
हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मानसून सत्र, लोकसभा में सिर्फ 19% और राज्यसभा में 39% काम
Monsoon Session : संसद का मानसून सत्र गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। सत्र के आखिरी दिन भी दोनों सदनों में राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला। लोकसभा में कार्यवाही बेहद कम समय चली, जबकि राज्यसभा में भी सीमित कामकाज के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। पूरे सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव बना रहा, जिसका सीधा असर संसद की उत्पादकता पर पड़ा।
लोकसभा में सिर्फ 19 फीसदी काम
मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की कुल 19 बैठकें हुईं। सदन को करीब 114 घंटे काम करना था, लेकिन वास्तविक कार्यवाही लगभग 17 घंटे 30 मिनट ही चल सकी। इस तरह करीब 96 घंटे 30 मिनट का समय कामकाज के लिए इस्तेमाल नहीं हो पाया। लोकसभा की कुल उत्पादकता महज 19 फीसदी रही।
सत्र के आखिरी दिन स्थिति और भी खराब रही। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। बताया गया कि आखिरी दिन सदन करीब एक मिनट ही चल सका।
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राज्यसभा की उत्पादकता भी कमजोर
राज्यसभा में भी कामकाज उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाया। सदन में करीब 114 घंटे की कार्यवाही प्रस्तावित थी, लेकिन लगभग 37 घंटे 20 मिनट ही काम हो सका। इस दौरान करीब 76 घंटे 40 मिनट का समय हंगामे और अन्य कारणों से इस्तेमाल नहीं किया जा सका। राज्यसभा की उत्पादकता 39.17 फीसदी रही।
राज्यसभा में सदस्यों को सवाल पूछने, शून्यकाल और विशेष उल्लेख के जरिए मुद्दे उठाने के पर्याप्त अवसर मिलने थे, लेकिन उपलब्ध समय का बड़ा हिस्सा उपयोग नहीं हो सका। आंकड़ों के मुताबिक सदस्यों के लिए 285 सवाल, 380 शून्यकाल प्रस्ताव और 380 विशेष उल्लेख का अवसर था। हालांकि इनमें से सिर्फ 16 सवाल, 52 शून्यकाल प्रस्ताव और 93 विशेष उल्लेख ही सदन में उठाए जा सके।
दोनों सदनों से 12 विधेयक पारित
कम उत्पादकता के बावजूद सरकार 12 विधेयकों को दोनों सदनों से पारित कराने में सफल रही। इनमें सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम, राष्ट्रीय सम्मान, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या, MSME, टैक्सेशन, बैंकर्स बुक्स ऑफ एविडेंस, ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स, केरल के नाम में बदलाव, NCDC और MMDR से जुड़े संशोधन विधेयक शामिल रहे।
हालांकि विधेयकों पर विस्तृत चर्चा को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए। लोकसभा में सीमित विधायी चर्चा ही हो सकी, जबकि राज्यसभा में भी कई मुद्दों पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच मतभेद दिखाई दिए।
छात्रों के प्रदर्शन पर रहा गतिरोध
सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा प्रमुख विवाद बना रहा। गृह मंत्री अमित शाह की ओर से चर्चा की पेशकश किए जाने की बात सामने आई, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया। विपक्ष की ओर से सरकार से पहले जवाब देने की मांग की गई।
कुल मिलाकर मानसून सत्र में विधायी काम तो हुआ, लेकिन लगातार हंगामे और राजनीतिक गतिरोध ने संसद के कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया। कम उत्पादकता ने एक बार फिर सदन की कार्यवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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