
Journalist पत्रकार कौन यह तय करने का अधिकार मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन को कबसे? ध्यान रहे पत्रकार वही जिसे सामाजिक व किसी अखबार संस्था की मान्यता हो। सरकारी मान्यता प्राप्त पत्रकार कभी सरकार के गलत फैसलों की आलोचना लिख सकता है क्या?
विजय श्रीवास्तव
लखनऊ । लखनऊ में पिछले दिनों हज़रत गंज चौराहे पर अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला। खुद को कथित मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन बता कर कथित पत्रकारों का एक झुंड प्रेस लिखे वाहनों की जांच कर रहा था कि वे पत्रकार हैं या नहीं? ठीक है असल पत्रकारों की शिनाख्त आज की जरूरत है इसलिए कि फ़र्जी पत्रकारों की बाढ़ आ गई है और इससे पेशागत पत्रकार कहीं न कहीं अपमानित होते हैं लेकिन वाहनों को रोक कर पत्रकार होने न होने की जांच का अधिकार कथित पत्रकार संगठन को किसने दिया?यदि पत्रकार वही है जिसे सरकारी मान्यता मिली हो तो कहना चाहूंगा कि उसमें दस प्रतिशत ही असल पत्रकार होंगे बाकी सब तिकड़म से मान्यता लेकर भौकाल बनाने वाले ही हैं।
एक दो नहीं हजारों की संख्या में ऐसे पत्रकार हैं जो रोज देश के बड़े बड़े अखबारों में छपते हैं लेकिन उनके पास कोई प्रेस कार्ड नहीं होता तो क्या उनके पत्रकार होने न होने की शिनाख्त ये कथित पत्रकार संगठन करेंगे? राजधानी के हजरतगंज चौराहे पर कुछ तथा कथित मान्यता प्राप्त पत्रकारों द्वारा प्रेस लिखे कारों,बाइकों को रोककर प्रेस कार्ड मागते हुए वीडियो अपलोड किया गया। प्रदेश के सबसे बडे चौराहे से उक्त कार्यवाही से तमाम जनपदों के काफी पत्रकारों को यह नही समझ मे आया कि इन मान्यता प्राप्त पत्रकार को पुलिसिंग करने का आदेश शासन के किस अधिकारी ने दिया, किसी ने आदेश दिया तो वह लिखित था य मौखिक, क्या आदेश को उल्लेख करके कोई सूचना सजग हेतु खबर प्रकाशित किया गया था?

अगर मान्यता प्राप्त पत्रकार य संगठन को स्वतह संज्ञान लेकर उक्त कदम उठाना था तो इसके पहले उक्त समस्या पर शासन य उसके सूचना विभाग द्वारा अखबारों मे सूचना प्रकाशित करवा य सजग कर चौराहे पर पत्रकारों को अपमानित होने से बचाया जा सकता था । आप सभी जानते हैं किसी के भी जुल्म ज्यादती, भ्रष्टाचार के विरुद्ध पत्रकार ही मुखर होकर कलम चलाता है मान्यता प्राप्त पत्रकार बडे भाइयों द्वारा सार्वजनिक रूप से जब छोटों को इस तरह अपमानित किया जायेगा तो भष्ट अधिकारी कर्मचारी आदि असमाजिक लोगों द्वारा बदले की भावना से मान्यता प्राप्त पत्रकारों का सह पाकर क्या अपमानित नही किया जा सकता है? आज का मान्यता प्राप्त पत्रकार कभी गैर मान्यता प्राप्त पत्रकार था इसलिए उन्हें विदित ही है बहुत से अखबार मालिक य उसके संपादक पत्रकारों का कितना शोषण करते हैं खबर कबरेज हेतु न पेट्रोल मोबाइल रिचार्ज न मान देय ही देना चाहते हैं प्रेस कार्ड देने के नाम पर वर्षों टालू मिक्चर पिलाते रहते हैं, वह पत्रकार मित्र केवल सम्मान के लिए रात दिन एक कर पत्रकारों के बीच बैठने अधिकारियों व समाज मे सम्मान हेतु जीवन वर्वाद करता रहता है।
ऐसा चेकिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार मित्र शासन प्रशासन के नजरों मे आकर हाईलाइट हो संगठन में भी बडा पद जिम्मेदारी तो पा सकते हैं पर कभी न कभी उन्हें भी पश्चात होगा ही कि हमने बीच चौराहे पर पुलिसिंग कर गलत किया,यह कार्य हम सक्षम सरकारी एजेंसियों से करवा सकते थे? ऐसे अगर गहराई से देखा जाए तो पूरे प्रदेश मे गाडियों वाइकों पर पुलिस, न्यायाधीश, आर्मी व भारत सरकार, उत्तर प्रदेश शासन सरकार व उसके विभागो का नाम लिखे वाहन प्रदेश के सड़कों पर प्रत्येक दस वाहनो मे एक पर लिखे मिल जायेंगे क्या वह अवैध नही है,घर परिवार मे एक अधिकारी है तो परिवार व रिस्तेदार सभी अपने अपने गाड़ियों पर पोर्ट पोलियों लिखवा लेते हैं वह भी गलत है। अभियान शासन स्तर से चले तो सब पर चले।
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