सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक्शन में योगी सरकार, मदरसों में उच्च शिक्षा पर लगेगी रोक

UP Madarsa

‘अब मदरसों में होगी सिर्फ 12वीं तक की पढ़ाई

UP Madarsa News: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। राज्य सरकार मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव पेश करेगी। इस संशोधन का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप मदरसा शिक्षा प्रणाली को कानूनी रूप से व्यवस्थित करना है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद मदरसों में केवल आलिम यानी इंटरमीडिएट (12वीं) स्तर तक की शिक्षा ही मान्य होगी, जबकि कामिल और फाजिल जैसे उच्च शिक्षा स्तर के पाठ्यक्रम परिषद के तहत संचालित नहीं किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मदरसों में कालिम और फाजिल की डिग्री मिलना बंद हो गया है। अब उत्तर प्रदेश की सरकार मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम में संशोधन की तैयारी में है। इस संबंध में संशोधन प्रस्ताव मंगलवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित बदलावों के तहत अब मदरसों में केवल आलिम (इंटरमीडिएट स्तर) तक की शिक्षा ही मान्य होगी, जबकि कामिल और फाजिल की डिग्रियां नहीं दी जा सकेंगी।

जानिए क्या बोला था सुप्रीम कोर्ट?

दरअसल, नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया था कि कोई भी राज्य शिक्षा बोर्ड इंटरमीडिएट (12वीं) से आगे की डिग्रियां प्रदान नहीं कर सकता। अदालत ने कहा था कि मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा दी जाने वाली कामिल (स्नातक समकक्ष) और फाजिल (स्नातकोत्तर समकक्ष) डिग्रियों को वैधानिक मान्यता नहीं दी जा सकती। इसके बाद से इन दोनों पाठ्यक्रमों की डिग्री जारी करने की प्रक्रिया रोक दी गई थी।अब उत्तर प्रदेश सरकार इस न्यायिक फैसले को विधिक स्वरूप देने के लिए मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम में संशोधन करने जा रही है।

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कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद संशोधित कानून लागू किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी तरह की कानूनी अस्पष्टता की स्थिति न बने। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के उस फैसले के अनुरूप उठाया जा रहा है, जिसमें कहा गया था कि कोई भी शिक्षा बोर्ड 12वीं (इंटरमीडिएट) से आगे की डिग्री प्रदान नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया था कि मदरसा बोर्ड द्वारा दी जाने वाली कामिल (स्नातक समकक्ष) और फाजिल (स्नातकोत्तर समकक्ष) डिग्रियां वैधानिक मान्यता नहीं रखती हैं।

संशोधन के बाद बनाया जाएगा कानून

अब तक प्रदेश के मदरसों में मौलवी (हाईस्कूल समकक्ष), आलिम (इंटरमीडिएट समकक्ष), कामिल (स्नातक समकक्ष) और फाजिल (स्नातकोत्तर समकक्ष) स्तर तक की पढ़ाई कराई जाती थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कामिल और फाजिल स्तर की पढ़ाई एवं डिग्री वितरण पर रोक लग चुकी है। प्रस्तावित संशोधन के बाद परिषद के अधीन केवल मौलवी और आलिम स्तर तक की शिक्षा व्यवस्था ही संचालित रहेगी। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो मदरसों से उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।

नए प्रावधान लागू होने के बाद कामिल और फाजिल जैसी पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों, डिग्री कॉलेजों या अन्य मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेना होगा। यानी उच्च शिक्षा का मार्ग अब नियमित विश्वविद्यालयी व्यवस्था के माध्यम से ही तय होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मदरसों में कामिल और फाजिल की डिग्री देना पहले ही बंद हो चुका है। अब राज्य सरकार मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम में संशोधन कर इस व्यवस्था को कानूनी रूप देने जा रही है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद संशोधित प्रावधान लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

मदरसों में होती थी आलिम और कामिल तक पढ़ाई

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम किसी विशेष शिक्षा व्यवस्था को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को मौजूदा शिक्षा कानूनों और राष्ट्रीय शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप बनाना है, ताकि विद्यार्थियों को भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी या शैक्षणिक परेशानी का सामना न करना पड़े। बता दें कि उत्तर प्रदेश के मदरसों में अब तक मौलवी (हाईस्कूल समकक्ष), आलिम (इंटरमीडिएट समकक्ष), कामिल (स्नातक समकक्ष) और फाजिल (स्नातकोत्तर समकक्ष) पाठ्यक्रम संचालित होते थे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कामिल और फाजिल की पढ़ाई और डिग्री देना बंद हो गया था। हायर एजूकेशन के लिए छात्रों को जाना होगा विश्वविद्यालय अब योगी सरकार मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम में संशोधन कर इस व्यवस्था को कानून के अनुरूप बना रही है। संशोधन लागू होने के बाद मदरसा शिक्षा परिषद के तहत केवल आलिम (इंटरमीडिएट/12वीं) तक की शिक्षा ही संचालित होगी, जबकि हायर एजूकेशन के लिए छात्रों को विश्वविद्यालयों या अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्रवेश लेना होगा।

आज हो रही कैबिनेट बैठक

सरकार का कहना है कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में किया जा रहा है, ताकि मदरसा शिक्षा व्यवस्था को मौजूदा कानूनी ढांचे के अनुरूप बनाया जा सके। इन्ही सब प्रावधानों को लेकर सीएम योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हो रही है। इसमें ठोस निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस संशोधन प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा होगी।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो उत्तर प्रदेश की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण और स्थायी बदलाव माना जाएगा। इसके बाद परिषद की भूमिका मुख्य रूप से 12वीं तक की शिक्षा के संचालन तक सीमित हो जाएगी, जबकि उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों का रुख करना होगा।

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