
Congress-SP उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर INDIA गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे पर तनाव के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं। कांग्रेस के नवनियुक्त उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के हालिया बयानों ने समाजवादी पार्टी (सपा) की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस ने न सिर्फ करीब आधी सीटों पर दावा जताया है, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के प्रति नरम रुख अपनाकर सियासी समीकरणों को और जटिल बना दिया है।
कांग्रेस की ‘बराबरी’ की मांग से बढ़ा सपा पर दबाव
राजेंद्र पाल गौतम ने संकेत दिए हैं कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में “बराबर-बराबर हिस्सेदारी” के आधार पर सीटों की मांग रखेगी। यानी 403 सीटों वाली यूपी विधानसभा में कांग्रेस लगभग 150 सीटों तक की दावेदारी कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व की बातचीत के बाद ही होगा, लेकिन शुरुआती बयान ने ही सियासी हलचल तेज कर दी है।
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403 सीटों का गणित और पुराना इतिहास
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। इससे पहले 2017 के चुनाव में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया था, जिसमें सपा ने 298 और कांग्रेस ने 105 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। उस चुनाव में गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर बेहतर प्रदर्शन किया। सपा ने 62 सीटों पर लड़कर 37 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 17 में से 6 सीटों पर जीत दर्ज की।
सीटों पर खींचतान: 80 से 150 तक की मांग
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस शुरुआती तौर पर 70–80 सीटों की अपेक्षा से आगे बढ़कर करीब 150 सीटों तक की मांग कर सकती है। वहीं सपा का रुख अभी तक सीमित हिस्सेदारी देने का बताया जा रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह स्थिति गठबंधन में “दबाव की रणनीति” का हिस्सा है, जहां कांग्रेस अपने प्रदर्शन और लोकसभा चुनाव के परिणामों को आधार बनाकर ज्यादा हिस्सेदारी चाहती है।
मायावती पर नरम रुख और ‘बहुजन कार्ड’ की राजनीति
राजेंद्र पाल गौतम ने बसपा प्रमुख मायावती की तारीफ करते हुए उन्हें “कद्दावर नेता” बताया और उनके प्रति सम्मान जताया। उन्होंने बहुजन समाज के मुद्दों पर एकजुटता की अपील भी की। दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बिना तय कार्यक्रम के लखनऊ में मायावती के आवास पहुंचा था, हालांकि उस समय मुलाकात नहीं हो सकी थी।
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दलित राजनीति और चंद्रशेखर आजाद फैक्टर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी में दलित राजनीति का केंद्र तेजी से बदल रहा है। सांसद चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कांग्रेस भी अपनी रणनीति बदल रही है। दलित समुदाय से आने वाले राजेंद्र पाल गौतम को यूपी की जिम्मेदारी देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस का फोकस अब दलित और ब्राह्मण वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने पर है।
सपा के लिए चुनौती, कांग्रेस का बढ़ता आत्मविश्वास
सूत्रों के मुताबिक सपा फिलहाल कांग्रेस को 70–80 सीटों से ज्यादा देने के मूड में नहीं है। ऐसे में दोनों दलों के बीच तालमेल पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। हालांकि 2017 में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन (2 सीटें) और सपा की 111 सीटों की जीत के बावजूद, इस बार कांग्रेस लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन को आधार बनाकर मजबूत दावेदारी पेश कर रही है।
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