिडेक्टो रियार्स और एरिन ब्रिडेन ब्रिक तथा तुर्की की देरेया अजार अस्ता सेवर के फोटो सम्मिलित है।

कार्यक्रम स्थल रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के प्रवेश द्वार एवं प्रमुख स्थानों पर कलात्मक रंगोली के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं को प्रस्तुत किया गया है। उक्त रंगोली का निर्माण निहारिका, श्रुति, आरती, पलक, नंदिनी, खुशी, प्रियांशी, नीतू, दिशा, अंशिका, अंकिता, अनामिका, इशिका, जया, कविता और मानवेंद्र ने किया है।

जेन-जी कॉन्क्लेव Gen Z का विचार

युवाओं को बांटने वाला अमेरिकी षड्यंत्र

समाज व सरकार समझे युवाओं की चिंता

काशी में आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति संसद-2026 के अंतर्गत जेन जी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में आयोजित इस समानांतर कार्यक्रम में युवा वक्ताओं ने कहा कि Gen Z का विचार पूरी तरह से अमेरिकी षड्यंत्र है। उनकी दृष्टि से भारत के युवाओं को समझा नहीं जा सकता। जेन जी के अमेरिकी दृष्टि में जहां युवाओं को कुछ वर्षों की अवधि में बांटकर खंडित दृष्टि से देखता है। जबकि भारतीय दृष्टि में युवा नहीं, केवल एक देश नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक कुटुंब है, जिसको वेदों में हजारों वर्ष पहले वसुधैव कुटुंबकम् कहा गया है।

Gen Z कॉन्क्लेव के प्रथम सत्र में जेन जी की छवि और युवाओं की सामाजिक भूमिका पर चर्चा करते हुए डॉ. दीपक प्रधान ने कहा कि सोशल मीडिया के नाते विश्व के युवाओं के साथ भारतीय युवाओं में भी नवीन व्यवहार आए हैं। सोशल मीडिया के कारण बने नए नेटवर्क से युवा पेपर लीक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े आंदोलनों में जेन जी अथवा भारत का युवा शामिल हुआ लेकिन वह यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, इटली, जर्मनी आदि जैसा हिंसक नहीं हुआ। वरन् अहिंसक रुप से अपने विरोध को प्रस्तुत किया। इससे यह दर्शाता है कि भारत का युवा भारतीय संस्कृति और विरासत के अनुरुप आज भी अपना व्यवहार कर रहा है। इसी क्रम में बनारस घराने के कथक नृत्यकार विशाल कृष्ण ने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा के कारण कलाएं जीवित हैं तथा जेन-जी कलाकर अनुशासन में रहकर अपने भावों को व्यक्त करता है। वह उग्र और हिंसक नहीं होता, इसके पीछे भारतीय संस्कृति मुख्य कारण है।

दिल्ली सेंट्रल यूनिवर्सिटी की इशू मौर्य ने कहा कि भारत का Gen Z वर्तमान में आंदोलित दिखाई पड़ता है लेकिन वह हिंसक नहीं है। सोशल मीडिया के इस दौर में Gen Z (युवाओं) को सावधानी की आवश्यकता है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि हर घटना पर अपने विचार न दें, बल्कि विश्वसनीय सूचनाओं पर ही प्रतिक्रिया दें और अमल करें। इसी क्रम में Gen Z वक्ता भागेशजी ने कहा कि युवाओं में असीमित क्षमता है। वे उसका उपयोग सामाजिक निर्माण एवं राष्ट्र की उन्नति में लगाएं। छोटी-छोटी समस्याओं पर आंदोलित होकर अपनी ऊर्जा को समाप्त न करें। इन्होंने यह भी कहा कि सरकार और समाज को Gen Z ही नहीं समस्त युवाओं की समस्याओं पर भी विचार करना चाहिए, जिससे कि उनमें असंतोष कम हो सकें।

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BJP  युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष किसलय तिवारी ने कहा कि भारत का युवा पश्चिम से भिन्न हैं। हमारे यहां आदर्श युवाओं के उदाहरण बालक कृष्ण, लव-कुश और नचिकेता हैं। बालक कृष्ण ने बाल्यावस्था में ही बकासुर, अघासुर, पूतना, कंस का विनाश, कालिया नाग आदि का मानमर्दन किया। इसी क्रम में लव-कुश ने लंका के विजयी योद्धाओं को पराजित किया। नचिकेता ने यमराज को भी झुकने के लिए मजबूर कर दिया। यह भारतीय युवाओं के उदाहरण हैं। भारतीय युवाओं धु्रव भी प्रमुख हैं। भारतीय युवाओं का आदर्श पश्चिम का Gen Z नहीं है। यह पश्चिमी और भारतीय समाजशास्त्रियों समझना चाहिए। इसलिए अमेरिकी समाजशास्त्रियों का षड्यंत्र जेन जी भारतीय युवाओं पर न तो लागू होगा, न ही भारतीय युवा उसके अनुरुप व्यवहार ही करेंगे।

Gen Z कॉन्क्लेव प्रथम सत्र की शुरुआत संस्कृति संसद के मुख्य गीत हम हैं शाश्वत सत्य सनातन…से हुई। इस समारोह में एल वन कोचिंग, आर्य महिला इंटर कॉलेज, MP इंस्टीटयूट ऑफ कंप्यूटर अप्लीकेशन सहित वाराणसी के विभिन्न विद्यालयों एवं संस्थाओं के युवा छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुईं। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों का संचालन सर्वश्री कौस्तुभ त्रिपाठी, वागेश ओझा ने किया।

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