हनुमान जी को यमराज ने क्यों मारी लात? जानें रोचक कथा

Hanuman-Yamraj

Hanuman-Yamraj: रामायण और हनुमान जी से जुड़ी अनेक कथाएं भक्तों के बीच प्रचलित हैं। इनमें कुछ प्रसंग ऐसे भी हैं, जो अपने अनोखे घटनाक्रम के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। ऐसी ही एक लोकप्रचलित कथा में हनुमान जी और यमराज के बीच लंका में हुई मुलाकात का वर्णन मिलता है। इस कथा में रावण के रुद्र मंत्र, यमराज के अहंकार और बजरंगबली की अद्भुत शक्ति का उल्लेख किया जाता है। हालांकि, इस प्रसंग को प्रचलित धार्मिक कथा के रूप में ही देखा जाना चाहिए; इसे वाल्मीकि रामायण का प्रमाणित प्रसंग नहीं माना जाता।

सीता माता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी

कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम ने माता सीता की खोज का दायित्व हनुमान जी को सौंपा, तब पवनपुत्र समुद्र पार करके लंका पहुंचे। उनका उद्देश्य माता सीता का पता लगाना और भगवान राम तक उनकी जानकारी पहुंचाना था।

हनुमान जी का लंका गमन का प्रसंग!!!!! * जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत  हृदय अति भाए॥ तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुख कंद मूल फल खाई ...

हनुमान जी लंका में प्रवेश कर रहे थे। इसी दौरान अचानक किसी ने उनकी पीठ पर जोर से लात मार दी। अप्रत्याशित व्यवहार से हनुमान जी आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो सामने यमराज खड़े थे। हनुमान जी ने उनसे पूछा कि अतिथि के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया जा रहा है। आखिर बिना किसी कारण किसी को लात मारना कहां तक उचित है?

यमराज ने क्यों किया ऐसा व्यवहार?

कथा में यमराज ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि वह स्वयं इस व्यवहार के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। उनके अनुसार, लंकापति रावण ने एक शक्तिशाली रुद्र मंत्र के माध्यम से उन्हें बांध रखा था। इस मंत्र के प्रभाव के कारण उन्हें लंका में प्रवेश करने वालों के साथ कठोर व्यवहार करना पड़ता था।

आखिर लंकापति रावण चाहकर भी माता सीता को क्यों नहीं छू पाया? पढ़ें रामायण का  दिलचस्प प्रसंग - why ravan couldnt touch sita nalakuvaras curse revealed

यमराज ने यह भी बताया कि रुद्र मंत्र भगवान शिव से संबंधित शक्ति का प्रतीक है और उसके प्रभाव से निकलना आसान नहीं है। कथा के इस हिस्से में यमराज का अपनी शक्ति पर गर्व करना भी सामने आता है।

हनुमान जी ने तोड़ दिया रुद्र मंत्र का बंधन

यमराज की बात सुनकर हनुमान जी ने स्थिति को समझा। इसके बाद उन्होंने अपनी अद्भुत शक्ति का प्रदर्शन करते हुए उस बंधन पर प्रहार किया, जिससे यमराज स्वयं को बंधा हुआ बता रहे थे। कथा के अनुसार, हनुमान जी के प्रहार से बंधन टूट गया और यमराज मुक्त हो गए। बजरंगबली की शक्ति देखकर यमराज भी आश्चर्यचकित रह गए। जिस बंधन को वह बेहद शक्तिशाली बता रहे थे, उसे हनुमान जी ने पलभर में तोड़ दिया।

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