Saharanpur: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शनिवार सुबह हुई इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कार्रवाई को संविधान और कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस मामले की लड़ाई वह हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे।
इमरान मसूद ने दावा किया कि मस्जिद के स्वामित्व को लेकर पुराने दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि संबंधित जमीन और मस्जिद के अधिकार को लेकर सुनवाई के दौरान दस्तावेज अदालत और प्रशासन के सामने रखे गए थे। इसके बावजूद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामले में कानूनी प्रक्रिया चल रही थी तो इतनी जल्दी कार्रवाई क्यों की गई।
‘संविधान पर हथौड़ा चल रहा है’
कांग्रेस सांसद ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल को हटाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे संविधान और कानून के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को कानूनी तरीके से आगे ले जाएंगे और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
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इमरान मसूद के मुताबिक, उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रातभर अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन के सामने मामले से जुड़ी कई जानकारियां भी रखी गईं, लेकिन इसके बावजूद सुबह कार्रवाई कर दी गई।
जमीन के मालिकाना हक पर उठाया सवाल
इमरान मसूद ने मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक को लेकर भी प्रशासन के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों में जमीन के स्वामित्व को लेकर अलग स्थिति दिखाई देती है। उनका तर्क है कि केवल खसरा रिकॉर्ड के आधार पर किसी संपत्ति के अंतिम मालिकाना हक का फैसला नहीं किया जा सकता।
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वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित निर्माण सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जे से जुड़ा था और अदालत के आदेश के बाद कार्रवाई की गई। जिला अदालत ने 4 सितंबर को मस्जिद पक्ष की अपील खारिज करते हुए पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद शनिवार को प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
‘सहारनपुर के लिए काला दिन’
इमरान मसूद ने कार्रवाई को सहारनपुर के लिए दुखद बताते हुए लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्मस्थल के टूटने से किसी समुदाय के लोगों को खुशी नहीं होनी चाहिए। सांसद ने प्रदेश सरकार पर राजनीतिक एजेंडे के तहत कार्रवाई करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, सरकार और प्रशासन की ओर से इस मामले में कार्रवाई को न्यायालय के आदेश और सरकारी भूमि से जुड़े प्रशासनिक निर्णय के अनुपालन के रूप में बताया गया है।
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