
Liquidity in Real Estate : भारत में रियल एस्टेट को लंबे समय से सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों में गिना जाता है। अधिकांश निवेशक किसी प्रॉपर्टी को खरीदते समय उसकी संभावित कीमत, भविष्य में मिलने वाले रिटर्न, किराए की आमदनी और बिल्डर की साख जैसे पहलुओं पर ध्यान देते हैं। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि एक ऐसा महत्वपूर्ण फैक्टर है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है—लिक्विडिटी। यानी जरूरत पड़ने पर किसी प्रॉपर्टी को कितनी जल्दी और सही कीमत पर बेचा जा सकता है।
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि कोई संपत्ति कागजों पर करोड़ों रुपये की हो, लेकिन उसे बेचने में महीनों लग जाएं या कीमत कम करनी पड़े, तो ऐसा निवेश उतना फायदेमंद नहीं माना जा सकता। इसलिए केवल प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने को ही सफलता का पैमाना नहीं माना जाना चाहिए।
सिर्फ प्राइस ग्रोथ नहीं, बिक्री की क्षमता भी देखें
अक्सर निवेशक यह मान लेते हैं कि जिस इलाके में संपत्ति के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां निवेश सबसे बेहतर रहेगा। हालांकि, बाजार की वास्तविक स्थिति इससे अलग हो सकती है। कई बार किसी प्रॉपर्टी की कीमत लगातार बढ़ती रहती है, लेकिन खरीदारों की कमी के कारण उसे बेच पाना आसान नहीं होता। इसके विपरीत, कुछ ऐसे क्षेत्र भी होते हैं जहां कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन वहां लगातार खरीदार मौजूद रहते हैं। ऐसी संपत्तियां जरूरत पड़ने पर जल्दी बिक जाती हैं और निवेशक को बेहतर वित्तीय लचीलापन मिलता है।
मांग वाले इलाकों में निवेश करना ज्यादा समझदारी
विशेषज्ञों के अनुसार निवेश करते समय सिर्फ आकर्षक प्रोजेक्ट या बड़े दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी चाहिए जहां वास्तविक खरीदारों की लगातार मांग बनी रहती है।
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दिल्ली-NCR का द्वारका एक्सप्रेसवे इसका अच्छा उदाहरण माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां बड़ी संख्या में आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जिससे यह साबित हुआ कि इस क्षेत्र में केवल निवेशकों की नहीं बल्कि वास्तविक खरीदारों की भी मजबूत मौजूदगी है। इसी मांग के चलते यहां संपत्तियों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।
इंफ्रास्ट्रक्चर तय करता है भविष्य
किसी भी प्रॉपर्टी की लिक्विडिटी काफी हद तक उसके आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करती है। मेट्रो कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, स्कूल, अस्पताल और रोजगार के बड़े केंद्र किसी इलाके की मांग को बढ़ाते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में खरीदारों की संख्या अधिक होती है, जिससे प्रॉपर्टी की रीसेल आसान हो जाती है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कारण निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
किराए की मांग भी देती है बड़ा संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी इलाके में मजबूत रेंटल मार्केट भविष्य की अच्छी लिक्विडिटी का संकेत देता है। जिन सोसायटियों में किराएदारों की अच्छी मांग होती है, वहां रीसेल भी अपेक्षाकृत तेज होती है क्योंकि नए खरीदार ऐसे क्षेत्रों को विकसित और रहने योग्य मानते हैं। यही ट्रेंड कमर्शियल रियल एस्टेट में भी देखने को मिलता है। जिन बिजनेस हब्स में ऑफिस स्पेस की मांग लगातार बनी रहती है, वहां निवेशकों को बेहतर किराया और भविष्य में आसान एग्जिट का लाभ मिलता है।
निवेश से पहले एग्जिट प्लान जरूर बनाएं
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि हर निवेशक को यह सोचकर निवेश करना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर वह उस संपत्ति से कितनी आसानी से बाहर निकल सकता है। बिजनेस विस्तार, पारिवारिक जरूरत या किसी अन्य निवेश के लिए पूंजी जुटाने की स्थिति में लिक्विडिटी सबसे अहम भूमिका निभाती है। यदि किसी क्षेत्र में सप्लाई अधिक और खरीदार कम हैं, तो प्रॉपर्टी बेचने के लिए कीमत घटानी पड़ सकती है, जिससे वास्तविक रिटर्न प्रभावित होता है।
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