
Rebellion in TMC : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों के बीच पार्टी के 14 लोकसभा सांसदों के दिल्ली में भाजपा नेताओं से मुलाकात करने की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, ये सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे, जहां पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और भाजपा नेता बिप्लब देब भी मौजूद थे।सूत्रों का दावा है कि सुबह से ही टीएमसी के कुछ सांसद भूपेंद्र यादव के आवास पर मौजूद थे। दोपहर बाद शुभेंदु अधिकारी भी वहां पहुंचे और सांसदों के साथ बैठक हुई। बताया जा रहा है कि इस दौरान कुल 14 TMC सांसदों ने उनसे मुलाकात की। हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
सुखेंदु शेखर के इस्तीफे ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी
इस घटनाक्रम से पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद पार्टी के पांच सांसद उनसे मिलने पहुंचे, जिससे टीएमसी के अंदरूनी हालात को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।सुखेंदु शेखर से मुलाकात करने वालों में बर्दवान पूर्व की सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा के सांसद प्रसून बनर्जी, कूचबिहार के सांसद जगदीश बसुनिया, झारग्राम के सांसद कालिपद सोरेन और बांकुरा के सांसद अरूप चक्रवर्ती शामिल थे।
TMC में बढ़ रही है नाराजगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर असंतोष के संकेत लगातार सामने आए हैं। पहले विधायकों के स्तर पर मतभेद की खबरें आईं और अब सांसदों के बीच भी नाराजगी की चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा और उसके बाद दिल्ली में हुई बैठकों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
“आज सुखेंदु बोले हैं, कल दूसरे भी बोलेंगे”
TMC से अलग हो चुके नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुखेंदु शेखर रॉय द्वारा उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं और संसद के कामकाज को लेकर उनकी बातों में दम है।ऋतब्रत ने कहा, “संसद कोई क्विज शो की जगह नहीं है। सुखेंदु शेखर जैसे वरिष्ठ सांसद को जिस तरह पीछे कर दिया गया, वह निराशाजनक है। आज उन्होंने अपनी बात कही है, कल दूसरे नेता भी इसी तरह आवाज उठा सकते हैं।”
बढ़ सकती है TMC की मुश्किलें
दिल्ली में टीएमसी सांसदों की बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी के भीतर कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव आकार ले रहा है। हालांकि अभी तक न तो टीएमसी और न ही भाजपा की ओर से इन बैठकों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है, लेकिन घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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2 thoughts on “दिल्ली में TMC सांसदों की गुप्त बैठक से गरमाई बंगाल की राजनीति”
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