चीनी मिलों की समय से पहले पेराई पर अड़चन, मजदूरों की कमी बनी बड़ी चुनौती

New Delhi

New Delhi: देश में चीनी की कीमतों और उपलब्ध स्टॉक को लेकर चिंता के बीच चीनी उद्योग के सामने एक नई परेशानी खड़ी होती दिख रही है। चीनी मिलों में इस बार सामान्य समय से पहले गन्ने की पेराई शुरू करने की तैयारी चल रही है, लेकिन महाराष्ट्र समेत कुछ प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में कटाई मजदूरों की कमी इस योजना के लिए चुनौती बन सकती है। यदि समय पर पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध नहीं हुए तो गन्ने की कटाई और मिलों तक उसकी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

समय से पहले शुरू हो सकती है पेराई

आमतौर पर देश में चीनी मिलों का नया पेराई सत्र अक्टूबर की शुरुआत से शुरू होता है। हालांकि, इस बार चीनी के घरेलू स्टॉक और बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए उद्योग संगठन पेराई सत्र को करीब 10 से 15 दिन पहले शुरू करने की संभावना पर जोर दे रहे हैं।

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इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) की ओर से भी सरकार के सामने समय से पहले क्रशिंग शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। उद्योग का मानना है कि नई फसल की चीनी बाजार में जल्दी आने से उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

महाराष्ट्र में मजदूरों की कमी बड़ी समस्या

समय से पहले पेराई शुरू करने की राह में सबसे बड़ी अड़चन गन्ना कटाई मजदूरों की उपलब्धता को लेकर सामने आ रही है। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में गन्ना कटाई का काम अभी भी श्रमिकों पर निर्भर है। यहां कई मजदूर हर साल दिवाली के आसपास या नवंबर की शुरुआत में अपने काम वाले क्षेत्रों में पहुंचते हैं।

ऐसे में यदि मिलें अक्टूबर से पहले या शुरुआती अक्टूबर में पेराई शुरू करती हैं, तो उन्हें पर्याप्त संख्या में कटाई मजदूर जुटाने में मुश्किल हो सकती है। इससे खेतों से गन्ने की कटाई और मिलों तक उसकी ढुलाई की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका है।

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मजदूरी बढ़ाने की मांग

मजदूरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी मिलों को अधिक मजदूरी देने की चुनौती का भी सामना करना पड़ सकता है। श्रमिक संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि तय समय से पहले काम शुरू कराने के लिए मजदूरी और अन्य सुविधाओं में बदलाव जरूरी हो सकता है। गन्ने की कटाई में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन देश के कई हिस्सों में अभी भी मैनुअल श्रमिकों पर निर्भरता काफी अधिक है। यही वजह है कि अचानक पेराई सत्र आगे बढ़ाने का असर सीधे श्रमिकों की उपलब्धता पर पड़ सकता है।

चीनी स्टॉक को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक मौजूदा चीनी सीजन के अंत यानी 30 सितंबर तक देश में उपलब्ध स्टॉक करीब 35 लाख टन तक रह सकता है। चिंता इसलिए है क्योंकि अक्टूबर और नवंबर के दौरान नई फसल की चीनी बाजार में पर्याप्त मात्रा में आने में समय लग सकता है। यदि शुरुआती महीनों में स्टॉक कम रहा तो घरेलू बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

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