
North-East AFSPA Update: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि अगले वर्ष तक एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरा नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट (AFSPA) के दायरे से बाहर हो सकता है। उन्होंने यह बयान असम-नागालैंड सीमा पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां केंद्र, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच तेल और खनिज खोज से जुड़े एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
अमित शाह ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट अब तेजी से “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2019 से अब तक क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक शांति समझौते किए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उनके अनुसार, इन प्रयासों के चलते नॉर्थ-ईस्ट में हिंसक घटनाओं में लगभग 80 प्रतिशत तक की कमी आई है, जबकि AFSPA के दायरे में आने वाला क्षेत्र भी काफी घटा है।
गृह मंत्री ने असम-नागालैंड सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे विवादित क्षेत्र (Disputed Area Belt – DAB) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तेल और खनिज संसाधनों की खोज से जुड़ा मुद्दा पिछले तीन दशकों से अधिक समय से लंबित था, जिसे अब समझौते के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया गया है। यह कदम न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
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अमित शाह ने कहा कि इस समझौते से तेल उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एक ही क्षेत्र से प्रतिदिन 1000 से 1500 बैरल तेल उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर कई गुना किया जा सकता है। इसके अलावा, इस क्षेत्र से लगभग 15,000 करोड़ रुपये मूल्य के तेल उत्पादन की संभावना भी जताई गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का सही तरीके से दोहन होने पर भारत की ऊर्जा निर्भरता विदेशी देशों पर काफी हद तक कम हो सकती है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति बनी हुई है, यह समझौता भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
सरकार का मानना है कि शांति समझौतों और विकास परियोजनाओं के माध्यम से नॉर्थ-ईस्ट में स्थिरता और आर्थिक प्रगति को नई गति मिली है। AFSPA के दायरे में कमी और सुरक्षा स्थिति में सुधार को भी इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।इस पूरे घटनाक्रम को नॉर्थ-ईस्ट के विकास और सुरक्षा नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।
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