
Tensiun intra Stat Ünì e Israel : अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते के बाद क्षेत्रीय हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट किया है कि उसके युद्धपोत अभी भी क्षेत्र में तैनात रहेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समझौते की सभी शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं। इसी बीच, कम से कम दो तेल टैंकर अमेरिकी नाकाबंदी को बिना किसी रुकावट के पार करने में सफल रहे। इन टैंकरों में लगभग 38 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल भरा हुआ था। बुधवार रात होर्मुज जलडमरूमध्य से 1.25 करोड़ बैरल से अधिक तेल की आवाजाही दर्ज की गई, जिससे वैश्विक तेल बाजार को राहत मिली है और युद्ध के दौरान बढ़ी कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है।
समझौते की मुख्य शर्तें
इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने स्थायी रूप से सैन्य संघर्ष समाप्त करने पर सहमति जताई है। साथ ही अगले 60 दिनों के भीतर बड़े और जटिल मुद्दों पर विस्तृत समझौते को अंतिम रूप देने की योजना बनाई गई है। ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में निष्क्रिय या कम संवर्धित स्तर पर लाना होगा। इसके अलावा ईरान ने परमाणु हथियारों का निर्माण या अधिग्रहण नहीं करने का वादा किया है।
अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए कई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी है, जिससे तेहरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल निर्यात करने का अवसर मिलेगा। ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अपने परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करने की अनुमति देगा। हालांकि यूरोपीय संघ ने अभी अपने प्रतिबंध हटाने से इनकार किया है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने कहा कि प्रतिबंध हटाने का समय अभी नहीं आया है।
ट्रंप ने समझौता क्यों किया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह समझौता अमेरिका को संभावित आर्थिक संकट से बचाने के लिए किया गया। युद्ध के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, शेयर बाजार दबाव में था और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा था।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वे अमेरिका को ऐसी आर्थिक परिस्थितियों में नहीं ले जाना चाहते थे जैसी 1930 के दशक की महामंदी के दौरान देखने को मिली थीं। जानकारी के अनुसार, उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ वर्साय पैलेस में हुई बैठक के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान ने अलग से दस्तखत किए।
जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा क्यों रद्द हुआ?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को स्विट्जरलैंड में ईरानी प्रतिनिधियों के साथ वार्ता के लिए जाना था। उनकी यात्रा की पूरी तैयारी हो चुकी थी और मीडिया दल भी तैयार था। लेकिन अंतिम समय में व्हाइट हाउस ने यात्रा रद्द कर दी और इसकी वजह लॉजिस्टिक कारण बताई। हालांकि क्षेत्रीय सूत्रों का दावा है कि लेबनान में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई के विरोध में ईरान ने अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने से इनकार कर दिया था। ईरान ने इसे समझौते की भावना के खिलाफ बताया।
पाकिस्तान ने भी बदली योजना
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होना था। लेकिन अमेरिका और ईरान द्वारा पहले ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद पाकिस्तान का प्रस्तावित दौरा भी स्थगित कर दिया गया।
अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद
समझौते के बाद अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल के कुछ नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि वे अमेरिकी समर्थन का पर्याप्त सम्मान नहीं कर रहे हैं। वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप इस समय उन चुनिंदा विश्व नेताओं में हैं जो अब भी इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने इजरायली नेतृत्व को वास्तविक परिस्थितियों को समझने की सलाह भी दी।
बताया जा रहा है कि अप्रैल में युद्धविराम लागू होने के बाद ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच रणनीतिक मतभेद बढ़ गए। जहां ट्रंप संघर्ष समाप्त करना चाहते थे, वहीं इजरायल के कुछ नेता सैन्य दबाव बनाए रखने के पक्ष में थे।
ईरान के सर्वोच्च नेता का बयान
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजताबा खामेनेई ने युद्ध के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष बातचीत का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि बातचीत का अर्थ आत्मसमर्पण नहीं बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने प्रभाव का प्रदर्शन करने के बाद ईरान खुद को पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में महसूस कर रहा है और इसी कारण बातचीत का रास्ता अपनाने को तैयार हुआ है।
अमेरिका में भी उठ रहे सवाल
समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर भी विरोध देखने को मिल रहा है। कई रिपब्लिकन सांसदों का आरोप है कि प्रशासन ने ईरान को जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं। विशेष रूप से प्रतिबंधों में ढील और संभावित पुनर्निर्माण सहायता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन रोजर विकर ने कहा कि समझौते के कुछ प्रावधान ट्रंप प्रशासन के घोषित उद्देश्यों से मेल नहीं खाते।
आगे क्या?
समझौते के अनुसार अगले 60 दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विस्तृत वार्ता होगी। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य का मुख्य मार्ग पूरी तरह खुला नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक वहां अभी भी कई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का काम जारी है। इसलिए जहाज वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस समय अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की प्राथमिकता लेबनान में तनाव कम करना है, ताकि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
खबरों में अपडेट रहना हमारी आदत है और सबसे आगे रहना मेरा जुनून। अब नया लुक ऐप भी ले आया है। आप सभी से अनुरोध है कि आप इसे अपना प्यार, दुलार और आशीर्वाद दें। आप सभी से निवेदन है कि मेरा न्यूज ऐप अपने अपने फोन में इंस्टॉल कर लीजिए। मैं आप सभी का आभारी रहूंगा…. https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
ये भी पढ़े
अल्लू अर्जुन की बढ़ीं मुश्किलें, संध्या थिएटर भगदड़ मामले में नामपल्ली कोर्ट ने किया तलब
एशियन गेम्स 2026 टीम विवाद: मनिका बत्रा ने PM मोदी और खेल मंत्री से लगाई गुहार
फिल्मी दुनिया की चमक के पीछे का दर्द: क्यों बढ़ रहे हैं कलाकारों के सुसाइड केस?

