
रवीन्द्रनाथ टैगोर संग था खास रिश्ता
Devika Rani : हिंदी सिनेमा जगत की फर्स्ट लेडी का दर्जा पाने वाली दिग्गज अभिनेत्री देविका रानी को कोई कैसे भला कैसे भूल सकता है। देविका रानी ने उस वक्त हिंदी सिनेमा में कदम रखा जब महिलाओं को घर से बाहर निकलने की इजाजत भी नहीं थी। वहीं, अगर कोई महिला फिल्मों में काम करती तो उसे वेश्यावृति समझा जाता था। यही वो वजह थी कि फिल्मों में हीरो ही हिरोइनों का रोल करते थे। उस दौर में देविका रानी ने ऐसा करने की हिम्मत की और यही नहीं, भारतीय सिनेमा की पहली हीरोइन होने का श्रेय भी हासिल किया। लेकिन क्या आपको देविका रानी और रवीन्द्रनाथ टैगोर के बीच के खास रिश्ते के बारे में पता है।
30 और 40 के दशक की सुपरस्टार थीं देविका रानी
साल 1933 में ‘कर्मा’ से फिल्मों में कदम रखने वाली देविका रानी की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। देविका रानी 30 और 40 के दशक की सुपरस्टार थीं। उस दौर में देविका हीरो से ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस रही हैं। देविका रानी को अक्सर “भारतीय गार्बो” कहा जाता था और उन्होंने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देविका रानी के अनूठे गुणों ने उन्हें अन्य अभिनेत्रियों और फिल्म जगत की हस्तियों से अलग पहचान दिलाई।
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बॉम्बे टॉकीज की सह-स्थापना
देविका रानी ने कई महिला प्रधान फिल्मों में अभिनय करके दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। विशेष रूप से, उन्होंने अपने पति और फिल्म निर्माता हिमांशु राय के साथ मिलकर भारत का पहला पूर्णतः कार्यरत फिल्म स्टूडियो, बॉम्बे टॉकीज की सह-स्थापना की। फिल्म जगत से विदा होने के बावजूद, उन्होंने भारतीय सिनेमा को पहचाने दिलाने के लिए शानदार विरासत छोड़ी है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर की रिश्तेदार थीं देविका
बता दें कि देविका रानी और रवीन्द्रनाथ टैगोर के बीच खास रिश्ता था। वो रवीन्द्रनाथ टैगोर की रिश्तेदार थीं। दरअसल, देविका रानी की जो दादी थीं, वह ठाकुर रवीन्द्रनाथ टैगोर की बहन थीं। इस रिश्ते से वो नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की परपोती (Grandniece) थीं।
ऐसे हुई फिल्मों में एंट्री
देविका रानी ने करियर की शुरुआत में टेक्सटाइल डिजाइनिंग में नौकरी शुरू की थी, लेकिन उन्हें अपने इस काम में मजा नहीं आ रहा था। ऐसे में उन्होंने फिल्मों फिल्मों में आने का फैसला किया। साल 1928 में देविका की लंदन में हिमांशु राय से मुलाकात हुई। वहां वह अपनी एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। हिमांशु राय, देविका के काम करने के तरीके से प्रभावित हुए और अपने प्रोडक्शन हाउस में नौकरी दे दी।
इस फिल्म से किया डेब्यू
हिमांशु राय और देविका रानी के बीच साथ काम करते-करते नजदीकियां बढ़ने लगीं। वो एक-दूसरे से प्यार करने लगे। हालांकि, देविका रानी उस वक्त पहले से शादीशुदा थीं। इसके बावजूद वो हिमांशु पर फिदा हो गईं। हिमांशु राय और देविका ने साल 1929 में शादी कर ली। हिमांशु राय जब लंदन से वापस भारत लौटे तो उन्होंने 1933 में ‘कर्मा’ नाम से फिल्म बनाई, जिसमें देविका को साइन किया। फिल्म सुपरहिट होने के साथ विवादों में रही थी। इसके पीछे की वजह थी फिल्म का किसिंग सीन। इस फिल्म में हिमांशु राय और देविका के बीच चार मिनट लंबे किसिंग सीन पर खूब बवाल मचा। लेकिन इन बातों का देविका पर काई फर्क नहीं पड़ा और वो आगे बढ़ती रहीं।
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