
UP Election 2027: लखनऊ में बीते रविवार को बहुत राजनैतिक जमघट था। राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी, मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का राज्य मुख्यालय पर बड़े-बड़े कार्यक्रम थे। BJP के दो-दो नवनियुक्त राष्ट्रीय महामंत्री व एक मंत्री लखनऊ में रहे। हरीश द्विवेदी संगठन से घिस-पिट कर आये तो उनके स्वागत को कार्यकर्ताओं ने स्वागोत्सव बना दिया। शनिवार को लखनऊ में फिर रविवार को लखनऊ से बस्ती तक इसकी गूंज बनी रही। माना जा रहा है कि ऐसी गूंज कि इसके अनुमान के अनुसार सपा मुखिया अखिलेश यादव PDA में P से पंडित भूल ही गये होंगे।
उनके P से पंडित वाले पंडित नेता थर्रा गये। यही नहीं बहुजन समाज पार्टी की मुखिया के कार्यक्रम में बहुत बार नारा लगा कि “पंडित शंख बजायेगा, हाथी बढ़ता जायेगा” वहाँ भी पंडित को लेकर सन्नाटा पसर गया। चूंकि विधानसभा चुनाव मुंहाने पर है, इस वर्ग में लड़ासे बहुत हैं। जो कहीं से भी लड़ने का माद्दा रखते हैं, यही लड़ाई कइयों की पहचान है। पहचान न खो जाये वह सम्मान की लड़ाई लड़ने का अवसर नहीं खोते। स्मृति ईरानी भी लखनऊ में रविवार को थीं। उनके बारे में हमेशा यह मूल्यांकन रहा कि उनका जीवन बहुत हद तक संघर्षों से भरा रहा। निडर और हार न मानने वाली बेबाक महिला की स्वाभाविक छवि है। पार्टी उनको जब भी को राजनैतिक ताकत देती है तो दूसरे दल के विरोधियों का दर्द बढ़ जाता है।
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उनके आक्रामकता के कारण ही राहुल गांधी कांग्रेस की खानदानी लोकसभा सीट अमेठी से स्मृति ईरानी के सामने पराजित होकर भाग गये थे। संगठन में वह जितने तन्मयता से रची-बसीं उसकी का परिणाम है कि आज वह राष्ट्रीय महामंत्री बनीं हैं। लखनऊ में वह पार्टी के कार्यक्रम “सेवा संकल्प अभियान में हिस्सा लेने पहुंची हैं। उनकी हर हरकत से कांग्रेस की अम्मा हों या बेटा-बेटी-दामाद सबकी धुकधुकी बंधी रहती है। राष्ट्रीय मंत्री संगीता यादव का केंद्रीय पदाधिकारी होने के बाद लखनऊ हवाई अड्डे से एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें उनकी लोकप्रियता का चित्रण सबने देखा।
BJP के हर राजनैतिक गतिविधियों पर बारीक नजर रखे अखिलेश यादव का टेंशन यह है कि जब पूरी पार्टी राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी के लखनऊ से बस्ती के कार्यक्रम में थी तब लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में BJP का इतना बड़ा दूसरा कार्यक्रम कैसे हो गया। अखिलेश यादव के सलाहकारों को क्या पता कि द्विवेदी के कार्यक्रम में केवल संबंधित स्थानों के कुछ कार्यकर्ताओं और जमीन से जुड़े मात्र कुछ नेताओं की सक्रियता थी। लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के “सेवा संकल्प अभियान” की सोमवार को प्रदेश कार्यशाला आयोजित थी। इसी कार्यक्रम के लिये जिलों के चुनिंदा कार्यकर्ता ही सोमवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एकत्रित हुये थे।
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इसके रणनीतिकार यूपी BJP के महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह जी थे। उनके पास यूपी में दर्जनों अभियान का संचालन है। यह तो केवल एक अभियान सेवा संकल्प अभियान को लेकर पार्टी की आगामी चुनाव को लेकर रणनीति और तैयारियों पर चर्चा करने के लिये जुटान हुआ था। धर्मपाल सिंह जी इस प्रकार के न जाने कितने अभियान का संचालन उत्तर प्रदेश में कर रहे हैं। अखिलेश यादव यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि धर्मपाल सिंह कौन हैं? उनके PDA के हर दांव को वह आसमान दिखा देते हैं।
जब उनको पता चला कि वह भी PDA हैं तो माथा पकड़ कर बैठ गये। जब यह पता चला कि वह RSS से संबंधित हैं तो अभी तक चक्कर ही खा रहे हैं। मजबूत सूत्रों के अनुसार अखिलेश यह जानना चाहते हैं कि RSS में कितने PDA वर्ग के नेता हैं। जब उन्हें बताया जाता है कि केशव मौर्य, स्वतंत्रदेव, गिरीश यादव, सब RSS से हैं तो वह लंबी सांस खींचने लगते हैं।

कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, BJP प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, BJP की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह मौजूद रहे। यह सुन कर सपाई मुखिया पूछते हैं कि फिर अनुप्रिया पटेल, ओम प्रकाश राजभर, जयंत चौधरी, डॉ संजय निषाद, पूजा पाल भी BJP के लिये ही लड़ेंगे तो!
सोमवार को ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में यूपी स्टेट यूनिट के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों के अलावा सभी 75 जिलाध्यक्षों की अहम बैठक बुलाई है। मायावती विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को धार देने के साथ ही विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी रणनीति बनाएंगी। यह स्पष्ट हो गया है कि अभी तक बसपा कुछ छोटे दलों को लेकर अपने नेतृत्व में घटक बना कर चुनाव लड़ने के पक्ष में है। उन्होंने अपने पार्टी के रणनीतिकारों को अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, आरक्षण, बेरोजगारी, पेपर लीक समेत अन्य मुद्दों को लेकर BJP पर हमलावर रहने का निर्देश दिया। मायावती ने कहा कि अब हमको भी जेनजी को सक्रिय करना चाहिये।
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खासकर अपने जेन-जी को जो भविष्य में बसपा का मूमेंट आगे बढ़ाएं। विरोधी अपने-अपने दांव चल रहे हैं। ऐसे में बसपा को अपनी तैयारियां पूरी रखने के साथ-साथ अपने तेवर को बरकरार रखना होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी बीते कुछ माह से लगातार संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने में जुटी है। बसपा सुप्रीमो के निर्देश पर एक अगस्त से पूरे प्रदेश में जिला व मंडल स्तर की समीक्षा बैठकों में कार्यकर्ताओं को खास संदेश दिए जा रहे हैं। उनमें जोश भरने के साथ ही विधानसभा प्रभारियों/प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जाने का सिलसिला भी चल पड़ा है। बसपा के पास निचले स्तर तक कार्यकर्ता हैं लेकिन मायावती के लगातार उपेक्षा से वह हर चुनाव में बिखर जाते हैं। हालांकि बसपा सुप्रीमो ने कई मुद्दों पर BJP के अलावा सपा और कांग्रेस पर भी हमलावर रही हैं।
सोमवार को ही समाजवादी पार्टी ने भी लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई थी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के कहने पर बुलाई गई इस अहम बैठक में यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के प्लान पर मंथन हुआ। बैठक को सपा के संगठनात्मक और चुनावी रोडमैप के लिहाज से अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी की इस अहम बैठक में सिर्फ राजनीतिक चर्चा ही नहीं, बल्कि तकनीकी तैयारी पर जोर दिया है। वह सोशल साइट्स पर BJP की पीछे धकेलना चाहती है। जल्द ही वह सोशल मीडिया से जुड़े कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में हाईटेक प्रशिक्षण कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिये देश-विदेश की आईटी कंपनियों से संपर्क कर लिया गया है।
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इस महीने समाजवादी पार्टी का जिलेवार IT सेल स्थापित हो सकता है। सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव ने दूसरे राज्यों में रह रहे UP के ऐसे लोग जो समाजवादी पार्टी की विचारधारा के हैं और अब यहां मतदान नहीं करते उन्हें वापस लाकर फिर से UP का मतदाता बनाने की जमीनी मुहिम चलाने जा रहे हैं। यूपी को वह मंडलवार बांट कर रणनीति बना रहे हैं। चूंकि कांग्रेस UP में विक्रम हो चुकी है वह बिना बैताल के UP के किसी चुनाव में नहीं उतर सकती इस लिये उसके लिये क्या कहूँ।
हालांकि BJP से कांग्रेस में जाकर, मूल कांग्रेसियों को धूल चटा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने वाले अजय राय थोड़ा-मोड़ा फड़फड़ा रहे जरूर रहे हैं लेकिन वही उतना ही हमला करते हैं जितना BJP को दिक्कत न करे। कांग्रेस UP में ज्यों-ज्यों सपा व बसपा के कंधे पर चढ़ कर चुनाव लड़ने की आदी होती गयी त्यों-त्यों कांग्रेस UP से खुद ही अपने सिमटने की कहानी बढ़ती चली गयी। इमरान मसूद व्यक्तिगत कारणों से सपा पर हमलावर रहते हैं, कांग्रेस के बड़े नेता मजा लेते हैं। लेकर जब अखिलेश भौंहें तरेरते हैं तो दोनों बहन-भाई मिल कर इमरान को “पुनः मूसको भव” कर देते हैं।
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