
Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स के संभावित आईपीओ को लेकर शेयर बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। ब्रोकरेज फर्मों के सकारात्मक आकलन के बीच कंपनी की लिस्टिंग पर 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यह अनुमान है और वास्तविक लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार के माहौल, IPO की कीमत तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा।
जियो प्लेटफॉर्म्स को लेकर विश्लेषकों की सकारात्मक राय के पीछे कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और भविष्य में कमाई बढ़ाने की संभावनाएं प्रमुख कारण हैं। एमके रिसर्च और स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने कंपनी के आईपीओ पर ‘Subscribe’ की सलाह दी है। इसका मतलब है कि इन ब्रोकरेज फर्मों के आकलन में IPO में निवेश के पक्ष में कुछ महत्वपूर्ण आधार मौजूद हैं।
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भारती एयरटेल के मुकाबले जियो का वैल्यूएशन
जियो प्लेटफॉर्म्स के मूल्यांकन को समझने के लिए इसकी तुलना भारती एयरटेल से की जा रही है। उपलब्ध विश्लेषण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की कमाई के आधार पर जियो का अनुमानित प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) अनुपात करीब 33.3 गुना है, जबकि भारती एयरटेल का यह अनुपात लगभग 40.7 गुना बताया गया है। इस आधार पर जियो का मूल्यांकन एयरटेल की तुलना में करीब 18 प्रतिशत कम बैठता है।
एक अन्य आकलन में जियो का P/E अनुपात 33.5 गुना और एयरटेल का 38.9 गुना बताया गया है। इस गणना के अनुसार जियो का मूल्यांकन लगभग 14 प्रतिशत कम है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि कंपनियों के कारोबार, मुनाफे की वृद्धि और भविष्य की संभावनाओं में अंतर के कारण केवल P/E अनुपात के आधार पर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए।
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5G पर खर्च घटने से वित्तीय स्थिति को मिल सकता है फायदा
जियो के लिए एक अहम पहलू नेटवर्क विस्तार पर होने वाले बड़े पूंजीगत खर्च में संभावित कमी है। एमके रिसर्च के मुताबिक, कंपनी का पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स वित्त वर्ष 2024 में राजस्व के 48.8 प्रतिशत के बराबर था, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 23.3 प्रतिशत रह गया।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 के लिए कंपनी का फ्री कैश फ्लो करीब 32,500 करोड़ रुपये बताया गया है। खर्च के दबाव में कमी और बेहतर नकदी प्रवाह से कंपनी को अपने कारोबार का विस्तार करने तथा नई तकनीकों में निवेश करने के लिए अधिक वित्तीय गुंजाइश मिल सकती है।
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ब्रॉडबैंड, क्लाउड और AI पर नजर
आने वाले वर्षों में जियो की वृद्धि को होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों से गति मिलने की उम्मीद है। कंपनी अपनी तकनीकी क्षमताओं और इन-हाउस टेक्नोलॉजी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी काम कर सकती है।
जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग से रिलायंस इंडस्ट्रीज के कारोबार में इस डिजिटल इकाई के मूल्य को अलग से आंकने का अवसर भी मिल सकता है। आईपीओ की घोषणा से जुड़ी खबरों के बाद 15 अक्टूबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में करीब 3.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
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