
Bakrid पाकिस्तान में बकरीद का त्योहार समाप्त होने के बाद देश के सबसे बड़े शहर कराची में सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के कई इलाकों में पशु अवशेष, मांस के टुकड़े और कूड़े के ढेर अब भी सड़कों पर पड़े हैं, जिससे भीषण बदबू फैल रही है। गर्मी और उमस के बीच हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो रहा है।सिंध सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बोर्ड के अनुसार बकरीद के तीन दिनों के दौरान और उसके बाद कराची से 1,42,816 टन से अधिक पशु अवशेष एकत्र कर डंप किए गए। इनमें करीब 64,122 टन पशुओं के अंग और अन्य जैविक अवशेष शामिल थे। हालांकि, इतने बड़े सफाई अभियान के बावजूद शहर के कई हिस्सों में गंदगी और कचरा अब भी दिखाई दे रहा है।
कई इलाकों में बदतर हालात
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक कराची के कई रिहायशी इलाकों में बकरीद खत्म होने के बाद भी कचरा और पशु अवशेष पड़े हुए हैं। तेज धूप और नमी के कारण ये अवशेष तेजी से सड़ने लगे हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है। निवासियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं रही और कई मोहल्लों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
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प्रशासन पर उठे सवाल, लोगों में नाराजगी
सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन त्योहार के बाद समय पर कचरा नहीं उठा पाया। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
जमात-ए-इस्लामी ने साधा निशाना
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफ़िज़ नईम उर रहमान ने प्रांतीय प्रशासन और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरती गई और अरबों रुपये के बजट के बावजूद अपेक्षित स्तर पर काम नहीं हुआ। उनका कहना है कि कई जगह लोगों को निजी स्तर पर सफाई के लिए खर्च करना पड़ रहा है।
मेयर ने किया बचाव
वहीं मुर्तज़ा वहाब ने सफाई अभियान का बचाव करते हुए दावा किया कि नगर निगम की टीमें लगातार मैदान में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं शहर के विभिन्न इलाकों का दौरा कर सफाई कार्यों की निगरानी की और यह सुनिश्चित किया कि पशु अवशेषों को समय पर हटाया जाए।
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सफाई व्यवस्था पर फिर उठे बड़े सवाल
बकरीद के बाद कराची में सामने आए हालात ने एक बार फिर पाकिस्तान के बड़े शहरों में शहरी प्रबंधन और सफाई व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर नागरिकों में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

